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नई दिल्ली। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को शीर्ष अदालत ने चर्चित सीएमआरएल-एक्सालॉजिक कथित भ्रष्टाचार मामले में पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच पर सात दिनों के लिए रोक लगा दी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर रद्द नहीं की गई है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष अपील करने की अनुमति दी है। इस फैसले को विजयन परिवार के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें विजयन और उनके परिवार को सिंगल जज के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अपने खिलाफ दिए गए आदेश को चुनौती देने का कानूनी अधिकार है। अदालत ने माना कि एफआईआर दर्ज करने के निर्देश से प्रभावित व्यक्तियों को अपील का अवसर मिलना चाहिए।
सात दिनों तक नहीं होगी एफआईआर की जांच
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में दर्ज एफआईआर प्रभावी रहेगी, लेकिन केरल सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच सात दिनों तक स्थगित रहेगी।इस अवधि के दौरान पिनाराई विजयन और अन्य याचिकाकर्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने अपनी अपील प्रस्तुत कर सकेंगे। वे वहां अंतरिम राहत की मांग भी कर सकते हैं।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सात दिनों की रोक का अर्थ आरोपों से मुक्ति नहीं है। मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की गई है। हाई कोर्ट को कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार होगा।
क्या है सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला?
यह विवाद कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) और एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़ा हुआ है। एक्सालॉजिक कंपनी का संबंध पिनाराई विजयन की बेटी वीणा से है।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का आरोप है कि सीएमआरएल की ओर से एक्सालॉजिक को आईटी परामर्श सेवाओं के नाम पर भुगतान किया गया, जबकि उसके बदले वास्तविक सेवाएं उपलब्ध कराए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।जांच एजेंसियों ने इन लेनदेन में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। हालांकि, विजयन और उनके परिवार ने आरोपों से इनकार किया है। आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हाई कोर्ट के आदेश से शुरू हुआ विवाद
इस मामले में 9 अक्टूबर को केरल हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने सतर्कता विभाग को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।इसके बाद विजयन और उनके परिवार ने आदेश को चुनौती देने के लिए डिवीजन बेंच का रुख किया। लेकिन 15 अक्टूबर को डिवीजन बेंच ने उन्हें अपील की अनुमति देने से इनकार कर दिया।इसके खिलाफ याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। उनका तर्क था कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।सुप्रीम कोर्ट ने इसी कानूनी पहलू पर विचार करते हुए अपील का रास्ता खोल दिया।
अब हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में होगी। वहां यह तय होगा कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश बरकरार रखा जाएगा या याचिकाकर्ताओं को आगे कोई अंतरिम राहत मिलेगी।यह मामला केरल की राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पूर्व मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों के नाम शामिल हैं।फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विजयन परिवार को सात दिनों की राहत मिली है, लेकिन भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।
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