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डीपफेक फोटो विवाद पहुंचा हाईकोर्ट महिला को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश

Ratna Netam
25 Sept 2026 5:23 PM IST
डीपफेक फोटो विवाद पहुंचा हाईकोर्ट महिला को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में एक महिला की तस्वीरों को कथित रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए मॉर्फ कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ जोड़ने और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का मामला पहुंचा है। महिला ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उसकी निजी तस्वीर का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया और AI आधारित फेस-स्वैपिंग तकनीक के जरिए आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार की गईं। मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम सामने आए हैं। आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।महिला ने अपनी याचिका में इन कथित रूप से मॉर्फ्ड और AI-जनित तस्वीरों को सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से हटाने की मांग की है। उसका आरोप है कि CJP की ओर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान भी इन तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था। याचिका में इसे उसकी निजता और प्रतिष्ठा पर हमला बताते हुए अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
इस मामले में दिल्ली पुलिस पहले ही एफआईआर दर्ज कर चुकी है। पुलिस के मुताबिक 25 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया कि उसकी व्यक्तिगत तस्वीर उसकी सहमति के बिना हासिल की गई और AI फेस-स्वैपिंग टूल की मदद से उसे बदलकर प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ जोड़ दिया गया। शिकायत के आधार पर नई दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि कथित रूप से बदली गई तस्वीरों को केवल इंटरनेट तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें बड़े बैनर और पोस्टर के रूप में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में भी दिखाया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए, जिससे कथित तस्वीरों का प्रसार और बढ़ गया।
दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष महिला की ओर से पेश वकील ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। अदालत को बताया गया कि पुलिस में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद कथित डीपफेक तस्वीरें ऑनलाइन मौजूद हैं और उन्हें तत्काल हटाया जाना जरूरी है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि कथित सामग्री के प्रसार के कारण उसे मानसिक परेशानी और सुरक्षा संबंधी आशंकाओं का सामना करना पड़ रहा है।मामले में अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। साथ ही दिल्ली पुलिस को याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दर्ज एफआईआर पर अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी अदालत के सामने रखने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने जांच की प्रगति पर स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है।
याचिका का एक प्रमुख हिस्सा सोशल मीडिया से कथित आपत्तिजनक सामग्री हटाने की मांग से जुड़ा है। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित आदेश Meta तक तत्काल पहुंचाया जाए और चिन्हित सामग्री को उसके द्वारा संचालित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तय समय के भीतर हटाने की कार्रवाई की जाए। जांच अधिकारी को भी संबंधित वेब लिंक और अन्य जरूरी जानकारी प्लेटफॉर्म को उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि सामग्री की पहचान और उसे हटाने की प्रक्रिया में देरी न हो।मामले में महिला ने CJP से जुड़े सौरव दास, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह पर कथित रूप से उसकी तस्वीर का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उसकी तस्वीर को बिना अनुमति लिया गया और AI की मदद से एक ऐसी तस्वीर तैयार की गई, जिसे उसने आपत्तिजनक और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। इन दावों पर संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब और अदालत का अंतिम निष्कर्ष अभी आना बाकी है।
इस प्रकरण में डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग का मुद्दा भी सामने आया है। डीपफेक या AI आधारित फेस-स्वैपिंग तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति के चेहरे को डिजिटल रूप से दूसरी तस्वीर या वीडियो पर लगाया जा सकता है। तकनीक का इस्तेमाल मनोरंजन और रचनात्मक उद्देश्यों के लिए भी होता है, लेकिन बिना सहमति किसी व्यक्ति की भ्रामक या आपत्तिजनक तस्वीर तैयार करने और प्रसारित करने पर निजता, प्रतिष्ठा और साइबर अपराध से जुड़े गंभीर कानूनी सवाल खड़े हो सकते हैं।यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब AI से तैयार सामग्री और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी को लेकर कानूनी बहस बढ़ रही है। किसी तस्वीर या वीडियो को डिजिटल तकनीक से इस तरह बदलना कि वह वास्तविक दिखाई दे, इंटरनेट पर गलत सूचना या व्यक्तिगत उत्पीड़न का माध्यम बन सकता है। ऐसे मामलों में सामग्री को तेजी से पहचानना और उसका प्रसार रोकना जांच एजेंसियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म दोनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
इससे पहले भी CJP से जुड़े नेताओं की AI-जनित सोशल मीडिया पोस्ट का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच चुका है। सितंबर में भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया से संबंधित एक अलग मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका ने विवादित पोस्ट हटाने की बात अदालत के सामने कही थी। उस मामले में अदालत ने भविष्य में समान सामग्री सामने आने की स्थिति में संबंधित प्लेटफॉर्म से संपर्क करने की व्यवस्था पर भी निर्देश दिए थे। मौजूदा मामला उससे अलग है और इसमें एक महिला की कथित मॉर्फ्ड तस्वीर तथा उसकी निजता और सुरक्षा से जुड़े आरोप हैं।
पुलिस जांच में अब यह पता लगाया जाना है कि कथित तस्वीरें किसने तैयार कीं, उनका सबसे पहले कहां इस्तेमाल हुआ, किन सोशल मीडिया अकाउंट से उन्हें प्रसारित किया गया और उनके निर्माण में AI तकनीक का किस स्तर पर इस्तेमाल किया गया। डिजिटल साक्ष्य, सोशल मीडिया लिंक और संबंधित अकाउंट की जानकारी इस जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों को अदालत ने अंतिम रूप से सत्यापित नहीं किया है। हाईकोर्ट में आगे की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों के जवाब, दिल्ली पुलिस की स्थिति रिपोर्ट और डिजिटल सामग्री से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। महिला की याचिका का तत्काल उद्देश्य कथित आपत्तिजनक सामग्री का ऑनलाइन प्रसार रोकना और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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