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दिवाली पर पटाखों को मिल सकती है सीमित समय की मंजूरी
Ratna Netam
30 Sept 2026 2:43 PM IST

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नई दिल्ली। दिवाली के दौरान पटाखे जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने संकेत दिया कि त्योहार के दौरान कुछ खास तरह के अनुमत पटाखों को जलाने की इजाजत दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए निश्चित समय सीमा तय की जाएगी। कोर्ट ने साफ किया कि वह न तो पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है और न ही पूरे दिन बिना किसी रोक-टोक के पटाखे जलाने की अनुमति देने के पक्ष में।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर ऐसा रास्ता तलाशना जरूरी है, जिससे त्योहार मनाने वाले लोगों की भावनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सके। कोर्ट ने कहा कि दिवाली के दौरान पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से त्योहार मनाने वाले लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। दूसरी तरफ अगर दिनभर और रातभर पटाखे जलाने की खुली छूट दे दी गई तो इसका असर पर्यावरण के साथ आम लोगों पर भी पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का जिक्र किया। अदालत ने कहा कि लगातार पटाखे जलने से इन वर्गों को ज्यादा परेशानी हो सकती है। वायु प्रदूषण के साथ तेज आवाज भी लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। इसी कारण अदालत ने कहा कि अनुमति और प्रतिबंध के बीच संतुलित रास्ता तलाशना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह न तो पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से सहमत होगी और न ही 24 घंटे पटाखे जलाने की अनुमति देगी। अदालत का मानना है कि जिन पटाखों को इस्तेमाल करने की मंजूरी दी जाएगी, उनके लिए एक निश्चित समय निर्धारित किया जाना चाहिए। इससे लोग त्योहार भी मना सकेंगे और पटाखों के कारण होने वाले प्रदूषण और अन्य परेशानियों को भी सीमित करने का प्रयास किया जा सकेगा।
फिलहाल कोर्ट की ओर से पटाखे जलाने का अंतिम समय तय नहीं किया गया है। बुधवार की सुनवाई में अदालत ने अपने संभावित रुख का संकेत दिया है। इसलिए किसी विशेष समय को अभी अंतिम आदेश मानना सही नहीं होगा। आगे की सुनवाई और संबंधित पक्षों की रिपोर्ट के आधार पर यह तय हो सकता है कि किन प्रकार के पटाखों को अनुमति दी जाएगी और उन्हें किस समय के दौरान जलाया जा सकेगा।
मामले में पटाखों के अलग-अलग प्रकारों को लेकर भी विचार किया जा रहा है। अदालत यह देखना चाहती है कि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव डालने वाले किन पटाखों को सीमित अवधि के लिए अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि अंतिम व्यवस्था बनाते समय पटाखों के प्रकार के साथ उनके इस्तेमाल के समय को महत्वपूर्ण आधार बनाया जाएगा।
दिवाली के समय पटाखों को लेकर हर साल बहस तेज हो जाती है। एक तरफ बड़ी संख्या में लोग पटाखों को त्योहार के उत्सव से जोड़कर देखते हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में त्योहार के मौसम में वायु प्रदूषण बड़ी चिंता बन जाता है। ऐसे में अदालत के सामने चुनौती यह है कि दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे किसी एक पक्ष को पूरी तरह नजरअंदाज न करना पड़े।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से यह भी साफ हुआ कि अदालत इस बार पूर्ण प्रतिबंध जैसे विकल्प को सीधे अपनाने के बजाय नियंत्रित इस्तेमाल की संभावना पर विचार कर रही है। अगर अंतिम आदेश में भी यही रुख बरकरार रहता है तो लोगों को केवल निर्धारित समय के भीतर ही अनुमत श्रेणी के पटाखे जलाने की अनुमति मिल सकती है।
हालांकि अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि इसे पटाखे जलाने की खुली छूट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। 24 घंटे पटाखे जलाने की मांग को कोर्ट ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इसका अर्थ है कि यदि अनुमति मिलती भी है तो वह कई शर्तों और तय समय के अधीन हो सकती है।
कोर्ट ने पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी महत्वपूर्ण माना। दिवाली के दौरान बड़ी मात्रा में पटाखे जलने से धुआं और शोर बढ़ने की आशंका रहती है। खासकर पहले से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति मुश्किल पैदा कर सकती है। इसलिए अदालत ने कहा कि इस मामले में केवल त्योहार की भावना ही नहीं बल्कि अन्य लोगों के जीवन और स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखना होगा।
पटाखों को लेकर अदालत का संभावित फॉर्मूला यही दिखाई दे रहा है कि न तो पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और न ही बिना नियंत्रण के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए। इसके बजाय चुनिंदा पटाखों और सीमित समय की व्यवस्था बनाई जा सकती है। इस तरह त्योहार मनाने की स्वतंत्रता और पर्यावरण संरक्षण के बीच बीच का रास्ता निकालने की कोशिश होगी।
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के आगामी आदेश पर रहेगी। अंतिम आदेश में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दिवाली पर कौन से पटाखे जलाने की अनुमति होगी और उनके लिए कितने समय की खिड़की तय की जाएगी। फिलहाल इतना साफ है कि अदालत ने पूर्ण प्रतिबंध और 24 घंटे की अनुमति, दोनों विकल्पों से दूरी बनाते हुए नियंत्रित और समयबद्ध व्यवस्था के पक्ष में संकेत दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद दिवाली पर पटाखों को लेकर तस्वीर कुछ हद तक साफ हुई है, लेकिन अंतिम नियम अभी तय होना बाकी है। कोर्ट के अगले आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस साल पटाखों के इस्तेमाल को लेकर लोगों को किन शर्तों और समय सीमा का पालन करना होगा।
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