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जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा खतरनाक ‘नमी वाली गर्मी’ का खतरा, India सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल

New Delhi : नई दिल्ली से जारी एक नई रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में गर्मी केवल बढ़ ही नहीं रही है, बल्कि हवा में नमी बढ़ने के कारण यह और अधिक खतरनाक होती जा रही है। इससे ‘हीट स्ट्रेस’ और स्वास्थ्य जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं। Climate Central की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि 1970 के दशक की तुलना में खतरनाक नमी वाले दिनों की संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत इस बढ़ते खतरे से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है।
रिपोर्ट के लिए दुनिया के 961 शहरों का विश्लेषण किया गया, जिनमें भारत के 59 शहर शामिल थे। आंकड़ों के अनुसार, 1970-79 के दौरान औसतन जहां खतरनाक नमी वाले दिन लगभग 10 थे, वहीं 2016-2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 23 दिन प्रति वर्ष हो गई है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इनमें से करीब 64 प्रतिशत दिन सीधे मानव-जनित जलवायु परिवर्तन से जुड़े हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान और नमी दोनों के बढ़ने से गर्मी और अधिक असहनीय हो जाती है। एक विशेषज्ञ ने बताया कि हर 1 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने पर वातावरण में लगभग 7 प्रतिशत अधिक नमी बनी रह सकती है, जिससे गर्मी का प्रभाव और बढ़ जाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तेजी से हो रहा शहरीकरण, हरियाली की कमी, कंक्रीट संरचनाएं और घटते जल स्रोत ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ को बढ़ा रहे हैं। इसके कारण शहर रात के समय भी ठंडे नहीं हो पाते और गर्मी का असर लगातार बना रहता है।
इस अध्ययन में ‘वेट-बल्ब टेम्परेचर’ को भी महत्वपूर्ण बताया गया है, जो तापमान और नमी के संयुक्त प्रभाव को मापता है। यह दर्शाता है कि शरीर पसीने के जरिए खुद को कितनी प्रभावी तरीके से ठंडा कर सकता है। अधिक नमी होने पर पसीना ठीक से वाष्पित नहीं हो पाता, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार 35 डिग्री सेल्सियस का वेट-बल्ब तापमान मानव जीवन की सीमा के करीब माना जाता है, क्योंकि इसके बाद शरीर खुद को सुरक्षित रूप से ठंडा नहीं कर पाता। इससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तटीय क्षेत्र और घनी आबादी वाले इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। भारत में विशेष रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में खतरनाक नमी वाली गर्मी में तेज वृद्धि देखी गई है।
पिछले पांच दशकों के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में ऐसे खतरनाक दिनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 1970 के दशक में जहां यह औसतन 10 दिन थी, वहीं हाल के वर्षों में यह 23 दिन तक पहुंच गई है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी नियोजन से जुड़ी चुनौती बन चुका है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि उत्सर्जन और शहरी तापमान को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।





