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जंतर मंतर पर प्रदर्शन को लेकर विवादजयराम रमेश ने सरकार को घेरा
Ratna Netam
12 Oct 2026 3:30 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के निर्धारित स्थल के रूप में हटाए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने सोमवार को इस फैसले की आलोचना की। दोनों ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को सीमित करने और नागरिकों के असहमति व्यक्त करने के अधिकार को प्रभावित करने का आरोप लगाया। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इस फैसले को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध और जनभागीदारी का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।जयराम रमेश ने अपने बयान में दावा किया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन के निर्धारित स्थल के रूप में हटाने का निर्णय सरकार की घबराहट को दर्शाता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध की आवाज उठाने के अधिकार से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए। वहीं, CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने भी इस फैसले का विरोध किया। हालांकि, सरकार की ओर से इस आलोचना पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर जंतर-मंतर से संबंधित फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम के पीछे सरकार की घबराहट दिखाई देती है।रमेश ने लिखा, "यह PM-HM की जोड़ी में फैली जबरदस्त घबराहट का साफ संकेत है कि ऐतिहासिक जंतर-मंतर अब वह जगह नहीं रहेगी जहां हमारे लोकतंत्र को रोजाना 'बूस्टर डोज' मिलती थी।"अपने इस बयान के माध्यम से जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने जंतर-मंतर को लोकतांत्रिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए प्रदर्शन स्थल के रूप में इसकी भूमिका समाप्त किए जाने पर आपत्ति जताई।कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में बदलाव को लेकर चल रही चर्चा के बीच सामने आई है।
लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर उठाए सवाल
जयराम रमेश और CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।उनका आरोप है कि इस फैसले से नागरिकों और संगठनों के शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करना और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी बात रखना नागरिक भागीदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।हालांकि, सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के संबंध में प्रशासन कानून-व्यवस्था, यातायात और सुरक्षा से जुड़े नियम लागू कर सकता है।ऐसे में प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में बदलाव को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक पहलुओं पर चर्चा हो रही है।
CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने भी जताई नाराजगी
कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने भी सोमवार को जंतर-मंतर से संबंधित फैसले की आलोचना की।उन्होंने सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को सीमित करने और असहमति के अधिकार को निशाना बनाने का आरोप लगाया।उनकी आपत्ति भी जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के निर्धारित स्थान के रूप में हटाए जाने से जुड़ी है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अभिजीत दिपके के बयान का विस्तृत विवरण या उनकी ओर से आगे किसी कार्यक्रम की घोषणा का उल्लेख नहीं है।इस मुद्दे पर जयराम रमेश और अभिजीत दिपके की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि प्रदर्शन स्थलों से संबंधित फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जंतर-मंतर का विरोध प्रदर्शनों से पुराना संबंध
दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा रहा है।यहां अलग-अलग मुद्दों को लेकर धरने और प्रदर्शन आयोजित होते रहे हैं। कई संगठनों ने अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से उठाने के लिए इस स्थान का उपयोग किया है।जंतर-मंतर की इसी भूमिका का उल्लेख करते हुए जयराम रमेश ने इसे लोकतंत्र को मजबूती देने वाली जगह बताया।उन्होंने अपने बयान में कहा कि जंतर-मंतर अब वह स्थान नहीं रहेगा, जहां लोकतंत्र को नियमित रूप से 'बूस्टर डोज' मिलती थी।उनकी यह टिप्पणी जंतर-मंतर के ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व को लेकर उनकी चिंता को दर्शाती है।
प्रदर्शन स्थलों में बदलाव को लेकर विवाद
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए निर्धारित स्थानों में बदलाव की जानकारी सामने आई है।उपलब्ध विवरण के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित CBD मैदान को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया है।इस बदलाव को लेकर राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं की ओर से आपत्तियां जताई जा रही हैं।हालांकि, नए प्रदर्शन स्थलों को निर्धारित करने के पीछे प्रशासन की ओर से बताए गए विस्तृत कारणों की जानकारी उपलब्ध नहीं है।जयराम रमेश और अभिजीत दिपके ने इसी फैसले को लेकर सरकार की आलोचना की है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान में शामिल
भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत शांतिपूर्ण तथा बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार प्राप्त है।हालांकि, इन अधिकारों पर संविधान के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।सार्वजनिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और अन्य नागरिकों के अधिकारों का ध्यान रखना भी आवश्यक होता है।जंतर-मंतर से जुड़े वर्तमान विवाद में एक ओर प्रदर्शन के अधिकार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित प्रशासनिक अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं।इस मामले में संबंधित आदेश और उसके कानूनी आधार का परीक्षण किए बिना किसी संवैधानिक उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
जयराम रमेश ने अपने बयान में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। वहीं, CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने भी प्रदर्शन स्थल से संबंधित फैसले पर आपत्ति व्यक्त की है।हालांकि, इन आरोपों पर केंद्र सरकार या दिल्ली पुलिस की ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।ऐसे में फैसले के पीछे प्रशासनिक कारणों और इसके क्रियान्वयन से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
जंतर-मंतर को लेकर जारी है राजनीतिक बहस
जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के निर्धारित स्थान से हटाए जाने का मुद्दा अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे लोकतांत्रिक विरोध से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की है। वहीं, अभिजीत दिपके ने भी असहमति व्यक्त करने के अधिकार को लेकर चिंता जताई है।फिलहाल इस फैसले को लेकर उठाए गए आरोप राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के रूप में सामने आए हैं। इनके संबंध में प्रशासन की विस्तृत स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।जंतर-मंतर को लेकर शुरू हुई यह बहस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, सार्वजनिक स्थानों के उपयोग और नागरिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने ला रही है।
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