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Newspapers में छिपाकर भेजी जाती थी नकदी, एसवाई कुरैशी ने चुनावी हथकंडों पर किया खुलासा

New Delhi नई दिल्ली : पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एसवाई कुरैशी ने चुनावों में धनबल के इस्तेमाल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में जब उन्होंने चुनाव आयोग की कमान संभाली थी, तब चुनावों में पैसे के प्रभाव को रोकना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल था। कुरैशी ने बताया कि चुनाव आयोग ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए धन के इस्तेमाल के करीब 40 अलग-अलग तरीकों की पहचान की थी और इसके खिलाफ प्रभावी निगरानी व्यवस्था तैयार की गई थी।
एक विशेष साक्षात्कार में एसवाई कुरैशी ने कहा कि चुनावों के दौरान मतदाताओं तक नकदी पहुंचाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए जाते थे। इनमें घर-घर जाकर पैसे पहुंचाना, अखबारों के जरिए नकदी भेजना, सोने की चेन देना और शादी या जन्मदिन की पार्टियों की आड़ में मतदाताओं को प्रभावित करने जैसे तरीके शामिल थे।
उन्होंने बताया कि 2010 में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभालने के बाद उन्होंने दो बड़ी चुनौतियों को प्राथमिकता दी थी। इनमें पहली चुनौती शिक्षित शहरी मतदाताओं की मतदान के प्रति कम रुचि और दूसरी चुनावों में बढ़ते धनबल का प्रभाव था।
कुरैशी ने कहा कि धनबल पर लगाम लगाने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष कदम उठाए। इसके तहत आयोग में दो अलग-अलग प्रभाग बनाए गए। पहला मतदाता जागरूकता बढ़ाने के लिए बनाया गया, जबकि दूसरा चुनावी खर्च की निगरानी के लिए गठित किया गया।
उन्होंने बताया कि चुनावी खर्च पर नजर रखने के लिए "व्यय निगरानी प्रभाग" बनाया गया था। इसके लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) में कार्यरत आयकर सेवा के एक अधिकारी को महानिदेशक नियुक्त किया गया। इस प्रभाग ने चुनाव खर्च से जुड़े नियम और दिशानिर्देश तैयार किए तथा राजनीतिक दलों को भी इसकी जानकारी दी गई।
पूर्व सीईसी ने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और गलतियों को रोकना भी था। इसके लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे चुनावी नियमों का सही तरीके से पालन कर सकें।
उन्होंने कहा कि निगरानी व्यवस्था मजबूत होने के बाद चुनाव आयोग को शुरुआती दौर में बड़ी सफलता मिली। चुनावों के दौरान मतदाताओं में बांटने के लिए ले जाई जा रही बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की गई। शुरुआत में करोड़ों रुपये की जब्ती हुई, जबकि बाद के चुनावों में यह आंकड़ा सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
कुरैशी ने अपनी पुस्तक "एन अनडॉक्यूमेंटेड वंडर: द मेकिंग ऑफ द ग्रेट इंडियन इलेक्शन" का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने धनबल के दुरुपयोग के 40 अलग-अलग तरीकों की पहचान की थी। उन्होंने कहा कि समय के साथ चुनावों में पैसे के इस्तेमाल के नए तरीके भी सामने आए होंगे, इसलिए इस चुनौती पर लगातार निगरानी और सुधार की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि चुनावों में धनबल की समस्या को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है, लेकिन मजबूत निगरानी व्यवस्था और जागरूकता के जरिए इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।





