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तीन राज्यों में दाल तिलहन की MSP खरीद को केंद्र की मंजूरी
Ratna Netam
30 Sept 2026 2:58 PM IST

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए किसानों को बड़ी राहत देते हुए उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर दालों और तिलहनों की बड़े पैमाने पर खरीद को मंजूरी दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मूल्य समर्थन योजना यानी प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत कुल ₹5,547.99 करोड़ की खरीद को स्वीकृति दी है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य किसानों को बाजार में फसलों के दाम गिरने की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचाना और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।
नई व्यवस्था के तहत तीनों राज्यों के किसानों से प्रमुख दलहन और तिलहन फसलों की खरीद MSP पर की जाएगी। इससे खास तौर पर अरहर, मूंग और दूसरी चिन्हित फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार का जोर इस बात पर है कि किसानों को अपनी फसल कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े और बाजार मूल्य MSP से नीचे आने की स्थिति में उन्हें सरकारी खरीद का विकल्प उपलब्ध रहे।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों का कल्याण, उनकी आमदनी बढ़ाना और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने खरीद व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और किसानों के लिए आसान बनाने पर भी जोर दिया। सरकार का प्रयास है कि पात्र किसानों को MSP आधारित खरीद व्यवस्था का लाभ मिले और भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी न हो।
तीनों राज्यों में मंजूर कुल खरीद में सबसे बड़ी हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की है। उत्तर प्रदेश में कुल ₹3,992.57 करोड़ मूल्य की फसलों की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसमें अरहर की खरीद सबसे बड़ा हिस्सा है। सरकार ने राज्य में 4,66,000 मीट्रिक टन अरहर खरीदने को मंजूरी दी है, जिसकी MSP के आधार पर कुल कीमत लगभग ₹3,937.70 करोड़ होगी।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश में 6,250 मीट्रिक टन मूंग की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। इसकी कुल कीमत करीब ₹54.87 करोड़ बताई गई है। इस तरह केवल अरहर और मूंग की खरीद के जरिए उत्तर प्रदेश के दलहन किसानों को बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव के दौरान MSP का सहारा मिलेगा।
अरहर और मूंग जैसी दलहन फसलें किसानों की आय के साथ-साथ देश में दालों की उपलब्धता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। केंद्र सरकार हाल के वर्षों में दलहन उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर देती रही है। जून 2026 की कृषि मंत्रालय की समीक्षा बैठक में भी अरहर, उड़द और मूंग का उत्पादन बढ़ाकर दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत करने पर जोर दिया गया था।
सरकार द्वारा लागू की जाने वाली प्राइस सपोर्ट स्कीम का मुख्य उद्देश्य भी किसानों को बाजार कीमतों में तेज गिरावट से सुरक्षा देना है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार PSS के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रस्ताव पर अधिसूचित दलहन, तिलहन और नारियल जैसी फसलों की निर्धारित गुणवत्ता वाली उपज MSP पर खरीदी जा सकती है, खास तौर पर उस समय जब कटाई के दौरान बाजार भाव घोषित MSP से नीचे पहुंच जाता है। खरीद केंद्रीय नोडल एजेंसियों और राज्य की नामित एजेंसियों के माध्यम से की जाती है।
खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए केंद्र सरकार पहले ही विभिन्न खरीफ फसलों के MSP को मंजूरी दे चुकी है। मई 2026 में मंजूर MSP में सरकार ने 14 खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया था। इसमें मूंग के लिए उत्पादन लागत पर अनुमानित मार्जिन सबसे अधिक 61 प्रतिशत और अरहर के लिए 54 प्रतिशत बताया गया था। सरकार ने दलहन और तिलहन जैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए MSP व्यवस्था को महत्वपूर्ण साधन बताया है।
उत्तर प्रदेश के अलावा तेलंगाना और कर्नाटक में भी PSS के तहत खरीद को मंजूरी दी गई है। इन राज्यों में भी मंजूर फसलों की खरीद MSP पर की जाएगी। इससे उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है जिन्हें कटाई के समय मंडियों में कीमत गिरने के कारण अपनी उपज कम भाव पर बेचनी पड़ती है।
केंद्र सरकार का कहना है कि खरीद की व्यवस्था किसानों तक सीधे पहुंचे और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे पहले भी कृषि मंत्रालय ने MSP खरीद को मजबूत, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए केंद्रीय खरीद एजेंसियों के कामकाज की समीक्षा की थी। फरवरी 2026 में NAFED की समीक्षा के दौरान कृषि मंत्री ने दलहन और तिलहन खरीद की व्यवस्था तथा किसानों को MSP का पूरा लाभ सुनिश्चित करने पर जोर दिया था।
PSS व्यवस्था उस समय किसानों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो जाती है, जब किसी फसल की ज्यादा पैदावार के कारण स्थानीय मंडियों में उसके दाम तेजी से गिर जाते हैं। ऐसी स्थिति में किसान के सामने तत्काल नकदी की जरूरत होने के कारण कम कीमत पर फसल बेचने की मजबूरी पैदा हो सकती है। MSP पर सरकारी खरीद होने से किसान के पास तय न्यूनतम कीमत पर अपनी फसल बेचने का विकल्प मौजूद रहता है।
दाल और तिलहन उत्पादकों के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी अहम है क्योंकि इन फसलों के बाजार भाव में उत्पादन, मांग और आपूर्ति के हिसाब से बदलाव देखने को मिलता है। सरकारी खरीद की स्वीकृति से बाजार में किसानों के लिए एक न्यूनतम मूल्य सुरक्षा तैयार होती है।
केंद्र की ओर से ₹5,547.99 करोड़ की खरीद मंजूरी को खरीफ सीजन के दौरान किसानों को मूल्य सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग ₹4 हजार करोड़ की खरीद मंजूरी मिलने से वहां के अरहर और मूंग उत्पादकों को इसका बड़ा हिस्सा मिल सकता है।
अब राज्यों और खरीद एजेंसियों की जिम्मेदारी होगी कि मंजूर मात्रा के अनुसार खरीद केंद्रों और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से संचालित किया जाए। किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि पंजीकरण, फसल की गुणवत्ता जांच, खरीद और भुगतान की प्रक्रिया सरल और समयबद्ध रहे।
सरकार ने इस फैसले के जरिए एक बार फिर संकेत दिया है कि दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में मंजूर यह खरीद योजना खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 में किसानों को बाजार में कीमतों की गिरावट से सुरक्षा देने और MSP व्यवस्था का लाभ पहुंचाने पर केंद्रित रहेगी।
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