- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- ब्रिक्स संसदीय मंच पर...
दिल्ली-एनसीआर
ब्रिक्स संसदीय मंच पर लोकतंत्र को मजबूत बनाने पर मंथन
Ratna Netam
26 Oct 2026 9:07 PM IST

x
नई दिल्ली : 26 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में संसदीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने, लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने और सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। असम भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और सांसद दिलीप सैकिया ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ब्रिक्स संसदीय मंच विभिन्न देशों को संसदीय लोकतंत्र की मजबूती और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण के उपायों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करता है।नई दिल्ली के ऐतिहासिक संविधान सदन में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य विषय 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना' रखा गया है। इसका उद्देश्य संसदीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के तरीकों पर चर्चा करना है।
संसदीय लोकतंत्र की मजबूती पर विशेष जोर
दिलीप सैकिया ने ब्रिक्स संसदीय मंच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक संवाद और संसदीय सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके बयान के अनुसार, इस तरह के आयोजन विभिन्न देशों को अपने अनुभव साझा करने और संसदीय व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार करने का मंच उपलब्ध कराते हैं।सम्मेलन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रियाओं और नागरिकों के प्रति जवाबदेही जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए हैं।संसदीय संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए पारदर्शिता, संवाद और आपसी सहयोग को आवश्यक बताया गया। साथ ही, विभिन्न देशों की संसदीय परंपराओं से सीखने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया उद्घाटन
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने सदस्य देशों से वैश्विक शांति, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने का आह्वान किया।बिरला ने कहा कि संसदें केवल कानून बनाने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि वे नागरिकों की आकांक्षाओं को समझने और उनकी समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।उन्होंने संसदीय संस्थाओं में संवाद, सहमति, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, विभिन्न देशों की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता आपसी सहयोग में बाधा बनने के बजाय साझा प्रगति का आधार बन सकती है।
चार प्रमुख विषयों पर हो रहा विचार-विमर्श
ब्रिक्स संसदीय मंच में चार प्रमुख विषयों पर चर्चा निर्धारित की गई है। इनमें संस्थागत मजबूती, नवाचार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सतत विकास शामिल हैं।पहले विषय के अंतर्गत संसदों की कार्यक्षमता और संस्थागत स्थिरता बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। दूसरे विषय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों के उपयोग से जुड़ी चुनौतियों तथा अवसरों पर विचार किया जा रहा है।तीसरे विषय में वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने के लिए संसदीय सहयोग पर जोर दिया गया है। चौथे विषय के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास में संसदों की भूमिका पर चर्चा की जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी प्रतिनिधियों से की मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेने आए सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात की।इस आयोजन में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी निर्धारित की गई है। सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद के माध्यम से संसदीय सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।इसके अलावा विभिन्न देशों की अंतरराष्ट्रीय मामलों से संबंधित संसदीय समितियों के अध्यक्षों की विशेष बैठक भी कार्यक्रम का हिस्सा है।
वैश्विक चुनौतियों के समाधान में संसदों की भूमिका
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अस्थिरता, तकनीकी बदलाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वैश्विक समस्याओं का समाधान केवल सरकारों के स्तर पर नहीं, बल्कि संसदीय संवाद और सहयोग के माध्यम से भी खोजा जाना चाहिए।उन्होंने विशेष रूप से विकासशील देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई। ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ के हितों को सामने रखने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।
लोकतांत्रिक मूल्यों और सहयोग को मिलेगी नई दिशा
असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया की टिप्पणी ने संसदीय लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया है। इस सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न देशों के सांसदों और प्रतिनिधियों को संसदीय व्यवस्थाओं से जुड़े अनुभव साझा करने का अवसर मिल रहा है।दो दिवसीय ब्रिक्स संसदीय मंच का समापन 27 अक्टूबर को निर्धारित है। सम्मेलन से सदस्य देशों के बीच संसदीय सहयोग, लोकतांत्रिक संवाद और साझा विकास के मुद्दों पर आगे की बातचीत को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।इस समाचार के लिए संदर्भ: भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की 26 अक्टूबर 2026 की आधिकारिक विज्ञप्ति। दिलीप सैकिया की टिप्पणी का स्वतंत्र मूल बयान उपलब्ध स्रोतों में सत्यापित नहीं हो सका है।
Next Story





