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विश्व आदिवासी दिवस पर होना था कार्यक्रम JNU ने उमर खालिद की किताब वाली बुकिंग रद्द की

Ratna Netam
9 Aug 2026 2:38 PM IST
विश्व आदिवासी दिवस पर होना था कार्यक्रम JNU ने उमर खालिद की किताब वाली बुकिंग रद्द की
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नई दिल्ली : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने पूर्व छात्र और कार्यकर्ता उमर खालिद की किताब **‘फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज’** पर होने वाली परिचर्चा के लिए बुक किए गए एसएसएस-1 ऑडिटोरियम की अनुमति रद्द कर दी है। यह कार्यक्रम 10 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाना प्रस्तावित था। कार्यक्रम का आयोजन जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) की ओर से किया जाना था। कार्यक्रम का समय दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया था।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द करने के लिए जो कारण बताया गया है, वह कार्यक्रम से संबंधित जानकारी को लेकर है। प्रशासन के अनुसार, वेन्यू रिक्वेस्ट फॉर्म में प्रस्तावित कार्यक्रम के संबंध में पूरी और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। विश्वविद्यालय ने कहा है कि परिसर में ऑडिटोरियम और अन्य स्थानों के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। इसी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बुकिंग को रद्द करने का फैसला लिया गया है।
JNU प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक पत्र संयुक्त कुलसचिव की ओर से जारी किया गया है। पत्र को स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS) के डीन की मंजूरी प्राप्त है। रद्द किए गए पत्र के मुताबिक, एसएसएस-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग सेंटर फॉर इंटरनेशनल लीगल स्टडीज (CISLS) से जुड़े डॉ. अविनाश कुमार की ओर से की गई थी। प्रशासन का कहना है कि आयोजन स्थल की बुकिंग और उसके इस्तेमाल के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाना जरूरी है।
विश्वविद्यालय ने अपने निर्णय को प्रशासनिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए कहा कि JNU में लोकतांत्रिक और विकेंद्रीकृत प्रक्रियाओं के तहत प्रशासनिक नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के अनुरूप ही परिसर में कार्यक्रमों के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाता है। यदि किसी कार्यक्रम के संबंध में आवश्यक जानकारी फॉर्म में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं होती है तो प्रशासन को उस बुकिंग की समीक्षा करने का अधिकार है।
प्रस्तावित कार्यक्रम का आयोजन विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर किया जाना था। परिचर्चा में कई जाने-माने शिक्षाविदों, इतिहासकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही गई थी। कार्यक्रम के लिए प्रोफेसर प्रभु महापात्रा, प्रोफेसर उमा चक्रवर्ती, शुद्धब्रत सेनगुप्ता, हर्ष मंदर और बानो ज्योत्स्ना लाहिरी जैसे वक्ताओं के नाम सामने आए थे।
कार्यक्रम का विषय उमर खालिद की किताब ‘फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज’ से जुड़ा था। उमर खालिद JNU के पूर्व छात्र हैं और वर्तमान में जेल में बंद हैं। ऐसे में उनकी किताब पर विश्वविद्यालय परिसर में परिचर्चा आयोजित किए जाने को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा की संभावना थी। ऑडिटोरियम की अनुमति रद्द किए जाने के बाद इस मुद्दे पर छात्र राजनीति में भी प्रतिक्रिया तेज होने के आसार हैं।
JNUSU से जुड़े लोगों की ओर से प्रशासन के फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। छात्र पक्ष का तर्क है कि किसी पुस्तक पर अकादमिक चर्चा के लिए परिसर में स्थान उपलब्ध कराया जाना विश्वविद्यालय की बौद्धिक और लोकतांत्रिक संस्कृति का हिस्सा होना चाहिए। वहीं प्रशासन की ओर से इसे किसी विचार या व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में फैसला न बताते हुए निर्धारित प्रक्रिया और दस्तावेजी जानकारी से जुड़ा मामला बताया गया है।
ऑडिटोरियम की बुकिंग कार्यक्रम से ठीक पहले रद्द किए जाने के कारण मामले ने और तूल पकड़ लिया है। कार्यक्रम के आयोजकों के सामने अब आयोजन स्थल को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रशासन ने कार्यक्रम पर किसी अलग प्रकार का प्रतिबंध लगाए जाने की बात नहीं कही है। फिलहाल विवाद का मुख्य बिंदु एसएसएस-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द किया जाना है।
JNU में इससे पहले भी विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर छात्र संगठनों तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। ऐसे में उमर खालिद की किताब पर प्रस्तावित चर्चा की अनुमति रद्द होने से एक बार फिर परिसर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रशासनिक नियमों और अकादमिक बहस को लेकर बहस तेज हो सकती है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यही स्पष्ट किया गया है कि कार्यक्रम स्थल की बुकिंग के लिए मांगी गई जानकारी पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराई गई थी। दूसरी ओर छात्र संगठन इस फैसले को अलग नजरिए से देख रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोजक कार्यक्रम के लिए किसी अन्य स्थल की व्यवस्था करते हैं या प्रशासन के निर्णय के खिलाफ आगे कोई कदम उठाते हैं।
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