- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- रबी फसलों के MSP में...
दिल्ली-एनसीआर
रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी कैबिनेट ने नई दरों को दी मंजूरी
Ratna Netam
30 Sept 2026 8:14 PM IST

x
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए सभी छह अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड-सरसों और कुसुम के लिए नई MSP दरें तय की गईं। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है।
नई दरों के मुताबिक गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इससे पहले 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं का MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल था। उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है और सरकार के अनुसार नई MSP दर इस लागत से करीब 106 प्रतिशत अधिक है।
जौ के MSP में 136 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। अब इसका समर्थन मूल्य 2,150 रुपये से बढ़कर 2,286 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। जौ की अनुमानित उत्पादन लागत 1,447 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है और नई MSP दर लागत से करीब 58 प्रतिशत अधिक है। सरकार कम पानी वाली और जलवायु के अनुकूल फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति में जौ को भी महत्वपूर्ण मान रही है।
चना किसानों के लिए MSP में 83 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। चने का नया न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,958 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ है, जो पिछले सीजन में 5,875 रुपये था। दालों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की नीति के तहत सरकार चना और मसूर जैसी फसलों के उत्पादन विस्तार पर जोर दे रही है।
मसूर के MSP में इस बार 390 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद मसूर का समर्थन मूल्य 7,000 रुपये से बढ़कर 7,390 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। सरकार के अनुसार मसूर पर किसानों को उत्पादन लागत से करीब 92 प्रतिशत अधिक मार्जिन मिलने का अनुमान है।
रेपसीड और सरसों के MSP में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इसका समर्थन मूल्य 413 रुपये बढ़ाकर 6,613 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। पिछले मार्केटिंग सीजन में यह 6,200 रुपये प्रति क्विंटल था। तेलहन उत्पादन बढ़ाने और खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में सरकार सरसों और अन्य ऑयलसीड फसलों को महत्वपूर्ण मान रही है। नई MSP दर उत्पादन लागत से करीब 96 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम के MSP में की गई है। कुसुम का समर्थन मूल्य 675 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 7,215 रुपये कर दिया गया है। इससे पहले इसका MSP 6,540 रुपये प्रति क्विंटल था। सरकार के मुताबिक कुसुम कम सिंचाई वाले और अपेक्षाकृत कम उपजाऊ क्षेत्रों में भी उगाई जा सकती है, इसलिए ज्यादा MSP के जरिए इसके उत्पादन को प्रोत्साहित करने की कोशिश की गई है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फैसले को किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि MSP तय करते समय यह सुनिश्चित किया गया है कि किसानों को उत्पादन की औसत लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का मार्जिन मिले। सरकार के मुताबिक छह रबी फसलों पर लागत से ऊपर मिलने वाला अनुमानित रिटर्न करीब 50 से 106 प्रतिशत के बीच है। गेहूं पर सबसे अधिक 106 प्रतिशत, रेपसीड-सरसों पर करीब 96 प्रतिशत और मसूर पर लगभग 92 प्रतिशत मार्जिन का अनुमान है।
नई MSP दरें केंद्र की उस नीति के अनुरूप हैं, जिसमें रबी और खरीफ की अनिवार्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना स्तर पर तय करने की बात कही गई है। सरकार उत्पादन लागत की गणना में बीज, खाद, मजदूरी, मशीनरी, सिंचाई और परिवार के श्रम जैसे विभिन्न खर्चों को ध्यान में रखती है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने पर भी ध्यान दे रही है। उन्होंने दाल और तिलहन उत्पादन बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से किसानों के लिए बाजार के अवसर बढ़ सकते हैं और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
कृषि मंत्रालय रबी सीजन के लिए राज्यों के साथ मिलकर अलग-अलग योजनाओं पर भी काम कर रहा है। हाल में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में राज्यों को मिट्टी में नमी, पानी की उपलब्धता, बीज, खाद और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर फसल योजना तैयार करने को कहा गया था। सरकार ने विशेष रूप से धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन पर दलहन की खेती बढ़ाने की रणनीति पर भी जोर दिया है।
MSP वह न्यूनतम मूल्य है जिस पर सरकार निर्धारित व्यवस्था के तहत किसानों से संबंधित फसल की खरीद कर सकती है। हालांकि किसी किसान को मिलने वाली वास्तविक कीमत बाजार की स्थिति, सरकारी खरीद की उपलब्धता, गुणवत्ता मानक और स्थानीय मांग समेत कई कारकों पर निर्भर करती है।
रबी सीजन में गेहूं देश की सबसे प्रमुख फसलों में शामिल है, जबकि चना और मसूर दाल उत्पादन तथा सरसों और कुसुम खाद्य तेल के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इस बार अलग-अलग फसलों में MSP बढ़ोतरी का स्तर काफी अलग रखा गया है। गेहूं में केवल 25 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुसुम में 675 रुपये और सरसों में 413 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
सरकार का कहना है कि अलग-अलग फसलों में लागत, मांग, उत्पादन, आयात और फसल विविधीकरण जैसे कारकों को ध्यान में रखकर दरों में बदलाव किया गया है। अब नई MSP दरें 2027-28 के रबी मार्केटिंग सीजन में लागू होंगी और किसानों की नजर सरकारी खरीद व्यवस्था तथा राज्यों में बनने वाले खरीद केंद्रों पर रहेगी।
Next Story





