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परिसीमन पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा, जयराम रमेश ने उठाए सवाल

Ratna Netam
20 Oct 2026 2:48 PM IST
परिसीमन पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा, जयराम रमेश ने उठाए सवाल
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नई दिल्ली। देश में परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सरकार ने परिसीमन को लेकर कोई नया प्रस्ताव तैयार किया है। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने और सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। जयराम रमेश ने कहा कि परिसीमन जैसा महत्वपूर्ण संवैधानिक विषय पारदर्शिता और व्यापक राजनीतिक सहमति के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र पर शुरू हुआ विवाद
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परिसीमन के मुद्दे पर पत्र लिखा था। इस पत्र का जवाब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार, 19 अक्टूबर को दिया।खड़गे ने अपने पत्र में केंद्र सरकार से परिसीमन संबंधी किसी नए प्रस्ताव को संसद में पेश करने से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित करने का आग्रह किया था। कांग्रेस का कहना है कि इस विषय का सीधा संबंध देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से है। इसलिए सभी दलों की राय लेना आवश्यक है।
जयराम रमेश ने केंद्र से पूछे सवाल
जयराम रमेश ने सरकार से पूछा कि क्या परिसीमन को लेकर कोई नया और ठोस प्रस्ताव तैयार किया गया है। यदि ऐसा है, तो क्या उस प्रस्ताव पर किसी राजनीतिक दल के साथ विचार-विमर्श हुआ है।उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार सभी दलों को एक मंच पर बुलाकर नए प्रस्ताव की जानकारी क्यों नहीं दे रही है। रमेश ने यह भी पूछा कि क्या सरकार पहले अस्वीकृत हो चुके विधेयक को दोबारा संसद में लाने की तैयारी कर रही है।कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अप्रैल 2026 में लोकसभा में पेश संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से पहले की गई चर्चाओं में कुछ आश्वासन दिए गए थे, लेकिन वे विधेयक के प्रावधानों में शामिल नहीं किए गए।
किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के आरोपों का दिया जवाब
दूसरी ओर, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार परिसीमन के मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ बातचीत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।रिजिजू के अनुसार, उन्होंने इस वर्ष 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल को कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखे थे। इसके अलावा उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात कर सहयोग मांगा था।केंद्रीय मंत्री का कहना है कि सरकार ने समाजवादी पार्टी, डीएमके और अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों से भी विचार-विमर्श किया है। उन्होंने कांग्रेस से महत्वपूर्ण विधायी प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की।
परिसीमन को लेकर क्यों महत्वपूर्ण है विवाद?
परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत जनसंख्या और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर लोकसभा तथा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा की जाती है।इस प्रक्रिया का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या या संरचना में बदलाव से राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि विभिन्न राजनीतिक दल परिसीमन की प्रक्रिया और प्रस्तावित बदलावों को लेकर अपनी-अपनी चिंताएं सामने रख रहे हैं।परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में इस विषय पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने की आवश्यकता पर चर्चा हो रही है।
सर्वदलीय बैठक की मांग पर कांग्रेस कायम
कांग्रेस का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर सरकार को सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना चाहिए। पार्टी चाहती है कि किसी भी नए प्रस्ताव को संसद में लाने से पहले उसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए और सभी दलों के साथ सामूहिक चर्चा हो।फिलहाल परिसीमन के मुद्दे पर सरकार और कांग्रेस के बीच मतभेद बने हुए हैं। एक तरफ केंद्र सरकार पहले से विपक्षी दलों के साथ बातचीत किए जाने की बात कह रही है, वहीं कांग्रेस नए प्रस्ताव की जानकारी और औपचारिक सर्वदलीय बैठक की मांग पर कायम है।
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