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दिल्ली की सड़क बनी गड्ढों का जाल, जान जोखिम में डालकर सफर

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में सड़क विकास और बेहतर यातायात व्यवस्था के दावों के बीच बाहरी दिल्ली की एक महत्वपूर्ण लिंक रोड की बदहाली स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। कंझावला से मदनपुर और अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2) को जोड़ने वाली सड़क पिछले कई वर्षों से जर्जर हालत में है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई स्थानों पर यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच सड़क का कुछ हिस्सा बचा हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 16 फुट चौड़ी इस लिंक रोड से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। यह सड़क आसपास के गांवों और मुख्य मार्गों के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्थानीय लोगों के लिए रोजमर्रा की आवाजाही के साथ-साथ कामकाज, व्यापार और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए भी इस सड़क का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़क की हालत कई वर्षों से खराब बनी हुई है। जगह-जगह गहरे गड्ढे होने के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को बेहद सावधानी से गुजरना पड़ता है। कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ चुकी है और मार्ग असमतल हो गया है। इससे वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सड़क जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। अचानक सामने आने वाले गड्ढों से बचने के लिए वाहन मोड़ने पर संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। वहीं, गहरे गड्ढों से गुजरने के दौरान वाहनों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी रहती है।
सड़क की खराब हालत का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं है। आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी आवाजाही में परेशानी होती है। स्कूल जाने वाले विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, छोटे व्यापारी और अन्य स्थानीय निवासी इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सड़क की बदहाली उनकी दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
कंझावला से मदनपुर और यूईआर-2 को जोड़ने वाला यह मार्ग संपर्क सड़क के रूप में महत्वपूर्ण है। यूईआर-2 को दिल्ली की बाहरी रिंग रोड के रूप में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य राजधानी के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क बेहतर बनाना और यातायात का दबाव कम करना है। ऐसे में इससे जुड़ने वाली स्थानीय सड़कों की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
मुख्य सड़कें बेहतर होने के बावजूद यदि उनसे जुड़ने वाले संपर्क मार्ग जर्जर हों, तो लोगों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाती। स्थानीय निवासियों के लिए बड़े सड़क नेटवर्क का लाभ तभी पूरी तरह उपयोगी होगा, जब गांवों और आवासीय क्षेत्रों से उन मार्गों तक पहुंचने वाली सड़कें भी सुरक्षित और सुगम हों।
बताया जा रहा है कि इस लिंक रोड की चौड़ाई लगभग 16 फुट है। इतनी चौड़ाई वाली सड़क पर दोनों दिशाओं से आने वाले वाहनों को पहले ही सावधानी बरतनी पड़ती है। ऐसे में गहरे गड्ढे होने से वाहन चालकों के लिए सुरक्षित तरीके से एक-दूसरे को रास्ता देना और कठिन हो सकता है।
बरसात के दौरान ऐसी सड़कों की स्थिति और गंभीर हो सकती है। गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। यदि चालक को सड़क की वास्तविक स्थिति का पता न चले, तो वाहन के अनियंत्रित होने की आशंका बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त पानी जमा रहने से सड़क की सतह को और नुकसान पहुंच सकता है।
स्थानीय लोगों की नाराजगी का प्रमुख कारण सड़क की लंबे समय से खराब स्थिति में बने रहना है। लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग सड़क की मरम्मत कराकर आवाजाही को सुरक्षित बनाएगा। हालांकि, इस मार्ग की देखरेख किस विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है और मरम्मत के लिए कोई प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सड़क की मरम्मत के लिए केवल गड्ढों को अस्थायी रूप से भरना पर्याप्त नहीं होता। यदि सड़क की आधार संरचना कमजोर हो गई हो या जल निकासी की व्यवस्था खराब हो, तो समस्या दोबारा सामने आ सकती है। इसलिए स्थायी समाधान के लिए तकनीकी निरीक्षण और आवश्यकता के अनुसार मरम्मत या पुनर्निर्माण जरूरी हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण, समय पर गड्ढों की मरम्मत और पानी की निकासी की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। यदि खराब हिस्सों की समय रहते मरम्मत नहीं की जाए, तो छोटे गड्ढे धीरे-धीरे बड़े हो सकते हैं। इससे सड़क को अधिक नुकसान पहुंचता है और बाद में मरम्मत का खर्च भी बढ़ सकता है।
सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी इस मार्ग की स्थिति चिंता का विषय है। जर्जर सड़कें वाहनों की गति और दिशा को अचानक प्रभावित कर सकती हैं। विशेष रूप से रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने पर गड्ढों का अनुमान लगाना और मुश्किल हो सकता है।
आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही के लिए भी संपर्क सड़कों का अच्छी स्थिति में होना आवश्यक है। एंबुलेंस, दमकल वाहन और अन्य आवश्यक सेवाओं को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सुरक्षित मार्ग चाहिए। खराब सड़कों के कारण ऐसी सेवाओं को परेशानी हो सकती है।
बाहरी दिल्ली के कई इलाके तेजी से विकसित हो रहे हैं। आवासीय विस्तार और बढ़ती वाहन संख्या के साथ संपर्क मार्गों पर यातायात का दबाव भी बढ़ता है। ऐसे में सड़क निर्माण के साथ-साथ उनके नियमित रखरखाव पर ध्यान देना जरूरी है।
कंझावला-मदनपुर लिंक रोड की बदहाली ने एक बार फिर स्थानीय बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। राजधानी में बड़े सड़क निर्माण कार्यों के साथ छोटे संपर्क मार्गों की मरम्मत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही इन्हीं सड़कों पर निर्भर करती है।
फिलहाल इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को गहरे गड्ढों के बीच सावधानी से सफर करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग सड़क की स्थिति का निरीक्षण कर जल्द मरम्मत की दिशा में कदम उठाएगा, ताकि वर्षों से चली आ रही परेशानी दूर हो सके और लोगों को सुरक्षित यातायात सुविधा मिल सके।





