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भारत के रक्षा उद्योग की बड़ी उपलब्धि यूरोप में बढ़ी हथियारों की मांग
Ratna Netam
23 Oct 2026 5:17 PM IST

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नई दिल्ली। वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत यूरोप को रक्षा उपकरण और हथियार निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया है। उनके अनुसार, भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है। उन्होंने इसके पीछे यूरोपीय देशों में रक्षा उपकरणों की बढ़ती मांग और भारत की घरेलू विनिर्माण क्षमता में हो रहे विस्तार को महत्वपूर्ण कारण बताया।हालांकि, यूरोप को रक्षा निर्यात करने वाले देशों की इस तीसरे स्थान की रैंकिंग की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। रक्षा सचिव के बयान को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
यूरोप में बढ़ती हथियारों की मांग से भारत को अवसर
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि यूरोपीय देशों में रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। विशेष रूप से 'रीआर्म यूरोप' पहल के तहत हथियारों, गोला-बारूद और अन्य रक्षा उपकरणों की मांग में बढ़ोतरी हो रही है।इस पहल का उद्देश्य यूरोपीय देशों की रक्षा तैयारियों को बेहतर बनाना और सैन्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना है।भारत के लिए यह स्थिति रक्षा निर्यात और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर पैदा कर रही है। यूरोपीय देशों को अपनी आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की जरूरत है और भारतीय कंपनियां इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी भारत और यूरोपीय संघ के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दे चुके हैं।
सरकारी कंपनियों के साथ निजी क्षेत्र की बढ़ रही भागीदारी
रक्षा सचिव ने कहा कि भारत अपने रक्षा औद्योगिक आधार का विस्तार करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।पहले रक्षा विनिर्माण मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की लगभग 16 कंपनियों पर केंद्रित था। अब सरकार निजी कंपनियों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप को भी इस व्यवस्था में शामिल करने का प्रयास कर रही है।इस बदलाव का उद्देश्य देश में रक्षा उत्पादन की क्षमता बढ़ाना, नई तकनीकों को विकसित करना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग को पूरा करना है।उन्होंने कहा कि व्यापक औद्योगिक आधार विकसित होने से भारत को अधिक उत्पादन करने के साथ विभिन्न प्रकार के रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करने में मदद मिलेगी।
रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
भारत के रक्षा निर्यात में पिछले वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। वहीं, वित्त वर्ष 2013-14 में यह आंकड़ा मात्र 686 करोड़ रुपये थाइस तरह लगभग 12 वर्षों में रक्षा निर्यात में 55 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई।रक्षा सचिव ने जुलाई 2026 में बताया था कि भारत की करीब 145 कंपनियां विभिन्न देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रही हैं। इनमें बुलेटप्रूफ जैकेट, बैलिस्टिक हेलमेट, गोला-बारूद और उन्नत मिसाइल प्रणालियां शामिल हैं।
छोटे उद्योगों और स्टार्टअप को मिल रहे नए अवसर
भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में छोटे उद्योगों और स्टार्टअप की भागीदारी बढ़ने से नई तकनीकों के विकास को गति मिलने की संभावना है।रक्षा क्षेत्र में ड्रोन, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, संचार प्रणालियां और आधुनिक युद्ध तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही हैं।रक्षा सचिव ने पहले भी कहा था कि भारत को किसी एक कंपनी पर निर्भर रहने के बजाय कई सक्षम विनिर्माताओं का नेटवर्क विकसित करना होगा।उनके अनुसार, रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन में विविधता बढ़ाना देश की रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण है।
वर्ष 2030 तक 50 हजार करोड़ निर्यात का लक्ष्य
भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने उम्मीद जताई है कि वैश्विक मांग और भारतीय कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता के चलते यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।उन्होंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के रक्षा उपकरणों के प्रति रुचि बढ़ रही है। ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश वायु रक्षा प्रणाली और तोपखाना प्रणालियों जैसे उत्पादों के लिए विभिन्न देशों में अवसर मौजूद हैं।
भारत-यूरोप रक्षा सहयोग को मिलेगी मजबूती
भारत और यूरोपीय संघ के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के प्रयास भी जारी हैं। दोनों पक्ष संयुक्त उत्पादन, तकनीकी सहयोग और रक्षा आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं।रक्षा सचिव ने इस महीने साइप्रस और ग्रीस की यात्रा भी की, जिसमें समुद्री सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग महत्वपूर्ण विषय रहे।यूरोपीय देशों में रक्षा उपकरणों की बढ़ती मांग भारतीय उद्योगों के लिए नए व्यापारिक अवसर खोल सकती है। इससे विदेशी मुद्रा अर्जित करने, रोजगार बढ़ाने और आधुनिक विनिर्माण तकनीक विकसित करने में मदद मिलने की संभावना है।रक्षा सचिव के बयान से स्पष्ट होता है कि भारत अब रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यातक के रूप में अपनी भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
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