दिल्ली-एनसीआर

विदेशी अंशदान पाने वाले NGO के लिए सरकार का बड़ा आदेश

Ashish verma
27 May 2025 11:19 PM IST
विदेशी अंशदान पाने वाले NGO के लिए सरकार का बड़ा आदेश
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विदेशी अंशदान पाने वाले NGO

New Delhi.नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रकाशन गतिविधियों में लगे और विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) कोई समाचार पत्र प्रकाशित नहीं कर सकेंगे और उन्हें भारत के समाचार पत्र रजिस्ट्रार से यह प्रमाण पत्र लेना होगा कि वे कोई समाचार सामग्री प्रकाशित नहीं करते हैं। केंद्र ने कहा कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकरण चाहने वाले एनजीओ को नए नियमों का पालन करना होगा। एनजीओ एफएटीएफ के दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि उसने एफसीआरए के तहत बनाए गए नियमों में संशोधन किया है और अब से विदेशी धन प्राप्त करने की अनुमति चाहने वाले एनजीओ को यह हलफनामा देना होगा कि वे वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के अच्छे आचरण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। एफएटीएफ आतंकवाद के वित्तपोषण और धन शोधन पर एक वैश्विक निगरानी निकाय है।

पंजीकरण चाहने वाले एनजीओ को क्या करना होगा गृह मंत्रालय ने कहा कि पंजीकरण चाहने वाले ऐसे निकायों या एनजीओ को पिछले तीन वित्तीय वर्षों के वित्तीय विवरण और ऑडिट रिपोर्ट संलग्न करनी होंगी, जिसमें परिसंपत्तियों और देनदारियों, प्राप्तियों और भुगतान खाते और आय-व्यय खाते का विवरण शामिल होगा। यदि ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय विवरणों में पिछले तीन वित्तीय वर्षों का गतिविधि-वार व्यय शामिल नहीं है, तो एनजीओ द्वारा गतिविधि-वार व्यय की गई राशि को दर्शाने वाला चार्टर्ड अकाउंटेंट का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसका आय-व्यय खाते और प्राप्तियों एवं भुगतान खाते से विधिवत मिलान किया गया हो। यदि एसोसिएशन या एनजीओ प्रकाशन गतिविधियों में शामिल है या प्रकाशन गतिविधियां इसके उद्देश्यों में शामिल हैं, जैसा कि एसोसिएशन के 'मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन' या ट्रस्ट डीड में कहा गया है, तो मुख्य पदाधिकारी को एफसीआरए-2010 के अनुपालन के संबंध में एक हलफनामा देना होगा।

गृह मंत्रालय ने कहा कि यदि एसोसिएशन का प्रकाशन रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स ऑफ इंडिया के पास पंजीकृत है, तो उसे रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स ऑफ इंडिया से 'समाचार-पत्र नहीं' होने के संबंध में एक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। यदि एनजीओ पहले एफसीआरए के तहत पंजीकृत था, तो उसे पंजीकरण प्रमाण-पत्र की समाप्ति या रद्द होने के बाद विदेशी अंशदान की प्राप्ति और उपयोग के संबंध में एक हलफनामा प्रस्तुत करना होगा। इसमें कहा गया है कि यदि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में लक्ष्यों और उद्देश्यों पर व्यय 15 लाख रुपये से कम है, तो पूंजी निवेश को शामिल करने के संबंध में हलफनामा प्रस्तुत किया जाना चाहिए।सरकार ने क्या शर्तें रखीं?सरकार ने शर्त रखी है कि विदेशी अंशदान प्राप्त करने की अनुमति मांगने वाले एनजीओ को दानकर्ता से प्रतिबद्धता पत्र संलग्न करना होगा, जिसमें पत्र में दी गई प्रतिबद्धता राशि दान की राशि से मेल खानी चाहिए।विदेशी अंशदान से प्रस्तावित व्यय का विवरण देते हुए एक परियोजना रिपोर्ट का भी उल्लेख करना होगा और यह घोषणा करनी होगी कि प्रशासनिक व्यय विदेशी अंशदान के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। विदेशी धन प्राप्त करने वाले सभी एनजीओ को अनिवार्य रूप से एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराना होगा और ऐसे धन का उपयोग केवल उन्हीं उद्देश्यों के लिए करना होगा, जिसके लिए इसे प्राप्त किया गया है।सरकार ने कहा है कि विदेशी अंशदान प्राप्त करने के इच्छुक किसी भी संगठन का एक निश्चित सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षणिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम होना चाहिए। संगठन को केंद्र से अनुमति या पंजीकरण प्राप्त किए बिना किसी भी विदेशी अंशदान को प्राप्त या उपयोग नहीं करना चाहिए।


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