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कैबिनेट के बड़े फैसले, ₹2.19 लाख करोड़ के पैकेज को मंजूरी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक में देश की अर्थव्यवस्था, विनिर्माण क्षेत्र और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, मोबाइल फोन उत्पादन, उर्वरक और रेलवे समेत कई क्षेत्रों से जुड़े सात बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी।
सरकार की ओर से बताया गया कि इन फैसलों के तहत कुल करीब 2,19,353 करोड़ रुपये के निवेश और खर्च का प्रावधान किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मजबूत करना, आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
बैठक के बाद आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्रियों ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। इसमें सबसे प्रमुख फैसलों में Semicon 2.0, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम और यूरिया से जुड़ी राष्ट्रीय निवेश नीति शामिल हैं।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर निर्माण को गति देने के लिए Semicon 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत में चिप निर्माण की क्षमता को बढ़ाना और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
आज के दौर में इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम और रक्षा क्षेत्र में सेमीकंडक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया भर में चिप की मांग बढ़ रही है और भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
सरकार का मानना है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश बढ़ने से देश में नई कंपनियां आएंगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत तकनीकी रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।
मोबाइल फोन निर्माण को नई गति
कैबिनेट ने मोबाइल फोन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को भी मंजूरी दी है।
भारत पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। सरकार की नीतियों के कारण देश में कई बड़ी कंपनियों ने उत्पादन इकाइयां स्थापित की हैं।
नई योजना का उद्देश्य मोबाइल निर्माण को और विस्तार देना, निर्यात बढ़ाना और घरेलू कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है।
उर्वरक क्षेत्र के लिए अहम फैसला
कैबिनेट ने यूरिया से जुड़ी राष्ट्रीय निवेश नीति को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देश में उर्वरक उत्पादन क्षमता बढ़ाना और किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना है।
सरकार लंबे समय से उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे परियोजनाओं पर जोर
कैबिनेट के फैसलों में इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि बेहतर परिवहन व्यवस्था देश के आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।
रेलवे परियोजनाओं के विस्तार से यातायात व्यवस्था मजबूत होगी और माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी। इससे उद्योगों और व्यापार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
रोजगार और निवेश बढ़ाने की कोशिश
केंद्र सरकार के इन फैसलों को देश में निवेश और रोजगार बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना और भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनाना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से भारत की तकनीकी क्षमता में सुधार होगा। साथ ही, इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नए अवसर मिल सकते हैं।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती
केंद्र सरकार लगातार आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों को इस अभियान का प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है।
कैबिनेट के ताजा फैसलों से सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहेगा।
कुल मिलाकर, बुधवार को लिए गए ये सात फैसले भारत के विनिर्माण क्षेत्र, तकनीकी विकास और आर्थिक विस्तार को गति देने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन योजनाओं के जरिए निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में उभरेगा।





