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PM Modis की महिला आरक्षण अपील पर कांग्रेस का पलटवार

Ratna Netam
16 Aug 2026 5:51 PM IST
PM Modis की महिला आरक्षण अपील पर कांग्रेस का पलटवार
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नई दिल्ली। महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार तथा कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विपक्षी दलों से महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करने की अपील को नाटक करार दिया है। पार्टी महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार का वास्तविक उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना नहीं, बल्कि परिसीमन के जरिए प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में सभी राजनीतिक दलों से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू कराने में सहयोग करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यह विषय करीब 40 वर्षों से राजनीतिक खींचतान में फंसा हुआ है। प्रधानमंत्री ने दलों से महिलाओं की क्षमता और नेतृत्व का सम्मान करते हुए विधेयक के समर्थन में आगे आने का आग्रह किया था।
मौजूदा 543 सीटों पर आरक्षण की मांग
प्रधानमंत्री की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम रमेश ने कहा कि सरकार को महिला आरक्षण को परिसीमन और लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी से नहीं जोड़ना चाहिए। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की मांग है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से ही वर्तमान 543 सदस्यीय लोकसभा के आधार पर महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित कर दी जाएं।
रमेश के अनुसार, मौजूदा लोकसभा में महिलाओं के लिए 182 सीटें आरक्षित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को लाल किले से बार-बार उपदेश देने के बजाय महिला आरक्षण को वर्तमान व्यवस्था में ही लागू करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, “प्रधानमंत्री का एकमात्र एजेंडा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि मोदी को बचाना है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव के लिए विपक्ष का समर्थन हासिल करना चाहती है।
राजीव गांधी के योगदान का किया जिक्र
जयराम रमेश ने महिला आरक्षण का इतिहास बताते हुए कहा कि वर्ष 1993 में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायतों, जिला परिषदों, प्रखंड पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया गया था।
उन्होंने इसका श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को देते हुए कहा कि उन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया था। बाद में संविधान संशोधनों के जरिए महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को संस्थागत स्वरूप मिला।
रमेश ने कहा कि सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। उस समय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग की थी।
अधिसूचना के समय पर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 16 अप्रैल 2026 की रात अधिसूचित किया गया, जब संसद में परिसीमन से संबंधित मुद्दे पर चर्चा चल रही थी। उन्होंने दावा किया कि इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं और यह संकेत मिलता है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की कोशिश की गई।
विस्तारित बजट सत्र के दौरान लाए गए संविधान संशोधन विधेयक में 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव था। इसके साथ लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने की बात भी शामिल थी। प्रस्तावित नई व्यवस्था में महिलाओं के लिए करीब 272 सीटें आरक्षित हो सकती थीं।
दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी सरकार
संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा से पारित कराने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की जरूरत थी। मतदान में विधेयक को 298 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि 230 सदस्यों ने इसका विरोध किया। आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका।
कांग्रेस ने साफ किया है कि वह महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसे परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जोड़ने का विरोध करती रहेगी। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी ने सभी दलों से राजनीतिक मतभेद छोड़कर आरक्षण लागू कराने में सहयोग की अपील की है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध फिलहाल जारी रहने के संकेत हैं।
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