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Delhi : डीज़ल खरीद पर पाबंदी से अस्पतालों और इंडस्ट्री में चिंता

Delhi दिल्ली: सरकार द्वारा पेट्रोल पंपों से डीज़ल की खरीद पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद अस्पतालों, आईटी कैंपस, डेटा सेंटरों और औद्योगिक इकाइयों में चिंता बढ़ गई है। ये सभी क्षेत्र आपातकालीन बैकअप और उच्च मांग के समय बिजली आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर डीज़ल जनरेटर पर निर्भर रहते हैं।
सरकारी आदेश के अनुसार 11 जून से औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत ग्राहकों के लिए पेट्रोल पंपों से डीज़ल खरीद पर रोक लगा दी गई है। साथ ही रिटेल आउटलेट्स से डीज़ल बिक्री को प्रति ग्राहक या वाहन के लिए 200 लीटर प्रतिदिन तक सीमित कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य ईंधन की आपूर्ति को सुरक्षित रखना और रिटेल उपयोग के लिए निर्धारित ईंधन के दुरुपयोग को रोकना बताया गया है।
हालांकि, उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि इन पाबंदियों से उन क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है जहां डीज़ल जनरेटर संचालन के लिए अनिवार्य हैं। उनका मानना है कि सप्लाई पर रोक या सीमा लगाने से आपातकालीन बिजली व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।
सबसे अधिक चिंता स्वास्थ्य क्षेत्र में देखी जा रही है। अस्पतालों में बड़े पैमाने पर डीज़ल जनरेटर सेट लगाए जाते हैं, जो बिजली गुल होने या ग्रिड फेल होने की स्थिति में पूरे परिसर को बिजली प्रदान करते हैं। इनमें ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाएं शामिल होती हैं, जहां बिजली की निरंतरता बेहद जरूरी होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल पहले से ही सर्जरी और गंभीर चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान जनरेटर का उपयोग करते हैं ताकि किसी भी प्रकार के वोल्टेज उतार-चढ़ाव से मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ऐसे में डीज़ल की आपूर्ति में बाधा आने से स्वास्थ्य सेवाओं पर जोखिम बढ़ सकता है।
आईटी सेक्टर और डेटा सेंटर भी लगातार बिजली आपूर्ति पर निर्भर रहते हैं, जहां थोड़ी भी रुकावट बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। इसी तरह, औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया के लिए भी डीज़ल आधारित बैकअप सिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुल मिलाकर, सरकार के इस फैसले से सप्लाई प्रबंधन के उद्देश्य पूरे होने की संभावना है, लेकिन साथ ही आवश्यक सेवाओं और उद्योगों में डीज़ल की उपलब्धता को लेकर गंभीर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।





