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जामिया में ऑनलाइन कक्षाओं की अवधि बढ़ी, सेमेस्टर परीक्षाओं का कार्यक्रम बदला

Kiran
29 Oct 2026 10:46 AM IST
जामिया में ऑनलाइन कक्षाओं की अवधि बढ़ी, सेमेस्टर परीक्षाओं का कार्यक्रम बदला
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जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) ने बुधवार को ऑनलाइन कक्षाओं को 24 नवंबर तक बढ़ा दिया है। साथ ही, छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच यह भी घोषणा की गई है कि सेमेस्टर के अंत की सभी परीक्षाएं ऑनलाइन (वर्चुअल) तरीके से आयोजित की जाएंगी। यह फैसला 27 अक्टूबर की रात हुई व्यापक तोड़फोड़ और सुरक्षा ढांचे को नुकसान पहुंचाए जाने के आरोपों के बाद लिया गया है। वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों ने तब तक अपनी भूख हड़ताल जारी रखने का संकल्प लिया है, जब तक कि चुनाव के लिए कोई ठोस समय-सीमा (टाइमलाइन) घोषित नहीं कर दी जाती।
संशोधित शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार, विषम सेमेस्टर (ऑड-सेमेस्टर) की पढ़ाई 24 नवंबर को पूरी हो जाएगी। प्रैक्टिकल परीक्षाएं, फील्डवर्क असेसमेंट और प्रोजेक्ट वाइवा 25 से 30 नवंबर तक ऑनलाइन होंगे, जबकि थ्योरी परीक्षाएं 1 से 24 दिसंबर तक ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। 25 दिसंबर से 12 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश (विंटर वेकेशन) रहेगा और सम सेमेस्टर (ईवन-सेमेस्टर) की कक्षाएं 13 जनवरी, 2027 से शुरू होंगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों ने गेट और बाउंड्री वॉल में तोड़फोड़ की, गेट नंबर 4C को गिरा दिया, पथराव किया और CCTV कंट्रोल रूम, कैमरों तथा कनेक्शनों को नुकसान पहुंचाया। प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि नकाबपोश प्रदर्शनकारी समर्थन जुटाने के लिए लड़कों के हॉस्टल तक पहुंच गए थे, और बातचीत के दौरान महिला फैकल्टी सदस्यों, वार्डन और प्रोवोस्ट को धमकियां दी गईं। दूसरी ओर, छात्रों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने वाइस-चांसलर (कुलपति) के साथ तय बैठक का आयोजन नहीं किया और चुनाव के लिए कोई निश्चित कार्यक्रम (शेड्यूल) देने से इनकार कर दिया।
छात्रों ने मांग की है कि 20 दिसंबर तक छात्र संघ का संविधान तैयार करके उसे मंजूरी दी जाए, अगले 15 दिनों के भीतर चुनाव की तारीख घोषित की जाए और 5 फरवरी तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कर ली जाए। उन्होंने प्रशासन के मौखिक प्रस्ताव को खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया और बातचीत को अचानक खत्म कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा, "छात्र संघ के संविधान और चुनावों के लिए एक निश्चित और बाध्यकारी समय-सीमा की हमारी मांग पर कोई समझौता नहीं हो सकता।" उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया है। यह गतिरोध अभी भी बना हुआ है।
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