दिल्ली-एनसीआर

कठुआ फायरिंग में मारे गए चार CISF जवानों को अंतिम विदाई

Ratna Netam
1 Oct 2026 9:36 PM IST
कठुआ फायरिंग में मारे गए चार CISF जवानों को अंतिम विदाई
x
नई दिल्ली। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में हुई आपसी गोलीबारी की घटना में जान गंवाने वाले अपने चार जवानों को श्रद्धांजलि दी है। चारों जवान 29 सितंबर को बसोहली के मशका इलाके में स्थित सेवा-III हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। गुरुवार 1 अक्टूबर को उनके पैतृक स्थानों पर पूरे सम्मान और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। CISF ने चारों जवानों के परिवारों, सहयोगियों और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
इस घटना में असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल संजीव कुमार और कांस्टेबल मोहम्मद रफीक की मौत हुई थी। CISF के मुताबिक घटना के बाद चारों जवानों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मामले में एक हेड कांस्टेबल को हिरासत में लिया गया है और घटना के कारणों तथा पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। CISF ने इस मामले में कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी भी शुरू की है।
असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे CISF की NTPC टांडा यूनिट में तैनात थे। उन्होंने 3 अक्टूबर 2015 को बल में सेवा शुरू की थी। उनका अंतिम संस्कार उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में स्थित उनके पैतृक गांव मथिया दौलतपुर में किया गया। अंतिम यात्रा में परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों के साथ CISF के अधिकारी और जवान भी मौजूद रहे। DIG मनीष कुमार सिंह और NTPC टांडा यूनिट के डिप्टी कमांडेंट समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह CISF की पंजाब एवं हरियाणा सिविल सचिवालय यूनिट, चंडीगढ़ में तैनात थे। उन्होंने 9 अगस्त 2013 को CISF जॉइन किया था। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के लूणा गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया। सुबह उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण, पूर्व सैनिक और परिवार के सदस्य अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। उनके 10 वर्षीय बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी। CISF की चंडीगढ़ यूनिट के जवानों ने भी अंतिम सलामी देकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
कांस्टेबल संजीव कुमार सेवा हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में CISF यूनिट के साथ तैनात थे। उन्होंने 29 अक्टूबर 2013 को बल में सेवा शुरू की थी। उनका अंतिम संस्कार जम्मू के मख्यां गांव स्थित रमीण क्षेत्र में सुबह करीब 10:30 बजे किया गया। CISF की सलाल हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट यूनिट के जवानों ने अंतिम संस्कार में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
वहीं कांस्टेबल मोहम्मद रफीक CISF की दुलहस्ती हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट यूनिट में तैनात थे। उन्होंने 8 मार्च 2010 को बल जॉइन किया था। उनका अंतिम संस्कार जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के कंडाली गांव में किया गया। परिवार और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में CISF की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर और औपचारिक सलामी दी गई। दुलहस्ती यूनिट के अधिकारियों और जवानों ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी।
चारों जवानों की मौत 29 सितंबर की शाम हुई फायरिंग की घटना में हुई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार CISF के एक हेड कांस्टेबल का अपने कुछ सहयोगियों के साथ विवाद हुआ था, जिसके बाद उसने कथित तौर पर अपने सर्विस हथियार से गोली चला दी। चार जवान गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद आरोपी जवान को काबू में लेकर पुलिस के हवाले कर दिया गया तथा उसका हथियार जब्त कर लिया गया।
घटना के पीछे के कारण को लेकर जांच जारी है। कुछ प्रारंभिक रिपोर्टों में कार्यस्थल पर बच्चे को लाने को लेकर विवाद की बात सामने आई है, लेकिन पुलिस और CISF अभी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने से पहले किसी एक कारण को अंतिम रूप से स्थापित नहीं माना गया है। वरिष्ठ CISF अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया है और घटना की परिस्थितियों, ड्यूटी व्यवस्था तथा गोलीबारी से पहले हुए विवाद के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
सेवा-III हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट कठुआ जिले के बसोहली इलाके में हिमाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक स्थित है। परियोजना की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF के जवान संभाल रहे थे। घटना के बाद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया गया तथा पुलिस और CISF की अलग-अलग जांच शुरू की गई।
CISF ने कहा है कि वह चारों जवानों के शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ा है। नियमों के अनुसार परिवारों को हर संभव सहायता और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। बल ने जवानों की सेवा और कर्तव्य के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए गहरी संवेदना जताई है।
चारों जवानों की अंतिम विदाई के दौरान उनके पैतृक इलाकों में शोक का माहौल रहा। परिवार के सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। CISF अधिकारियों और जवानों ने औपचारिक सम्मान के साथ अपने साथियों को अंतिम सलामी दी। वहीं कठुआ में हुई इस गंभीर घटना की जांच अब आगे बढ़ रही है, ताकि गोलीबारी के कारणों और घटना की पूरी परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।
Next Story