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बैंक की करेंसी चेस्ट में पहुंचे जाली नोट, जांच में बड़ा खुलासा

Ratna Netam
22 Oct 2026 6:13 PM IST
बैंक की करेंसी चेस्ट में पहुंचे जाली नोट, जांच में बड़ा खुलासा
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने नकली भारतीय करेंसी नोटों की अवैध छपाई और सप्लाई से जुड़े बड़े मामले में दो कथित मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। गुरुवार को एजेंसी ने बताया कि दोनों आरोपियों का संबंध उस गिरोह से है, जिसके जरिए बड़ी मात्रा में नकली नोट उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट तक पहुंचाए गए थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजय कुमार और हरीश रौंटा के रूप में हुई है। एनआईए के अनुसार, दोनों आरोपी पहले से गिरफ्तार आदेश चौधरी और अन्य आरोपियों के करीबी सहयोगी हैं।यह मामला सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से करीब 17.29 करोड़ रुपये के नकली भारतीय मुद्रा नोट मिलने से संबंधित है। एनआईए की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस मामले को केस नंबर RC-02/2026/NIA-LKW के तहत दर्ज किया गया है।
अंबाला और मनाली से दो आरोपियों की गिरफ्तारी
एनआईए के अनुसार, आरोपी अजय कुमार को 16 अक्टूबर को हरियाणा के अंबाला से गिरफ्तार किया गया था। वहीं दूसरे आरोपी हरीश रौंटा को 22 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के मनाली से पकड़ा गया।एजेंसी का दावा है कि दोनों आरोपी नकली करेंसी नोटों की छपाई और उनकी सप्लाई से संबंधित साजिश में शामिल थे।जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था और नकली नोटों को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका थी।दोनों गिरफ्तारियों को मामले की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
PNB की करेंसी चेस्ट में मिले थे 17.29 करोड़ के नकली नोट
इस मामले की सबसे गंभीर बात यह है कि नकली नोट सामान्य बाजार से आगे बढ़कर बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंच गए थे।सहारनपुर के सिविल लाइंस स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा से जुड़ी करेंसी चेस्ट में करीब 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने का मामला सामने आया था।करेंसी चेस्ट वह व्यवस्था होती है, जहां बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार नकदी का भंडारण और वितरण करते हैं।ऐसे संवेदनशील स्थान तक नकली नोट पहुंचने की घटना ने बैंकिंग व्यवस्था में नकदी की जांच और सुरक्षा प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
पहले गिरफ्तार आरोपी से जुड़े हैं दोनों संदिग्ध
एनआईए ने बताया कि अजय कुमार और हरीश रौंटा इस मामले में पहले से गिरफ्तार आरोपी आदेश चौधरी तथा अन्य संदिग्धों के करीबी सहयोगी हैं।एजेंसी को आशंका है कि नकली नोटों की छपाई, उनकी सप्लाई और बैंकिंग प्रणाली तक पहुंचाने के पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।जांच में आरोपियों के आपसी संपर्क, आर्थिक लेनदेन और नकली नोटों के वितरण से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।एनआईए इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों में सितंबर 2026 के दौरान भी इस प्रकरण में गिरफ्तारियों का उल्लेख किया गया है।
नकली नोटों की सप्लाई चेन की जांच जारी
जांच एजेंसी के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट तैयार कहां किए गए और उन्हें किन माध्यमों से आगे पहुंचाया गया।इसके अलावा यह भी पता लगाया जाना है कि नकली नोटों को बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में किन व्यक्तियों की भूमिका थी।जांच में यह स्पष्ट करना भी आवश्यक होगा कि नोटों की पहचान किस स्तर पर नहीं हो सकी और क्या इस मामले में किसी बैंक कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की मिलीभगत थी।हालांकि, किसी बैंक कर्मचारी की संलिप्तता के संबंध में अभी कोई प्रमाणित जानकारी सामने नहीं आई है।
बैंकिंग व्यवस्था के लिए गंभीर मामला
नकली भारतीय मुद्रा का निर्माण और प्रसार देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है।नकली नोटों के बाजार में आने से नकदी लेनदेन में विश्वास प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा व्यापारियों, आम नागरिकों और बैंकिंग संस्थानों को आर्थिक नुकसान होने का खतरा रहता है।विशेष रूप से बैंक की करेंसी चेस्ट तक नकली नोट पहुंचने की घटना से नकदी की जांच, सत्यापन और निगरानी संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा की आवश्यकता सामने आती है।इस तरह के मामलों में नकली नोटों के स्रोत और वितरण नेटवर्क की पहचान करना जांच एजेंसियों की प्राथमिकता होती है।
अन्य आरोपियों की तलाश और जांच तेज
एनआईए अब गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और नकली नोटों के नेटवर्क की जांच कर रही है।एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने कितने समय तक नकली मुद्रा की छपाई और सप्लाई से संबंधित गतिविधियां संचालित कीं।साथ ही यह भी जांच का विषय है कि इस नेटवर्क के जरिए अन्य बैंकों या बाजारों में नकली नोट पहुंचाए गए थे या नहीं।फिलहाल अजय कुमार और हरीश रौंटा की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में आगे की जांच जारी है। आरोपियों की कथित भूमिका और साजिश के पूरे स्वरूप का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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