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गतिरोध खत्म करने की कोशिश तेज ओम बिरला ने दलों से मांगा सहयोग
Ratna Netam
10 Aug 2026 3:25 PM IST

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नई दिल्ली : लोकसभा में पिछले कुछ समय से जारी गतिरोध के बीच सोमवार को लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति यानी बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होने पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के सदन नेताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि संसद जनता की आवाज उठाने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है और इस आवाज को सदन में सुनाई देना चाहिए। इसके लिए सभी दलों को मिलकर गतिरोध खत्म करने का रास्ता तलाशना होगा और आपसी सहमति बनानी होगी।
बैठक के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना केवल सरकार या किसी एक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का सहयोग जरूरी है। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि वे आपसी मतभेदों के बावजूद संसद की कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग का वातावरण तैयार करें। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग राजनीतिक विचार होना स्वाभाविक है, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सदन का चलना भी उतना ही जरूरी है।
ओम बिरला ने सदस्यों की प्रभावी भागीदारी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसद में होने वाली चर्चा केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें सार्थक और रचनात्मक विचार-विमर्श होना चाहिए। देश की जनता संसद की कार्यवाही को देखती और सुनती है, इसलिए सदस्यों की जिम्मेदारी है कि वे अपने विचार तथ्यों और तर्कों के साथ रखें। उन्होंने कहा कि सदन में जब महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है तो उसका प्रभाव देश की नीतियों और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए सदस्यों को पर्याप्त समय उपलब्ध कराने की बात भी कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए सदस्य जितना समय मांगेंगे, उन्हें उतना समय उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा अधूरी न रह जाए और सांसद अपनी बात विस्तार से रख सकें। अध्यक्ष के इस रुख को संसद में सार्थक बहस को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक में ओम बिरला ने कहा कि जनता के मुद्दों को संसद के गलियारों में इंतजार करते हुए नहीं छोड़ा जा सकता। देश के नागरिकों की अनेक समस्याएं और अपेक्षाएं हैं, जिन्हें उनके चुने हुए प्रतिनिधियों को सदन में उठाना चाहिए। संसद ही वह मंच है जहां विभिन्न क्षेत्रों, वर्गों और समुदायों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है और उनके समाधान के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की आत्मा सदन में बसती है। यदि सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होती है तो इससे संसदीय कामकाज प्रभावित होता है और उन मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाती, जिनकी जनता को उम्मीद होती है। ऐसे में गतिरोध का सीधा असर आम नागरिकों के हितों पर पड़ता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने और सदन की कार्यवाही को सामान्य बनाने के लिए आगे आने की अपील की।
बीएसी की बैठक में अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सभी दलों को अपनी-अपनी पार्टी की ओर से ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जिसमें सांसद बिना व्यवधान के अपनी बात रख सकें। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को संसदीय परंपराओं और सदन की गरिमा का ध्यान रखना होगा। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए असहमति जरूरी है, लेकिन असहमति को सार्थक बहस और संवाद के जरिए सामने लाया जाना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात पर भी जोर दिया कि सदस्यों को अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा। संसद में चुने गए प्रतिनिधियों से जनता को उम्मीद रहती है कि वे उसके सवालों और समस्याओं को मजबूती से उठाएंगे। इसलिए जरूरी है कि सदन में जनहित के मुद्दों पर पर्याप्त समय दिया जाए और चर्चा को परिणाम तक पहुंचाने की कोशिश की जाए।
सोमवार की बैठक में ओम बिरला की अपील ऐसे समय सामने आई है जब संसद की कार्यवाही को लेकर राजनीतिक गतिरोध चर्चा का विषय बना हुआ है। अध्यक्ष ने सभी दलों को साथ लेकर सदन को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से चलाने की जरूरत बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सभी राजनीतिक दल सहयोग करें तो संसद में महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा संभव है।
उन्होंने अंत में सभी दलों से एकजुट होकर रास्ता निकालने की अपील करते हुए कहा कि संसद की गरिमा और उपयोगिता बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। जनता ने अपने प्रतिनिधियों को अपनी आवाज संसद तक पहुंचाने के लिए चुना है। ऐसे में जरूरी है कि सदन में जनता की आवाज सुनी जाए, उस पर चर्चा हो और लोकतांत्रिक तरीके से समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जाए।
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