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UNGA में क्यूबा के समर्थन में उतरा भारत, अमेरिकी प्रतिबंध हटाने की मांग, 130 देशों ने दिया साथ

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर क्यूबा का समर्थन करते हुए अमेरिका से इस छोटे कैरेबियाई देश पर लगाए गए आर्थिक, व्यापारिक और वित्तीय प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग की है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने अमेरिका के प्रतिबंधों को हटाने से संबंधित प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इस प्रस्ताव को भारत समेत 130 देशों का समर्थन मिला, जबकि अमेरिका और इजरायल सहित 17 देशों ने इसका विरोध किया। वहीं 25 देशों ने मतदान से दूरी बनाते हुए तटस्थ रहने का फैसला किया। भारत ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश की संप्रभुता और आर्थिक विकास को प्रभावित करने वाले एकतरफा प्रतिबंधों के बजाय बातचीत और कूटनीति से समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में क्यूबा के समर्थन में 130 देशों ने किया मतदान
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देशों के बीच क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया था।
इस प्रस्ताव का आधिकारिक विषय क्यूबा के खिलाफ अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक, व्यापारिक और वित्तीय प्रतिबंधों को समाप्त करने की आवश्यकता से संबंधित था।
मतदान के दौरान 130 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि 17 देशों ने विरोध में वोट दिया। इसके अलावा 25 देशों ने मतदान से परहेज किया।
इस तरह महासभा ने बहुमत से प्रस्ताव पारित कर अमेरिका से क्यूबा के खिलाफ दशकों पुराने प्रतिबंधों को समाप्त करने का आग्रह किया।
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं है। इसका अर्थ है कि अमेरिका केवल इस प्रस्ताव के पारित होने से प्रतिबंध हटाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं होगा।
भारत ने कहा- दूसरे देशों की संप्रभुता प्रभावित करने वाले कानून खत्म हों
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर सौम्या नायर ने महासभा में देश का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि भारत ऐसे कानूनों और उपायों का विरोध करता है, जिनका प्रभाव दूसरे देशों की सीमाओं तक पहुंचता है और उनकी संप्रभुता तथा आर्थिक विकास को प्रभावित करता है।
भारतीय प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत ने सभी देशों से ऐसे प्रतिबंधात्मक कानूनों को लागू करने से बचने तथा पहले से लागू उपायों की समीक्षा करने की अपील की।
भारत ने यह उम्मीद भी जताई कि क्यूबा के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध जल्द समाप्त होंगे, जिससे वहां के लोगों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विकास के अधिक अवसर मिल सकेंगे।
क्यूबा में दवाओं और खाद्य पदार्थों की भारी कमी
भारतीय प्रतिनिधि ने क्यूबा में मानवीय परिस्थितियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि क्यूबा की स्वास्थ्य व्यवस्था में 60 प्रतिशत से अधिक आवश्यक दवाओं की कमी है।
इसके अलावा पिछले पांच वर्षों के दौरान देश के खाद्य उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई है।
ईंधन की आपूर्ति पर प्रतिबंधों के कारण क्यूबा का ऊर्जा संकट भी गंभीर हुआ है।
इन परिस्थितियों का असर अस्पतालों, स्कूलों, जलापूर्ति, परिवहन और खाद्य वितरण जैसी आवश्यक सेवाओं पर पड़ रहा है।
भारत ने कहा कि प्रतिबंधों को समाप्त करने से क्यूबा के नागरिकों को राहत मिलने और देश की विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
अमेरिका ने क्यों लगा रखे हैं क्यूबा पर प्रतिबंध?
