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दिल्ली की हवा हुई साफ सितंबर में पांच साल का सबसे कम औसत AQI
Ratna Netam
30 Sept 2026 9:56 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सितंबर 2026 के दौरान हवा की गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार इस साल सितंबर महीने का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 102 रहा, जो पिछले पांच वर्षों में सितंबर का सबसे कम औसत स्तर है। मंत्रालय ने इसे दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार के जारी रुझान का हिस्सा बताया है।
मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2025 में दिल्ली का औसत AQI 105 रहा था। सितंबर 2024 में भी औसत AQI 105 दर्ज किया गया था, जबकि सितंबर 2023 में यह 108 और सितंबर 2022 में 104 था। इस तरह सितंबर 2026 का औसत AQI इन चार वर्षों की तुलना में कम रहा है।
दिल्ली की वायु गुणवत्ता में यह सुधार ऐसे समय दर्ज किया गया है, जब सर्दियों के मौसम से पहले प्रदूषण नियंत्रण को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। आमतौर पर अक्टूबर के बाद दिल्ली-NCR में मौसम की परिस्थितियों, सड़क की धूल, वाहनों, निर्माण गतिविधियों और अन्य उत्सर्जन स्रोतों के कारण प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण सितंबर के आंकड़ों को आगामी महीनों की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंत्रालय के मुताबिक केवल सितंबर ही नहीं बल्कि जनवरी से सितंबर 2026 की अवधि में भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता ने पिछले पांच वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इस दौरान ऐसे दिनों की संख्या सबसे अधिक रही जब दैनिक औसत AQI 200 से नीचे था। मंत्रालय के अनुसार जनवरी से सितंबर तक ऐसे दिनों की संख्या 194 रही। AQI 200 से नीचे रहने वाले दिनों में ‘अच्छी’, ‘संतोषजनक’ और ‘मध्यम’ श्रेणी की वायु गुणवत्ता शामिल होती है।
AQI के मानकों के अनुसार 0 से 50 के बीच की वायु गुणवत्ता को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच की स्थिति को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है। सितंबर 2026 का औसत AQI 102 रहा, यानी महीने का औसत स्तर ‘मध्यम’ श्रेणी के निचले हिस्से में रहा।
सितंबर के दौरान कई दिन ऐसे भी रहे जब दिल्ली की हवा ‘संतोषजनक’ स्तर पर रही। महीने के शुरुआती 28 दिनों के विश्लेषण में दैनिक AQI 53 से 178 के बीच दर्ज किया गया था। इस दौरान 16 दिन ‘संतोषजनक’ और 12 दिन ‘मध्यम’ श्रेणी में रहे।
हालांकि बेहतर औसत AQI का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली की प्रदूषण समस्या खत्म हो गई है। सर्दियों में हवा की रफ्तार कम होने, तापमान गिरने और प्रदूषकों के निचली सतह पर जमा होने की वजह से राष्ट्रीय राजधानी में हवा की गुणवत्ता तेजी से खराब हो सकती है। इसी को देखते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार ने सर्दियों से पहले कई स्तरों पर तैयारी शुरू कर दी है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 28 सितंबर को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर दिल्ली सरकार की वायु प्रदूषण शमन कार्ययोजना की समीक्षा की थी। बैठक में प्रदूषण हॉटस्पॉट, सड़क की धूल, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, कचरा प्रबंधन और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया गया।
इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार आयोग ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी GRAP में भी संशोधन को मंजूरी दी है। संशोधित व्यवस्था में वाहनों, धूल और अन्य प्रदूषण स्रोतों से संबंधित कई उपायों को पहले चरण में ही लागू करने की तैयारी की गई है, ताकि हालात ज्यादा खराब होने से पहले ही कार्रवाई शुरू की जा सके।
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सड़क की धूल कम करना भी एक बड़ी चुनौती माना जाता है। इसके लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और खुले में कचरा जलाने पर रोक जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहनों और बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट को भी दीर्घकालीन समाधान का हिस्सा माना गया है।
केंद्र सरकार का कहना है कि दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी है। दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के NCR वाले इलाकों में भी प्रदूषण नियंत्रण की योजनाओं की समीक्षा की जा रही है। इससे पहले पर्यावरण मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के NCR क्षेत्रों की कार्ययोजना की भी समीक्षा की थी और सख्त प्रवर्तन तथा समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया था।
2025 में भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता के कुछ संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया था। उस वर्ष 79 दिन ऐसे रहे थे जब AQI 100 या उससे नीचे यानी ‘अच्छी’ या ‘संतोषजनक’ श्रेणी में था। पर्यावरण प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों ने इसे लगातार किए जा रहे प्रदूषण नियंत्रण उपायों से जोड़ा था।
सितंबर 2026 का औसत AQI 102 रहना इस सुधार के रुझान को आगे बढ़ाता दिखाई देता है। हालांकि आने वाले अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के महीने दिल्ली के लिए बड़ी परीक्षा होंगे, क्योंकि इसी अवधि में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने की आशंका रहती है।
फिलहाल पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़े संकेत देते हैं कि 2026 के पहले नौ महीनों में दिल्ली ने पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अधिक संख्या में बेहतर वायु गुणवत्ता वाले दिन दर्ज किए हैं। अब चुनौती इस सुधार को सर्दियों के दौरान भी बनाए रखने की होगी, जब दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण के लिए GRAP सहित कई सख्त उपाय लागू किए जाते हैं।
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