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24 सितंबर से लापता बाउंसर अजय डेढ़ा का शव नाले से मिला, चाकू के निशान से हत्या की आशंका

नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के चिल्ला गांव से 24 सितंबर से लापता चल रहे एक बाउंसर का शव पटपड़गंज औद्योगिक थाना क्षेत्र में स्थित एक नाले से बरामद होने के बाद सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान अजय डेढ़ा के रूप में हुई है। शव मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृतक के शरीर की जांच की, जिसमें चाकू से वार किए जाने जैसे निशान मिले हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस हत्या की आशंका से भी मामले की जांच कर रही है।
बताया जा रहा है कि अजय डेढ़ा 24 सितंबर से चिल्ला गांव क्षेत्र से लापता थे। परिजनों और परिचितों की ओर से उनकी तलाश की जा रही थी। काफी खोजबीन के बाद भी जब उनका कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और संभावित स्थानों पर उनकी तलाश की जा रही थी।
इसी बीच पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र थाना क्षेत्र में एक नाले से शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नाले से शव को बाहर निकलवाया। शुरुआती जांच में शव की पहचान अजय डेढ़ा के रूप में की गई। पहचान होने के बाद पुलिस ने उनके परिवार को इसकी जानकारी दी।
शव मिलने की सूचना से परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने अजय के लापता होने के बाद उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगा रखी थी। शव मिलने के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल उनकी मौत की वजह को लेकर खड़ा हो गया है। परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।
पुलिस के अनुसार मृतक के शरीर पर चाकू के निशान पाए गए हैं। हालांकि इन निशानों की प्रकृति और मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस अभी इस स्तर पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि अजय को नाले तक कैसे लाया गया और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।
शव को पुलिस ने कब्जे में लेकर लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। यहां पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चोटों की प्रकृति, मौत का कारण और घटनाक्रम से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। यदि रिपोर्ट में चाकू के वार से मौत की पुष्टि होती है तो पुलिस हत्या की दिशा में अपनी जांच और तेज कर सकती है।
अजय डेढ़ा के लापता होने के बाद से ही पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी। अब शव मिलने के बाद जांच का फोकस इस बात पर है कि लापता होने के समय वह कहां थे, किन लोगों से मिले थे और आखिरी बार उन्हें किसने देखा था। पुलिस उनके मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और अन्य संपर्कों की जानकारी भी खंगाल सकती है।
पुलिस आसपास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांच सकती है। पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र में कई औद्योगिक इकाइयां और सड़कें होने के कारण अलग-अलग स्थानों पर कैमरे लगे होने की संभावना रहती है। लापता होने से लेकर शव मिलने तक की समयावधि की गतिविधियों का पता लगाने में सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण हो सकती है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि अजय डेढ़ा की किसी से पुरानी रंजिश थी या नहीं। उनके निजी और पेशेवर संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। वह बाउंसर के तौर पर काम करते थे, इसलिए पुलिस उनके काम से जुड़े लोगों, मित्रों और हाल के दिनों में उनके साथ संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ कर सकती है।
घटना स्थल से पुलिस ने संभावित साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जिस स्थान पर शव मिला, वहां आसपास की जमीन, नाले के किनारे और आने-जाने वाले रास्तों की जांच की जा सकती है। यदि कोई चाकू, कपड़ा, मोबाइल या अन्य वस्तु मिलती है तो उसे कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा सकता है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि शव नाले में कितने समय से पड़ा था। इससे मौत के संभावित समय का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच के परिणाम मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम होंगे।
अजय के अचानक लापता होने और कुछ दिनों बाद शव मिलने के बीच की अवधि भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर सकती है कि 24 सितंबर के बाद उनके मोबाइल की लोकेशन कहां-कहां रही और उनका संपर्क किन लोगों से हुआ। यदि किसी संदिग्ध गतिविधि के संकेत मिलते हैं तो संबंधित लोगों से पूछताछ की जा सकती है।
परिजनों के बयानों को भी जांच में शामिल किया जाएगा। पुलिस यह समझने की कोशिश करेगी कि अजय के व्यवहार या दिनचर्या में लापता होने से पहले कोई बदलाव आया था या नहीं। क्या उन्हें किसी तरह की धमकी मिली थी या किसी व्यक्ति के साथ विवाद चल रहा था, इन पहलुओं की भी जांच हो सकती है।
शव मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच तेज कर दी है। अभी हत्या की आशंका व्यक्त की जा रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमॉर्टम और जांच के निष्कर्षों के बाद ही होगी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शरीर पर मिले निशान किस वजह से आए और क्या उनकी मौत किसी आपराधिक घटना का परिणाम है।
इलाके में शव मिलने की खबर के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा का माहौल है। नाले जैसे सुनसान स्थान से शव बरामद होने के कारण लोग घटना को लेकर कई तरह की आशंकाएं जता रहे हैं। हालांकि पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और जांच के निष्कर्ष का इंतजार करने की अपील की है।
फिलहाल पुलिस ने शव को सुरक्षित रखकर पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी। इसके साथ ही पुलिस लापता होने से लेकर शव मिलने तक के पूरे घटनाक्रम को जोड़ने में जुटी है।
अजय डेढ़ा के परिवार के लिए यह घटना बेहद दुखद है। 24 सितंबर से बेटे और परिजन की तलाश कर रहे परिवार को अब उनका शव मिला है। लेकिन अंतिम सवाल अभी भी अनसुलझा है कि उनकी मौत कैसे हुई और उन्हें नाले तक कौन लेकर गया। पुलिस की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है। शरीर पर मिले चाकू के निशान हत्या की आशंका जरूर पैदा कर रहे हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। पुलिस संभावित आरोपियों की पहचान, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।





