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Government कॉलेजों में खाली पड़े पदों पर घिरी दिल्ली सरकार, BMS ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

New Delhi नई दिल्ली : दिल्ली के वित्तपोषित कॉलेजों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी का मामला सामने आया है। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। बीएमएस दिल्ली ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र भेजकर कॉलेजों में खाली पड़े पदों को जल्द भरने की मांग की है।बीएमएस दिल्ली के महासचिव डॉ. दीपेन्द्र चाहर ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि दिल्ली सरकार से वित्तपोषित 12 कॉलेजों में बड़ी संख्या में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने बताया कि इन संस्थानों में 696 शिक्षकों और 626 गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पद रिक्त हैं।उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी का सीधा असर कॉलेजों के कामकाज और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। शिक्षकों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ गया है, जिससे कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।
छात्रों की संख्या बढ़ी, स्टाफ नहीं बढ़ा
डॉ. दीपेन्द्र चाहर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कॉलेजों में छात्रों की संख्या में लगभग 35 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, लेकिन इसके अनुपात में कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के बावजूद पर्याप्त शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने से मौजूदा स्टाफ पर काम का दबाव बढ़ गया है।उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में बेहतर व्यवस्था के लिए पर्याप्त मानव संसाधन का होना जरूरी है। खाली पदों को लंबे समय तक खाली रखने से प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ छात्रों की सुविधाओं पर भी असर पड़ता है।
आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भरता का मुद्दा
बीएमएस महासचिव ने गैर-शिक्षण कर्मचारियों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कुल 1,416 गैर-शिक्षण कर्मचारियों में से 626 कर्मचारी आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि स्थायी कर्मचारियों की कमी के कारण कॉलेजों में आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भरता बढ़ी है। बीएमएस ने मांग की है कि नियमित पदों को जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि कर्मचारियों को स्थायित्व मिले और कॉलेजों का काम बेहतर तरीके से संचालित हो सके।
सरकार से कार्रवाई की मांग
बीएमएस ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि कॉलेजों में खाली पड़े सभी पदों को भरने के लिए जल्द कदम उठाए जाएं। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या होने से न केवल शिक्षकों और स्टाफ का कार्यभार कम होगा, बल्कि छात्रों को भी बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।संगठन ने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मानव संसाधन को मजबूत करना जरूरी है। कर्मचारियों की कमी का समाधान समय पर नहीं किया गया तो इसका असर लंबे समय में शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।अब सभी की नजर दिल्ली सरकार की ओर है कि वह बीएमएस की मांगों पर क्या कदम उठाती है और कॉलेजों में खाली पदों को भरने के लिए क्या निर्णय लेती है।





