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SIR विवाद पर बीजेपी का हमला राहुल गांधी से पूछे सवाल
Ratna Netam
8 Oct 2026 5:50 PM IST

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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में जारी राजनीतिक विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि जब SIR से जुड़े मामले सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष हैं, तो कांग्रेस को न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा क्यों नहीं है। भंडारी ने इस राजनीतिक टकराव को गांधी-वाड्रा परिवार और देश की जनता के बीच की लड़ाई बताया।
प्रदीप भंडारी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन के सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुई हैं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में विपक्षी दलों को अपनी आपत्तियां न्यायिक मंच पर रखनी चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी से सवाल करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रही है। भंडारी के अनुसार, चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर लगातार प्रदर्शन करना न्यायिक प्रक्रिया की जगह राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है।इससे पहले 6 अक्टूबर को भी प्रदीप भंडारी ने SIR के खिलाफ विपक्ष के मार्च पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो क्या विरोध प्रदर्शन के माध्यम से चुनाव आयोग पर दबाव डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कांग्रेस पर संवैधानिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया था।
हालांकि, ये बीजेपी प्रवक्ता के राजनीतिक आरोप हैं। सर्वोच्च न्यायालय में किसी मामले के विचाराधीन होने से संबंधित विषय पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार अपने आप समाप्त नहीं होता। प्रदर्शन की अनुमति, स्थान और कानून-व्यवस्था से संबंधित नियम अलग विषय हैं।प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए इसे गांधी-वाड्रा परिवार और भारत की जनता के बीच का राजनीतिक संघर्ष बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मतदाता सूची में सुधार के मुद्दे को राजनीतिक विवाद बनाकर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है।
दूसरी ओर, कांग्रेस और INDIA गठबंधन का कहना है कि उनका आंदोलन चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा हुआ है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने में कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।इसी विवाद को लेकर मंगलवार, 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग पहुंचना चाहते थे। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया था।
इसके अगले दिन बुधवार, 7 अक्टूबर को भी विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य सांसद जंतर-मंतर की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में भी लिया गया। विपक्ष ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का मुद्दा उठाया।गुरुवार को लगातार तीसरे दिन INDIA गठबंधन के नेताओं ने महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी सहित गठबंधन के अन्य नेताओं ने राजघाट पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखने का निर्णय लिया।
विपक्षी सांसद कनॉट प्लेस में आयोजित बैठक के बाद राजघाट की ओर रवाना हुए। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, उनका उद्देश्य महात्मा गांधी के स्मारक पर शांतिपूर्ण धरना और प्रार्थना के माध्यम से विरोध दर्ज कराना था।हालांकि, दिल्ली पुलिस ने राजघाट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए और बिना अनुमति लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई। इसके बाद विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच एक बार फिर गतिरोध की स्थिति बनी।
इस पूरे विवाद के बीच बीजेपी और कांग्रेस की ओर से एक-दूसरे पर राजनीतिक आरोप लगाए जा रहे हैं। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर भ्रम पैदा कर रही है। वहीं, कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।चुनाव आयोग और बीजेपी ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी तथा राजनीतिक पक्षपात से जुड़े विपक्ष के आरोपों का खंडन किया है। दूसरी ओर, विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं।SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों का सत्यापन और उन्हें अद्यतन करना है। इसके अंतर्गत मतदाता विवरण की जांच, पात्र नागरिकों के नाम शामिल करने तथा नियमों के अनुसार अपात्र या दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाने जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की आवश्यकता, नाम हटाए जाने की प्रक्रिया और शिकायतों के निपटारे को लेकर विवाद सामने आए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न हो।बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इन्हीं मुद्दों पर कांग्रेस के रुख को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब विवादों के समाधान के लिए न्यायिक प्रक्रिया उपलब्ध है, तब कांग्रेस का लगातार सड़क पर प्रदर्शन करना उसकी राजनीतिक रणनीति पर सवाल खड़े करता है।वहीं, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही तय करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना आवश्यक है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर उसका विरोध जारी रहेगा।
फिलहाल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर राजनीतिक टकराव बना हुआ है। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाने का आरोप लगाया है, जबकि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है।गुरुवार को प्रदीप भंडारी के बयान और लगातार तीसरे दिन हुए विपक्षी प्रदर्शन ने SIR विवाद को फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में न्यायिक कार्यवाही, चुनाव आयोग के निर्णय और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया से इस विवाद की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।
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