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दिल्ली-एनसीआर
SIR विवाद पर दीपांकर भट्टाचार्य का चुनाव आयोग पर निशाना
Ratna Netam
27 Oct 2026 4:38 PM IST

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नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में विरोध तेज हो गया है। वामपंथी दलों और विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। इस मुद्दे पर वाम दल लगातार विरोध कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की।
मानव श्रृंखला के जरिए विरोध, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
वाम दलों ने दिल्ली में मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताने की पहल के साथ मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR के तहत पात्र मतदाताओं के नाम हटने का खतरा पैदा हुआ है।प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग का प्रमुख दायित्व स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना है। ऐसे में मतदाता सूची में किसी भी संशोधन के दौरान पात्र नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए।प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए SIR को वापस लेने की अपील की।
'ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए'
वामपंथी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर उठ रही आपत्तियों का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया है।इससे पहले 29 सितंबर को चुनाव आयोग मुख्यालय के बाहर आयोजित प्रदर्शन में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एमए बेबी ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की थी।उस प्रदर्शन में वृंदा करात सहित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य वाम संगठनों के नेताओं ने भी भाग लिया था। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।
SIR को रद्द करने की मांग क्यों उठ रही है?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR मतदाता सूचियों की जांच और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और त्रुटियों को दूर करना है।हालांकि विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच तथा नामों के सत्यापन के दौरान कुछ पात्र मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।वाम दलों का कहना है कि किसी भी नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे मामलों में प्रभावी अपील और शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के दावे भी प्रदर्शनकारियों ने किए हैं। हालांकि इन दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी जताया विरोध
SIR के विरोध में केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक समूह भी सामने आए हैं।23 अक्टूबर को दिल्ली के अशोका रोड और बंगला साहिब गुरुद्वारे के आसपास 'पीपुल अगेंस्ट SIR' गठबंधन के नेतृत्व में प्रदर्शन आयोजित किया गया था।इस दौरान माकपा नेता वृंदा करात, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने विरोध में भाग लिया।प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया। रिपोर्टों के अनुसार, उस दिन 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।
पांच वाम दलों ने पहले भी किया था आंदोलन का ऐलान
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा (माले) लिबरेशन, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने सितंबर में संयुक्त रूप से SIR के विरोध में आंदोलन की घोषणा की थीइन दलों ने 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देशभर में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया था।उनकी प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना, SIR प्रक्रिया रोकना और गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किए गए पात्र नागरिकों के अधिकार बहाल करना शामिल था।
चुनावी पारदर्शिता को लेकर जारी है विवाद
वाम दलों का कहना है कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है।दूसरी ओर, मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग के नियमित संवैधानिक दायित्वों का हिस्सा है। विवाद मुख्य रूप से इस प्रक्रिया के क्रियान्वयन, दस्तावेजों की जांच और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने को लेकर है।फिलहाल वामपंथी दलों और नागरिक संगठनों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग जारी है।
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