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CEC पद से रोकने की मांग, सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

Kiran
5 Oct 2026 8:57 AM IST
CEC पद से रोकने की मांग, सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
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Delhi सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयोग के नाम पर 14 फैसले लिए जाने की खबरों के मद्देनजर ज्ञानेश कुमार को सीईसी के रूप में काम करने से रोकने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ राकेश कुमार सिंह और वकील शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, जिसमें संधू और जोशी की सहमति के बिना सीईसी कुमार द्वारा कथित तौर पर किए गए निर्णयों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर परिवर्तनों को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने शीर्ष अदालत से यह घोषित करने का आग्रह किया है कि चुनाव आयोग में निहित निर्णय सीईसी द्वारा एकतरफा नहीं लिए जा सकते। वह चाहते थे कि अदालत कुमार को यह दिखाने के लिए निर्देश जारी करे कि उन्होंने किस अधिकार के तहत काम किया है, और ऐसे काम करना जारी रखा है जैसे कि वह व्यक्तिगत रूप से चुनाव आयोग में संविधान के अनुच्छेद 324 द्वारा प्रदत्त सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का प्रयोग करने के हकदार थे।
जनहित याचिका में निर्णय लंबित रहने तक सीईसी के निलंबन, चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड पेश करने और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग/एसआईटी के गठन की मांग की गई। सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला दिया।
धारा 18(1) के अनुसार, "चुनाव आयोग, सर्वसम्मत निर्णय से, अपने व्यवसाय के लेन-देन की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच अपने व्यवसाय के आवंटन को भी विनियमित कर सकता है।" धारा 18 (2) में कहा गया है कि "चुनाव आयोग के सभी व्यवसाय, जहां तक ​​संभव हो, सर्वसम्मति से किए जाएंगे, और यदि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की किसी मामले पर राय अलग है, तो ऐसे मामले का निर्णय बहुमत की राय के अनुसार किया जाएगा।"
सीईसी कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में यह दूसरी याचिका है. चुनाव आयोग द्वारा आयोजित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चल रहे विवाद के बीच, इससे पहले वकील शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी द्वारा एक और जनहित याचिका दायर की गई थी जिसमें एसआईआर अभ्यास के दौरान वैधानिक कर्तव्यों के कथित उल्लंघन पर कुमार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की गई थी। त्रिपाठी ने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए जाने की न्यायिक जांच या विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच की मांग की। उन्होंने शीर्ष अदालत से अनुरोध किया कि कुमार द्वारा कथित तौर पर दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए निर्णयों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर संशोधनों को असंवैधानिक और शून्य घोषित किया जाए।
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