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दिल्ली में 1 नवंबर से सख्त नियम बिना PUC नहीं मिलेगा पेट्रोल डीजल
Ratna Netam
20 Oct 2026 3:57 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने व्यापक 'विंटर एक्शन प्लान' तैयार किया है। यह योजना 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी। इसके तहत वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण लगाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए कई सख्त कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या एलपीजी ईंधन नहीं दिया जाएगा।
बिना PUC सर्टिफिकेट के नहीं मिलेगा ईंधन
दिल्ली सरकार की इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान 'नो PUC, नो फ्यूल' नीति है। इसके तहत वाहन मालिकों को ईंधन खरीदने के लिए वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल प्रमाणपत्र रखना अनिवार्य होगा।जिन वाहन मालिकों के पास वैध PUC प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंप और अन्य ईंधन स्टेशनों पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार का उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान करना और उनके उत्सर्जन पर नियंत्रण लगाना है।इस नियम को प्रभावी बनाने के लिए राजधानी के लगभग 500 ईंधन स्टेशनों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के माध्यम से निगरानी की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले ईंधन केंद्रों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
बाहरी राज्यों की पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध
दिल्ली सरकार ने बाहरी राज्यों में पंजीकृत पुराने प्रदूषण मानकों वाले वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।योजना के अनुसार, दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI से नीचे के उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, सरकार की घोषित व्यवस्था में सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।इस कदम का उद्देश्य दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या कम करना है। वाहन मालिकों को सलाह दी गई है कि वे राजधानी की यात्रा से पहले अपनी गाड़ी के उत्सर्जन मानकों और आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर लें।
निर्माण कार्यों और धूल पर भी सख्ती
दिल्ली सरकार ने निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को प्रदूषण का प्रमुख कारण मानते हुए विशेष प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है।1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाले बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ संबंधी कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अतिरिक्त 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर व्यापक रोक लगाने की घोषणा की गई है।निर्माण स्थलों पर नियमों के पालन की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
वर्क फ्रॉम होम और पार्किंग शुल्क पर फैसला
प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था और कार्यालयों के समय में बदलाव जैसे उपाय भी योजना में शामिल किए हैं।इसके साथ ही निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से पार्किंग शुल्क दोगुना करने का प्रावधान किया गया है। सार्वजनिक परिवहन के रूप में दिल्ली मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
प्रदूषण रोकने के लिए बढ़ेगी निगरानी
सरकार औद्योगिक प्रदूषण, कचरा जलाने और सड़कों की धूल पर नियंत्रण के लिए भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करेगी। प्रदूषण मापने वाले स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 करने तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 334 प्रवर्तन टीमों को तैनात करने की योजना है।दिल्ली सरकार का उद्देश्य सर्दियों में खराब होती वायु गुणवत्ता को नियंत्रित करना और नागरिकों को प्रदूषण से राहत दिलाना है।फिलहाल वाहन मालिकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि 1 नवंबर से पहले अपने वाहन का PUC प्रमाणपत्र जांच लें। साथ ही बाहरी राज्यों से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को नए प्रवेश नियमों की जानकारी रखना आवश्यक होगा। सरकार को उम्मीद है कि इन उपायों से सर्दियों के दौरान राजधानी में प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
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