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नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन का असर राजधानी की यातायात व्यवस्था पर भी देखने को मिला। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 20 से 24 जुलाई के बीच मेट्रो यात्रियों की संख्या में करीब 4.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस अवधि में सामान्य दिनों की तुलना में करीब 2.67 लाख कम यात्रियों ने दिल्ली मेट्रो से सफर किया।
डीएमआरसी के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने के शुरुआती 19 दिनों में दिल्ली मेट्रो में औसतन प्रतिदिन लगभग 65.93 लाख यात्री सफर कर रहे थे। लेकिन 20 से 24 जुलाई के बीच यह संख्या घटकर करीब 63.25 लाख रह गई। यानी प्रदर्शन और उससे जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण मेट्रो की औसत साप्ताहिक यात्री संख्या में कमी दर्ज की गई।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की सुरक्षा तैयारियों के तहत केंद्रीय दिल्ली के आसपास स्थित करीब 18 मेट्रो स्टेशनों पर अस्थायी रूप से प्रवेश और निकास बंद कर दिए गए थे। हालांकि कुछ स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रही, जिससे यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा। इस वजह से सरकारी कार्यालयों, व्यापारिक क्षेत्रों और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन के कारण दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटने और सुरक्षा कारणों से कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही धीमी रही। इसका सीधा असर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ा और कई यात्रियों ने यात्रा टालना या वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करना बेहतर समझा।
हालांकि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने यात्रियों की संख्या में आई इस गिरावट को लेकर ज्यादा चिंता नहीं जताई है। डीएमआरसी का कहना है कि वीकेंड, छुट्टियों और विशेष परिस्थितियों में मेट्रो की यात्री संख्या में इस तरह का उतार-चढ़ाव सामान्य है। कॉर्पोरेशन के अनुसार, जून 2026 में दिल्ली मेट्रो की औसत वीकडे राइडरशिप करीब 68.53 लाख रही थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन था।
जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन बाद में संसद मार्च तक पहुंच गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति भी बनी। प्रदर्शनकारियों की ओर से कई मांगें रखी गई थीं, जिसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया। हालांकि प्रदर्शन खत्म होने के बाद भी कुछ दिनों तक इसका असर दिल्ली की सामान्य गतिविधियों पर दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली जैसे बड़े शहर में किसी भी बड़े प्रदर्शन का प्रभाव केवल सड़क यातायात तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी इससे प्रभावित होती हैं। दिल्ली मेट्रो राजधानी की लाइफलाइन मानी जाती है और रोजाना लाखों लोग नौकरी, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सुरक्षा कारणों से स्टेशन बंद होने या यात्रा में बदलाव का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है।
प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का फैसला सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया था, लेकिन इससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। फिलहाल स्थिति सामान्य हो चुकी है और मेट्रो सेवाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या फिर से सामान्य स्तर पर लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।





