दिल्ली-एनसीआर

GST फर्जीवाड़े पर ED का बड़ा एक्शन

Ratna Netam
2 Oct 2026 6:31 PM IST
GST फर्जीवाड़े पर ED का बड़ा एक्शन
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जमशेदपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी कथित धोखाधड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में 135 शेल कंपनियों के नेटवर्क का पता चलने का दावा किया गया है। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों का इस्तेमाल बिना किसी वास्तविक सामान या सेवा की आपूर्ति के 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी इनवॉइस जारी करने के लिए किया गया।
ईडी की यह जांच झारखंड के जमशेदपुर स्थित डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की ओर से दर्ज कराई गई कई शिकायतों के आधार पर शुरू हुई। डीजीजीआई ने अपनी जांच के दौरान कथित तौर पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट तैयार करने और इसे आगे दूसरी इकाइयों तक पहुंचाने से जुड़े बड़े नेटवर्क का पता लगाया था। इसके बाद मामले में ईडी ने जांच शुरू की।
ईडी ने अपने बयान में बताया कि जांच के दौरान सामने आया कि कथित सिंडिकेट ने बड़े स्तर पर शेल कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया था। एजेंसी के मुताबिक कुल 135 ऐसी कंपनियों की पहचान की गई, जिनका इस्तेमाल कथित फर्जी लेनदेन के लिए किया जा रहा था। ये कंपनियां मुख्य रूप से कागजों पर मौजूद थीं और इनके जरिए वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों के बिना ही इनवॉइस जारी किए जाने का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन शेल कंपनियों के माध्यम से 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के फर्जी इनवॉइस जारी किए गए। आरोप है कि इन बिलों के पीछे किसी वास्तविक सामान या सेवा की सप्लाई नहीं हुई थी। इसके बावजूद दस्तावेजों में कारोबारी लेनदेन दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट तैयार किया गया और इसे आगे बढ़ाया गया।
जीएसटी व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट के तहत पात्र कारोबारी अपनी खरीद पर चुकाए गए जीएसटी को बिक्री पर देय टैक्स के साथ समायोजित कर सकते हैं। लेकिन फर्जी बिलों के जरिए बिना वास्तविक खरीद-बिक्री के आईटीसी तैयार करना नियमों का उल्लंघन है। इसी व्यवस्था का कथित दुरुपयोग इस मामले की जांच के केंद्र में है।
डीजीजीआई की शिकायतों में सामने आए तथ्यों के आधार पर ईडी ने मामले की जांच आगे बढ़ाई। एजेंसी ने वित्तीय लेनदेन और संबंधित कंपनियों के नेटवर्क की पड़ताल की। इसी दौरान 135 शेल कंपनियों से जुड़े कथित नेटवर्क की जानकारी सामने आई। एजेंसी का दावा है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी इनवॉइस तैयार करने और आईटीसी को आगे पहुंचाने के लिए किया गया।
इस मामले में ईडी ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी अब पूरे नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य संभावित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि इतनी बड़ी संख्या में बनाई गई कंपनियों का संचालन किस तरह किया जा रहा था और इनके माध्यम से तैयार किए गए कथित फर्जी आईटीसी का लाभ किन-किन इकाइयों तक पहुंचा।
5,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी इनवॉइस का मामला होने के कारण जांच का दायरा बड़ा माना जा रहा है। 135 शेल कंपनियों के नेटवर्क की बात सामने आने से यह भी संकेत मिलता है कि कथित धोखाधड़ी को कई कंपनियों के जरिए अंजाम दिया गया। हालांकि पूरे मामले में आगे की जांच के बाद ही अलग-अलग कंपनियों और व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होगी।
एजेंसी के अनुसार, कथित सिंडिकेट की कार्यप्रणाली में ऐसी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया जो केवल दस्तावेजों पर कारोबारी गतिविधियां दिखा रही थीं। इन कंपनियों के नाम पर इनवॉइस जारी किए गए, जबकि उसके अनुरूप वास्तविक सामान या सेवाओं की आपूर्ति नहीं हुई। इन्हीं इनवॉइस के आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट तैयार किए जाने का आरोप है।
मामले की शुरुआत डीजीजीआई जमशेदपुर की शिकायतों से हुई थी। जीएसटी इंटेलिजेंस से जुड़े अधिकारियों ने कथित फर्जी आईटीसी बनाने और उसे आगे पहुंचाने के मामले की पहचान की। इसके बाद शिकायतों और सामने आए तथ्यों के आधार पर ईडी ने अपनी जांच शुरू की।
ईडी की कार्रवाई के बाद अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड और कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर कथित लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शेल कंपनियां किसके नियंत्रण में थीं और फर्जी इनवॉइस से तैयार आईटीसी का अंतिम लाभ किसे मिला।
फर्जी आईटीसी के मामलों में सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसी कारण जीएसटी से जुड़ी जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में कंपनियों के रजिस्ट्रेशन, बिलिंग और लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच करती हैं। मौजूदा मामले में बड़ी संख्या में कंपनियों और हजारों करोड़ रुपये के इनवॉइस का दावा होने के कारण जांच व्यापक स्तर पर की जा रही है।
फिलहाल ईडी ने मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी की है और जांच जारी है। एजेंसी की ओर से सामने रखी गई जानकारी के मुताबिक 135 शेल कंपनियों के कथित नेटवर्क के जरिए 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी इनवॉइस जारी किए गए थे। अब जांच में इस पूरे नेटवर्क, इससे जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।
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