अमेरिका और क्यूबा के बीच विवाद का इतिहास लगभग छह दशक पुराना है।
वर्ष 1959 में फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में हुई क्यूबा की क्रांति के बाद दोनों देशों के संबंध तेजी से बिगड़ गए थे।
इसके बाद अमेरिका ने वर्ष 1960 में क्यूबा के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लागू करने शुरू किए। वर्ष 1962 में इन प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ा दिया गया।
समय के साथ व्यापार, वित्तीय लेनदेन और अन्य आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाले कई प्रतिबंध लागू हुए।
अमेरिका का तर्क है कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार की नीतियां, राजनीतिक दमन और मानवाधिकार संबंधी समस्याएं इन प्रतिबंधों के पीछे महत्वपूर्ण कारण हैं।
दूसरी ओर क्यूबा का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंध उसके आर्थिक विकास में बाधा डालते हैं और आम नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
अमेरिका और इजरायल सहित 17 देशों ने किया विरोध
क्यूबा पर प्रतिबंध समाप्त करने के प्रस्ताव का अमेरिका और इजरायल सहित 17 देशों ने विरोध किया।
विरोध में मतदान करने वाले देशों में यूक्रेन, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल थे।
वहीं जर्मनी और इटली जैसे कई देशों ने इस बार प्रस्ताव के पक्ष में मतदान नहीं किया और तटस्थ रहने का फैसला लिया।
अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने मतदान के परिणामों को अपने देश की कूटनीतिक उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने पिछले वर्षों के मुकाबले अपनी स्थिति बदली है।
अमेरिकी प्रतिनिधि का कहना था कि क्यूबा की आर्थिक समस्याओं के लिए वहां की सरकार की नीतियां भी जिम्मेदार हैं।
पिछले साल 165 देशों का समर्थन, इस बार घटकर 130
क्यूबा के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध हटाने के प्रस्ताव को पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कम देशों का समर्थन मिला।
वर्ष 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में 165 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था। उस समय केवल सात देशों ने विरोध किया था और 12 देश तटस्थ रहे थे।
लेकिन वर्ष 2026 में समर्थन करने वाले देशों की संख्या घटकर 130 रह गई।
क्यूबा ने कहा- प्रतिबंधों से आम लोगों की जिंदगी प्रभावित
क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पारिल्ला ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों का प्रभाव क्यूबा के आम नागरिकों पर पड़ रहा है। विशेष रूप से ईंधन, दवाओं, भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
क्यूबा सरकार ने आरोप लगाया कि आर्थिक दबाव के जरिए देश की जनता को कठिनाइयों में डाला जा रहा है।
वहीं अमेरिका ने इन आरोपों को खारिज करते हुए क्यूबा सरकार की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों पर सवाल उठाए।
दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में तीखी बहस भी हुई।
संयुक्त राष्ट्र में 34वीं बार उठी प्रतिबंध हटाने की मांग
क्यूबा के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र महासभा में नया नहीं है।
वर्ष 1992 से महासभा लगातार इस विषय पर प्रस्ताव पारित करती रही है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण मतदान नहीं हुआ था।
28 अक्टूबर 2026 को महासभा ने 34वीं बार प्रतिबंध समाप्त करने की मांग वाला प्रस्ताव स्वीकार किया।
इसके बावजूद प्रतिबंध अब तक पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
अमेरिकी कानूनों के तहत व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की भूमिका आवश्यक है। इसलिए महासभा का मतदान मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रुख को दर्शाता है।
अमेरिका से रिश्तों के बीच भारत का स्वतंत्र कूटनीतिक रुख
भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक, रक्षा, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सहयोग है। इसके बावजूद भारत ने क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों के मुद्दे पर अपना पुराना रुख बरकरार रखा है।
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने का समर्थन करता रहा है।
क्यूबा के साथ भारत के ऐतिहासिक मैत्रीपूर्ण संबंध भी रहे हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग का इतिहास गुटनिरपेक्ष आंदोलन से भी जुड़ा हुआ है।
भारत का ताजा मतदान अमेरिका के साथ उसके व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को समाप्त करने का संकेत नहीं है, बल्कि एक विशेष अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर उसकी स्थापित नीति को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत सहित 130 देशों ने क्यूबा के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग का समर्थन किया है। हालांकि, पिछले वर्ष के मुकाबले समर्थन में आई कमी और अमेरिका के विरोध के कारण यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बहस का विषय बना हुआ है।





