- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- AISA नेता नेहा बोरा की...
दिल्ली-एनसीआर
AISA नेता नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
Ratna Netam
22 Oct 2026 6:17 PM IST

x
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी बॉन्ड और एक जमानतदार देने को कहा गया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने की। अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस मामले में आदेश बाद में सुनाया जाएगा।
हाई कोर्ट में दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें
सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए। वहीं, सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने पक्ष रखा।सुनवाई मुख्य रूप से इस सवाल पर केंद्रित रही कि क्या विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने से पहले उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से जांच की थी।अदालत ने यह भी विचार किया कि क्या शांति भंग होने की आशंका के आधार पर निवारक कार्रवाई शुरू करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
10 हजार रुपये के बॉन्ड को दी चुनौती
नेहा बोरा को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत नोटिस जारी किया गया था। इसमें धारा 135(3) का भी उल्लेख था।नोटिस के अनुसार, उन्हें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होकर यह बताना था कि जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उनसे 10 हजार रुपये का निजी बॉन्ड और एक जमानतदार क्यों न लिया जाए।नेहा बोरा ने अपनी याचिका में नोटिस और उससे जुड़ी कार्यवाही को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि मामले में उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
नेहा बोरा के वकील ने उठाए सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि नोटिस में ऐसे ठोस तथ्य नहीं बताए गए हैं, जिनसे यह साबित हो कि नेहा बोरा के कारण सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका थीउन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने को बाध्य करने से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।बोरा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के मधु लिमये मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि निवारक कार्रवाई में लिखित कारणों और कानूनी सुरक्षा उपायों का पालन होना चाहिए।उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार का भी उल्लेख किया।
सरकार ने निवारक कार्रवाई को बताया उचित
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर संबंधित अधिकारियों ने निवारक कार्रवाई शुरू की थी।उन्होंने विरोध प्रदर्शनों और नेहा बोरा की कथित भागीदारी से संबंधित सामग्री का उल्लेख किया।सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मजिस्ट्रेट की राय का आधार बनने वाले दस्तावेज कार्यवाही के दौरान हालांकि, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि केवल विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ निवारक कार्रवाई करना उचित नहीं है।
16 अक्टूबर को हिरासत में ली गई थीं नेहा बोरा
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया।उनकी याचिका के अनुसार, वह मंडी हाउस में आयोजित एक शांतिपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थीं। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित था।दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों, नारेबाजी और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को नोटिस जारी करने का आधार बताया था।बोरा ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि उनकी गतिविधियां शांतिपूर्ण थीं और नोटिस में किसी विशिष्ट हिंसक घटना का उल्लेख नहीं किया गया।
अदालत ने कानूनी प्रक्रिया पर जताई गंभीरता
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल हो, तब कानूनी प्रक्रिया का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।अदालत ने धारा 126, 130 और 135 के बीच कानूनी संबंध तथा विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियों पर भी सवाल किए।न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। अदालत ने संकेत दिया कि फैसला मंगलवार तक तैयार किया जाएगा।फिलहाल नेहा बोरा के खिलाफ जारी नोटिस की वैधता पर अंतिम निर्णय आना बाकी है। इस मामले में अदालत का आदेश निवारक कार्रवाई और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े कानूनी सवालों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
Next Story





