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दिल्ली के लोकायुक्त न्यायमूर्ति हरीश चंद्र मिश्रा का निधन 67 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली। दिल्ली के लोकायुक्त न्यायमूर्ति हरीश चंद्र मिश्रा (सेवानिवृत्त) का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह 67 वर्ष के थे। लोकायुक्त कार्यालय ने उनके निधन की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, न्यायमूर्ति मिश्रा ने अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर सामने आते ही न्यायिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई। न्यायमूर्ति मिश्रा लंबे समय तक न्यायिक सेवा से जुड़े रहे और उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।
लोकायुक्त कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि न्यायमूर्ति मिश्रा का पार्थिव शरीर सफदरजंग अस्पताल में रखा गया है। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जाएगा। परिवार और शुभचिंतक उन्हें अंतिम विदाई देंगे।
न्यायमूर्ति हरीश चंद्र मिश्रा को मार्च 2022 में दिल्ली का लोकायुक्त नियुक्त किया गया था। लोकायुक्त के रूप में उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ शिकायतों की जांच की जिम्मेदारी संभाली।
इससे पहले वह झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके थे। उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी कार्य किया था। न्यायिक क्षेत्र में उनके अनुभव और निष्पक्ष कार्यशैली की पहचान रही।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने अपने न्यायिक करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। उनकी भूमिका कानून और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रही।
लोकायुक्त का पद प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। न्यायमूर्ति मिश्रा ने इस पद पर रहते हुए शिकायतों की सुनवाई और जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
उनके निधन से दिल्ली लोकायुक्त कार्यालय को बड़ा नुकसान हुआ है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके योगदान को याद करते हुए शोक व्यक्त किया है।
न्यायमूर्ति मिश्रा का न्यायिक सफर कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालय तक न्याय व्यवस्था में अपनी सेवाएं दीं। उनके अनुभव का लाभ लोकायुक्त कार्यालय को भी मिला।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायमूर्ति मिश्रा जैसे अनुभवी न्यायाधीशों की भूमिका संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती है।
उनके निधन पर न्यायिक समुदाय के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य लोगों ने भी दुख जताया है। कई लोगों ने उन्हें एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ न्यायाधीश के रूप में याद किया।
न्यायमूर्ति मिश्रा का जन्म और प्रारंभिक जीवन न्यायिक सेवा की दिशा में आगे बढ़ने वाला रहा। उन्होंने कानून की पढ़ाई के बाद न्यायिक क्षेत्र में कदम रखा और धीरे-धीरे उच्च पदों तक पहुंचे।
झारखंड उच्च न्यायालय में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल भी महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान उन्होंने न्यायिक प्रशासन से जुड़े कई मामलों में नेतृत्व की भूमिका निभाई।
मार्च 2022 में दिल्ली लोकायुक्त पद संभालने के बाद उन्होंने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों पर काम किया। लोकायुक्त संस्था का उद्देश्य आम नागरिकों को शिकायतों के निपटारे के लिए एक स्वतंत्र मंच उपलब्ध कराना है।
उनके निधन के बाद अब लोकायुक्त कार्यालय के कामकाज को आगे बढ़ाने के लिए नई नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया जाएगा।
फिलहाल न्यायमूर्ति हरीश चंद्र मिश्रा के निधन से न्यायिक जगत में शोक का माहौल है। उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
न्यायमूर्ति मिश्रा का योगदान न्यायिक सेवा और लोकायुक्त संस्था दोनों के लिए याद किया जाएगा।





