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कैब में महिलाओं की सुरक्षा पर दिल्ली हाई कोर्ट ने भेजा नोटिस

Ratna Netam
30 Sept 2026 2:54 PM IST
कैब में महिलाओं की सुरक्षा पर दिल्ली हाई कोर्ट ने भेजा नोटिस
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नई दिल्ली। ऐप आधारित टैक्सी और राइड-हेलिंग सेवाओं में यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को अहम कदम उठाया। अदालत ने महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए मजबूत और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के साथ-साथ प्रमुख कैब और राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म Uber, Ola और Rapido को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐप आधारित टैक्सी सेवाएं संचालित करने वाली निजी कंपनियों की भी यात्रियों की सुरक्षा को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वह यह जानना चाहता है कि महिला यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ये प्लेटफॉर्म किस तरह की व्यवस्था अपना रहे हैं और किसी अप्रिय स्थिति में उनकी जिम्मेदारी किस हद तक तय होती है।
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि टैक्सी ऐप के निजी ऑपरेटरों को यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जवाबदेह बनाया जाना जरूरी है। अदालत ने इसी कारण Uber, Ola और Rapido को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा, “हम टैक्सी ऐप के प्राइवेट ऑपरेटरों को जवाबदेह बनाना चाहते हैं। इसीलिए हम नोटिस जारी कर रहे हैं।”
मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार से भी जवाब मांगा गया है। अदालत यह जानना चाहती है कि ऐप आधारित टैक्सी और राइड-हेलिंग सेवाओं में यात्रियों, विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्था क्या है और उसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। सभी पक्षों का जवाब मिलने के बाद अदालत इस मामले में आगे विचार करेगी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख तय की है। तब तक संबंधित पक्षों को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। इसके बाद कोर्ट यह देख सकता है कि मौजूदा सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं या उनमें किसी तरह के बदलाव या अतिरिक्त दिशा-निर्देशों की जरूरत है।
जनहित याचिका में ऐप आधारित टैक्सी और राइड-हेलिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें ऐसी व्यवस्था की मांग की गई है जिससे किसी महिला यात्री को यात्रा के दौरान असुरक्षित स्थिति का सामना करने पर तुरंत सहायता मिल सके। साथ ही निजी कंपनियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट करने की मांग की गई है।
आज के समय में बड़ी संख्या में लोग मोबाइल ऐप के जरिए टैक्सी, कैब और बाइक राइड जैसी सेवाएं बुक करते हैं। इनमें महिला यात्रियों की संख्या भी काफी है। देर रात या अकेले यात्रा करने के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसी संदर्भ में हाई कोर्ट के सामने निजी ऑपरेटरों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया गया है।
अदालत की टिप्पणी से साफ है कि सिर्फ ड्राइवर या व्यक्तिगत स्तर पर जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जिस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यात्रा बुक होती है, उसकी भूमिका और जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है। कंपनी ड्राइवर को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ती है, यात्री की बुकिंग स्वीकार करती है और पूरी यात्रा डिजिटल सिस्टम के माध्यम से संचालित होती है। इसलिए यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था में कंपनी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
हाई कोर्ट अब यह देखेगा कि कैब कंपनियों की तरफ से ड्राइवरों के सत्यापन, यात्री सहायता, आपात स्थिति में संपर्क और शिकायतों के समाधान के लिए किस तरह की व्यवस्था बनाई गई है। हालांकि अदालत ने अभी किसी कंपनी के खिलाफ कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है। नोटिस जारी करने का मकसद संबंधित पक्षों से जवाब हासिल करना और उनके पक्ष को सुनना है।
कोर्ट की सुनवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का संचालन निजी कंपनियां करती हैं, लेकिन उनकी सेवाओं का इस्तेमाल सार्वजनिक परिवहन के एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में किया जाता है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार, नियामक संस्थाओं और निजी कंपनियों के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट होना जरूरी है।
मामले में आगे यह भी देखा जा सकता है कि मौजूदा नियमों के तहत कंपनियों पर यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी क्या जिम्मेदारियां लागू होती हैं। इसके अलावा अदालत पक्षों के जवाब के आधार पर यह विचार कर सकती है कि महिला यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की जरूरत है या नहीं।
विशेष रूप से रात के समय यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए ऐप आधारित टैक्सी सेवाएं एक महत्वपूर्ण विकल्प बन चुकी हैं। ऐसे में यात्रियों को यह भरोसा होना जरूरी है कि यात्रा के दौरान किसी आपात स्थिति में उन्हें तत्काल सहायता मिल सकेगी। वहीं ड्राइवर की पहचान और यात्रा की जानकारी जैसी व्यवस्थाओं का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल होना भी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
हाई कोर्ट ने फिलहाल केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, Uber, Ola और Rapido से जवाब मांगा है। किसी भी पक्ष के खिलाफ अभी कोई अंतिम आदेश या जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब दाखिल करने के बाद स्पष्ट होगी।
अब 16 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई अहम होगी। इस दौरान अदालत के सामने सरकारी पक्ष के साथ निजी राइड-हेलिंग कंपनियों का जवाब भी मौजूद होगा। इसके आधार पर हाई कोर्ट यह तय करेगा कि महिला यात्रियों की सुरक्षा और निजी टैक्सी ऐप ऑपरेटरों की जवाबदेही को लेकर आगे किसी तरह के निर्देश जारी करने की जरूरत है या नहीं।
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