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दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद पर संकट, ओवैसी ने उठाई आवाज
Ratna Netam
20 Oct 2026 4:27 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को खाली कराने और संभावित ध्वस्तीकरण की खबरों को लेकर विवाद गहरा गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को इस मामले में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की। ओवैसी ने मस्जिद की कानूनी स्थिति और दिल्ली वक्फ बोर्ड की कथित निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद वर्ष 1977 से सरकारी गजट में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है, इसके बावजूद इसे बचाने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।
ओवैसी ने सोशल मीडिया पर उठाए तीन बड़े सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए रेस कोर्स मस्जिद मामले में तीन प्रमुख चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि मस्जिद लंबे समय से वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है, लेकिन दिल्ली वक्फ बोर्ड ने कथित ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती देने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की।ओवैसी ने आरोप लगाया कि बोर्ड ने न तो मस्जिद के संरक्षण के लिए कानूनी कदम उठाए और न ही संबंधित अधिकारियों के साथ विवाद का समाधान करने का प्रयास किया।उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में संबंधित संस्थाओं की निष्क्रियता चिंता का विषय है।
1977 से वक्फ संपत्ति होने का दावा
ओवैसी ने कहा कि रेस कोर्स मस्जिद को वर्ष 1977 से सरकारी गजट में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया है। उनके अनुसार, इस स्थिति को देखते हुए मस्जिद को कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।उन्होंने वक्फ संशोधन अधिनियम का उल्लेख करते हुए दावा किया कि यह मस्जिद 'वक्फ बाय यूजर' यानी लंबे समय से धार्मिक उपयोग के आधार पर स्थापित वक्फ संपत्ति की श्रेणी में आती है।ओवैसी के मुताबिक, पहले से पंजीकृत ऐसी संपत्तियों के संरक्षण के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। हालांकि, मस्जिद पर इन प्रावधानों की वास्तविक कानूनी स्थिति और उनका प्रभाव संबंधित अभिलेखों तथा सक्षम प्राधिकरण के निर्णय पर निर्भर करेगा।
दिल्ली वक्फ बोर्ड की भूमिका पर उठाए सवाल
AIMIM प्रमुख ने दिल्ली वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन नहीं हुआ है, जिसके कारण मस्जिद से जुड़े विवाद का प्रभावी समाधान नहीं हो सका।ओवैसी ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इस मामले में पहल कर सकते थे, लेकिन उनकी ओर से भी आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।
छह दिन में मस्जिद खाली करने का नोटिस
मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून के अनुसार, भूमि एवं विकास कार्यालय ने परिसर को छह दिनों के भीतर खाली करने का नोटिस दिया है।इमाम ने आरोप लगाया कि मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई है। इसके अलावा प्रवेश द्वारों पर प्रतिबंध के कारण नमाजियों को परिसर में आने-जाने में परेशानी हो रही है।वहीं, भूमि एवं विकास कार्यालय के नोटिस के अनुसार, परिसर सरकारी जमीन पर स्थित है और उसे अनधिकृत बताया गया है। दूसरी ओर, मस्जिद से जुड़े प्रतिनिधि इसे ऐतिहासिक और वक्फ संपत्ति बताते हुए कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।
मुस्लिम संगठन ने भी केंद्रीय मंत्री से की मुलाकात
इस विवाद के बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद का एक प्रतिनिधिमंडल भी केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मिला।संगठन के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान के संरक्षण की मांग उठाई।प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपकर मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति की जांच कराने तथा बिजली-पानी की आपूर्ति और नमाज की व्यवस्था बहाल कराने का अनुरोध किया।संगठन के अनुसार, मस्जिद का उल्लेख नई दिल्ली नगरपालिका परिषद की विरासत सूची और वर्ष 1977 के दिल्ली गजट में मौजूद है।
मस्जिद के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
रेस कोर्स मस्जिद के संभावित ध्वस्तीकरण को लेकर धार्मिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने चिंता जताई है। इस मामले में मस्जिद की ऐतिहासिक पहचान, वक्फ संपत्ति का दर्जा और सरकारी भूमि से जुड़े अधिकार प्रमुख विवादित मुद्दे बने हुए हैं।असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि संबंधित संस्थाओं को मस्जिद के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।फिलहाल मस्जिद को खाली कराने के नोटिस और उसके कानूनी दर्जे को लेकर विवाद बना हुआ है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित सरकारी विभाग और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।
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