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ED ने वेदांता ग्रुप के खिलाफ FEMA जांच के तहत छापेमारी की शुरू

Kavita2
2 Jun 2026 10:52 AM IST
ED ने वेदांता ग्रुप के खिलाफ FEMA जांच के तहत छापेमारी की शुरू
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Delhi दिल्ली: एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत वेदांता ग्रुप के खिलाफ छापेमारी शुरू की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई सोमवार को विभिन्न जगहों पर की गई।

अधिकारियों के अनुसार, सेंट्रल एजेंसी ने अरबपति बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल की कंपनी के खिलाफ विदेशी मुद्रा संबंधी नियमों के उल्लंघन की जांच शुरू की थी। इसके बाद ED ने संबंधित कार्यालयों और ठिकानों पर छापेमारी की।

इस मामले में कंपनी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ED की कार्रवाई का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी निवेश और फंड्स का लेनदेन FEMA के तहत लागू नियमों के अनुसार किया गया है या नहीं।

FEMA के तहत छापेमारी आमतौर पर विदेशी मुद्रा लेनदेन, विदेशी निवेश और निर्यात-आयात से जुड़े मामलों की जांच के लिए की जाती है। अधिकारियों ने बताया कि जांच का दायरा कंपनी के विभिन्न विभागों और लेनदेन के रिकॉर्ड तक फैला हुआ है।

अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाले वेदांता ग्रुप भारत और दुनिया भर में माइनिंग, रिफाइनिंग और धातु उद्योग में सक्रिय है। कंपनी के खिलाफ ED की यह कार्रवाई तब हुई है जब एजेंसी को विदेशी मुद्रा लेनदेन में नियमों के उल्लंघन की संभावनाएं मिलीं।

इस मामले में ED की टीम ने सोमवार को कंपनी के कार्यालयों में दस्तावेज़ों, रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस की जांच की। अधिकारियों ने कहा कि सभी दस्तावेज़ों और लेनदेन की जानकारी सुरक्षित की जा रही है और आगे की कार्रवाई FEMA की जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वे ED की कार्रवाई में सहयोग कर रहे हैं और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कंपनी के सभी लेनदेन पारदर्शी हैं और विदेशी निवेश और नियमों के अनुपालन पर पूरा ध्यान दिया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े कॉर्पोरेट हाउस के खिलाफ FEMA जांच गंभीर मामले की ओर इशारा करती है। एजेंसी का उद्देश्य विदेशी निवेश और फंड के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करना है।

इस मामले के बाद बाजार और निवेशकों में हल्की चिंता देखी जा रही है। हालांकि, कंपनी के पूर्व रिकॉर्ड और परियोजनाओं के चलते विशेषज्ञों का कहना है कि जांच से कंपनी के संचालन पर लंबी अवधि में कोई बड़ा असर नहीं पड़ने की संभावना है।

ED की यह कार्रवाई उन मामलों में एक चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है, जहां कंपनियां विदेशी मुद्रा नियमों के पालन में लापरवाही कर सकती हैं। अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि विदेशी निवेश और लेनदेन पूरी तरह से वैध और कानूनी हो।

कंपनी और ED दोनों की तरफ से आगे की जानकारी आने का इंतजार है। विशेषज्ञों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित होगा।

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