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AI निगरानी पर विवाद, पुलिस ने दी सफाई

Kavita2
25 July 2026 10:57 AM IST
AI निगरानी पर विवाद, पुलिस ने दी सफाई
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नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र विरोध-प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर एडवांस्ड फेशियल रिकग्निशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्विलांस तकनीक के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। AI से लैस फेशियल रिकग्निशन वैन के कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों और संगठनों ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने आरोप लगाया है कि पुलिस इस तकनीक का इस्तेमाल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की पहचान करने और उन पर नजर रखने के लिए कर रही थी। उनका दावा है कि फेशियल रिकग्निशन सिस्टम के जरिए लोगों का बायोमेट्रिक डेटा एकत्र किया जा सकता है, जिससे नागरिकों की निजता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है। उनका आरोप है कि इस तरह की निगरानी तकनीक का इस्तेमाल लोगों में डर पैदा कर सकता है और भविष्य में विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने से उन्हें हतोत्साहित कर सकता है।

वायरल हुए कथित वीडियो में AI आधारित फेशियल रिकग्निशन सिस्टम वाली वैन दिखाई देने का दावा किया गया है। इन वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने इसे सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बताया है, जबकि कुछ ने इसे निजता से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों का इस्तेमाल किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, संवेदनशील इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और असामाजिक तत्वों, अपराधियों तथा वांछित लोगों की पहचान करने के उद्देश्य से यह तकनीक लगाई गई है।

पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील स्थानों पर समय-समय पर विभिन्न संगठनों और समूहों के प्रदर्शन होते रहते हैं। ऐसे में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा उपायों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है, न कि आम नागरिकों की गतिविधियों पर अनावश्यक नजर रखना। पुलिस ने कहा कि किसी भी तकनीक का उपयोग निर्धारित नियमों और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के इस स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐसी तकनीक के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां यह स्पष्ट करें कि इस प्रणाली के जरिए किस प्रकार का डेटा एकत्र किया जाता है, उसे कितने समय तक सुरक्षित रखा जाता है और उसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

AI आधारित निगरानी तकनीक को लेकर दुनिया भर में निजता और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और निजता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। ऐसी तकनीकों के इस्तेमाल के लिए पारदर्शी नियम और जवाबदेही की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।

जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब देश में डिजिटल निगरानी और डेटा सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है। एक ओर सुरक्षा एजेंसियां अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के लिए आधुनिक तकनीक को उपयोगी मानती हैं, वहीं दूसरी ओर नागरिक अधिकार समूह इसके दुरुपयोग की आशंका जताते हैं।

फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क सामने आए हैं। पुलिस सुरक्षा कारणों का हवाला दे रही है, जबकि प्रदर्शनकारी निजता और नागरिक अधिकारों को लेकर चिंता जता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस तकनीक के इस्तेमाल को लेकर कोई और जानकारी या आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और AI सर्विलांस को लेकर उठा यह विवाद सुरक्षा व्यवस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस को फिर से सामने ले आया है।

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