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बिहार MLA राजू कुमार सिंह की सजा पर कोर्ट का फैसला सुरक्षित

New Delhi : राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को बिहार के विधायक राजू कुमार सिंह को दी जाने वाली सज़ा पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। कोर्ट 4 जुलाई को आदेश सुनाएगी।विधायक राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide not amounting to murder) का दोषी ठहराया गया है। 31 दिसंबर 2018 को राजू कुमार सिंह के घर पर न्यू ईयर पार्टी के दौरान खुशी में की गई फायरिंग (celebratory firing) में डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी।
उन्होंने अच्छे व्यवहार के आधार पर प्रोबेशन (probation) पर रिहाई की अपील की है। उनके वकील ने कहा कि उन्हें पहले कभी दोषी नहीं ठहराया गया है और वे छह बार विधायक रह चुके हैं।स्पेशल जज विशाल गोगने ने आरोपी और अभियोजन पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद सज़ा पर आदेश सुरक्षित रख लिया। उन्होंने राजू कुमार सिंह के व्यवहार पर प्रोबेशन ऑफिसर की रिपोर्ट पर भी विचार किया।
प्रोबेशन ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर, सीनियर एडवोकेट नंदिता राव ने बताया कि राजू कुमार सिंह पटना हाई कोर्ट से एक मामले में ज़मानत पर हैं। उन्हें एक मामले में बरी कर दिया गया है। तीसरा मामला कोर्ट में लंबित है।उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी, रेनू सिंह ने प्रोबेशन ऑफिसर को बताया था कि उनके पति को किसी भी मामले में जेल नहीं भेजा गया है। सीनियर वकील ने कहा कि इससे पता चलता है कि उन्हें पहले कभी दोषी नहीं ठहराया गया है।
उन्होंने आगे तर्क दिया कि यह घटना एक दुर्घटना थी, लापरवाही से हुई हरकत थी, और उनका परिवार भी डांस फ्लोर पर था। इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि पीड़ित को किसकी गोली लगी। हवा में दो गोलियां चलाई गई थीं; वे किसी पर निशाना साधकर नहीं चलाई गई थीं।
यह भी कहा गया कि दोषी ने किसी गवाह को प्रभावित नहीं किया, धमकाया नहीं और न ही खरीदा।
उनका परिवार है, बूढ़े माता-पिता हैं और उनका पिछला रिकॉर्ड अच्छा रहा है।
सीनियर एडवोकेट ने यह भी कहा कि वे 6 बार के विधायक हैं और पूरी ईमानदारी से अपने क्षेत्र की सेवा कर रहे हैं। उन्हें एक मौका दिया जाए; अगर उन्हें 2 साल से ज़्यादा की सज़ा होती है, तो उनकी विधायक की सीट चली जाएगी। उनके पिछले व्यवहार को देखते हुए उन्हें सुधरने का मौका दिया जा सकता है।
एडवोकेट राजीव मोहन, ऋषभ भाटी और रेहान खान के साथ पेश हुए। यह कहा गया कि दोषी को फायरिंग की वैज्ञानिक समझ नहीं थी, और उन्हें यह नहीं पता था कि गोली किस रास्ते से जाएगी।
वैज्ञानिक जानकारी की कमी थी। फिजिक्स का सिद्धांत है कि गोली पैराबोलिक (parabolic) रास्ते पर चलती है। अगर इसे 45 डिग्री के एंगल पर फायर किया जाए, तो यह दूर तक जाएगी। अगर इसे 90 डिग्री के एंगल पर फायर किया जाए, तो यह कम दूरी तय करेगी। और इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि गोली किस तरह से काम करेगी।
वकील ने दलील दी कि कोर्ट उसके भविष्य को देखते हुए 2 साल से कम की सज़ा दे सकता है।
कोर्ट के यह पूछने पर कि क्या वह कुछ कहना चाहता है, MLA राजू कुमार सिंह ने भी अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा, "मैंने कभी कोई गलत काम नहीं किया है। मैं एक सामाजिक व्यक्ति हूँ जो समाज के बीच रहता हूँ। मृतक महिला मेरे भाई के दोस्त की पत्नी थी; मैं उन्हें 'भाभी' कहकर बुलाता था। मैं कोर्ट से गुज़ारिश करता हूँ कि कम से कम सज़ा दी जाए।"
उन्होंने कहा कि उन्होंने आज तक कुछ भी गलत नहीं किया है। वह एक सामाजिक व्यक्ति हैं और समाज में रहते हैं। मृतक महिला उनके भाई के दोस्त की पत्नी थी। वह उन्हें भाभी कहते थे। वह कोर्ट से नरमी बरतने की प्रार्थना करते हैं।
दूसरी ओर, सरकारी वकील ने आरोपी के वकील की दलीलों का विरोध किया।
सरकारी वकील ने कहा कि पीड़िता 45 साल की थी और उसकी ज़िंदगी अभी बाकी थी।
यह घटना उसकी 12 साल की बेटी और पति के सामने हुई। अपनी माँ के सिर से खून बहते देखना एक गहरा सदमा है। सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी को सावधानी बरतनी चाहिए थी।
सरकारी वकील ने यह भी कहा कि फायरिंग डांस फ्लोर के पास की गई थी। हमारे देश में खुशी के मौके पर फायरिंग (सेलिब्रेटरी फायरिंग) एक बीमारी की तरह है। यह मानसिक स्थिति को दिखाता है। वह बिहार में नहीं थे; वह दिल्ली में थे। उन्हें कोई खतरा नहीं था। फिर भी, उनके पास हथियार थे।
सरकारी वकील ने यह भी दलील दी कि पीड़िता के कपड़े और मोबाइल छिपा दिए गए थे। बाद में उन्हें बरामद किया गया। फिर वह भाग गया। उसे कुशीनगर हाईवे पर पकड़ा गया। कपड़े हाईवे पर फेंक दिए गए थे। खून धो दिया गया था। DJ वालों ने अपने बयान में यह बात बताई।
यह एक ऐसा मामला है जिसमें कानून बनाने वाला ही कानून तोड़ने वाला बन सकता है। वह 6 बार के MLA हैं। उन्हें कानून की जानकारी थी। सरकारी वकील ने कहा कि उन्हें प्रोबेशन पर छोड़ने से समाज में गलत संदेश जाएगा। अभियोजन पक्ष ने कहा, "आरोपी को कानून का कोई सम्मान नहीं है। उसने कानून के दायरे से बाहर निकलने की हर मुमकिन कोशिश की। न तो वह और न ही उसकी पत्नी पीड़ित से मिलने गए। यह उसकी अमानवीयता को दर्शाता है।"





