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ऐतिहासिक सेंगोल के शिल्पकार वुम्मिदी एथिराज का निधन पीएम मोदी ने जताया दुख
Ratna Netam
21 Oct 2026 5:25 PM IST

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नई दिल्ली। भारत की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण से जुड़े प्रसिद्ध शिल्पकार वुम्मिदी एथिराज का बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। वह 99 वर्ष के थे। उनके निधन से भारतीय पारंपरिक आभूषण निर्माण और शिल्पकला जगत में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। एथिराज उस प्रतिष्ठित शिल्पकार परिवार से संबंधित थे, जिसने वर्ष 1947 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किए गए ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण में उनके योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर वुम्मिदी एथिराज के निधन पर शोक व्यक्त किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के प्रतिष्ठित पारंपरिक परिवार से आने वाले एथिराज को ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में उनके योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा।उन्होंने वर्ष 2023 में एथिराज से हुई अपनी मुलाकात को भी याद किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना के दौरान उन्हें एथिराज से मिलने और राष्ट्र तथा संस्कृति के प्रति उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करने का अवसर मिला था।मोदी ने कहा कि एथिराज का जीवन और उनकी शिल्पकला भारत की गौरवशाली परंपराओं तथा देश की विकास यात्रा के बीच महत्वपूर्ण संबंध को दर्शाती है।प्रधानमंत्री ने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने दी श्रद्धांजलि
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी वुम्मिदी एथिराज के निधन पर दुख व्यक्त किया।उन्होंने भारतीय आभूषण निर्माण की समृद्ध परंपरा को संरक्षित रखने में एथिराज के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।उपराष्ट्रपति ने कहा कि एथिराज की शिल्पकला और उनका सांस्कृतिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
1947 में तैयार किया गया था ऐतिहासिक सेंगोल
वुम्मिदी एथिराज का नाम भारत की आजादी के इतिहास से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।वर्ष 1947 में देश की स्वतंत्रता के समय तमिल परंपरा से जुड़े सेंगोल को तैयार करने की जिम्मेदारी वुम्मिदी परिवार के शिल्पकारों ने निभाई थी।इस ऐतिहासिक राजदंड को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किया गया था।सेंगोल तमिल सांस्कृतिक परंपराओं में न्यायपूर्ण शासन और सत्ता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। इसके शीर्ष पर नंदी की आकृति बनी हुई है, जो भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी है।एथिराज ने इस ऐतिहासिक धरोहर के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनकी कारीगरी को भारतीय शिल्पकला के एक विशेष उदाहरण के रूप में याद किया जाता है।
नए संसद भवन में स्थापित हुआ सेंगोल
करीब 76 वर्षों बाद वर्ष 2023 में ऐतिहासिक सेंगोल एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आया।28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया था।इस अवसर पर तमिलनाडु के धार्मिक प्रतिनिधियों और सेंगोल के निर्माण से जुड़े वुम्मिदी परिवार को भी विशेष सम्मान दिया गया था।प्रधानमंत्री मोदी ने उस दौरान वुम्मिदी एथिराज से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी।नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना को सरकार ने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की पहल बताया था।
125 साल पुरानी आभूषण कंपनी से था संबंध
वुम्मिदी एथिराज का जन्म 25 नवंबर 1926 को हुआ था। वह तमिलनाडु के प्रतिष्ठित वुम्मिदी परिवार के मुखिया थे।यह परिवार लगभग 125 वर्ष पुरानी आभूषण निर्माण कंपनी 'वुम्मिदी बंगारू ज्वेलर्स' से जुड़ा हुआ है।कई पीढ़ियों से यह परिवार सोने-चांदी के आभूषणों और पारंपरिक शिल्पकला के निर्माण में सक्रिय रहा है।वुम्मिदी परिवार की पहचान केवल व्यावसायिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की कलाकृतियों के निर्माण से भी जुड़ी रही है।
भारतीय शिल्पकला में याद रहेगा योगदान
वुम्मिदी एथिराज का निधन भारतीय पारंपरिक शिल्पकला के लिए महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है।उन्होंने अपने जीवन में न केवल पारिवारिक व्यवसाय और आभूषण निर्माण की परंपरा को आगे बढ़ाया, बल्कि भारत के इतिहास से जुड़ी एक विशेष धरोहर के निर्माण में भी योगदान दिया।उनके परिवार में बेटी विजय भारती और दो बेटे उदय कुमार वुम्मिदी तथा विजयेंद्रन वुम्मिदी हैं। उनके अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चेन्नई के बेसेंट नगर में निर्धारित किया गया था।ऐतिहासिक सेंगोल से जुड़े उनके योगदान के कारण वुम्मिदी एथिराज का नाम भारतीय संस्कृति, पारंपरिक कारीगरी और राष्ट्रीय विरासत के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।
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