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ब्रिक्स विवाद के बाद भारत पर बदले बांग्लादेश के सुर, रिश्ते सुधारने की जताई इच्छा

Kavita2
14 Sept 2026 10:30 AM IST
ब्रिक्स विवाद के बाद भारत पर बदले बांग्लादेश के सुर, रिश्ते सुधारने की जताई इच्छा
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नई दिल्ली : भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दूरी बनाने के बाद बांग्लादेश ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने रविवार को कहा कि ढाका भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से आगे बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि भविष्य के रिश्ते आपसी हितों, समानता और व्यावहारिक सहयोग पर आधारित होने चाहिए। दोनों देशों के बीच लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सीधी द्विपक्षीय बातचीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

हुमायूं कबीर ने विदेश मंत्रालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे और कामकाजी संबंध विकसित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 15 वर्षों के दौरान दोनों देशों के बीच जिस प्रकार के रिश्ते रहे, ढाका अब उससे आगे बढ़कर एक नया अध्याय शुरू करना चाहता है। कबीर ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के संबंधों को असहज बताते हुए कहा कि नई व्यवस्था में संबंधों की दिशा परस्पर हितों से तय होनी चाहिए।

बांग्लादेशी मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने के लिए किसी बहुपक्षीय सम्मेलन के दौरान अनौपचारिक मुलाकात की जगह अलग से द्विपक्षीय यात्रा ज्यादा उचित होगी। उन्होंने कहा कि जिस देश के साथ बांग्लादेश अपने संबंधों को नए ढंग से स्थापित करना चाहता है, उसके साथ शुरुआती उच्चस्तरीय संपर्क सीधे और औपचारिक रूप से होना चाहिए। इसी कारण प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय कार्यक्रम के बजाय स्वतंत्र द्विपक्षीय दौरे के रूप में होनी चाहिए।

यह बयान बांग्लादेश द्वारा प्रधानमंत्री तारिक रहमान के ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल नहीं होने की घोषणा के कुछ दिनों बाद आया है। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ढाका ने कहा था कि तारिक रहमान को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत क्षमता में निमंत्रण नहीं मिला था। भारत ने उन्हें बंगाल की खाड़ी से जुड़े क्षेत्रीय संगठन बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स आउटरीच सत्र के लिए आमंत्रित किया था। बांग्लादेश ने दोनों प्रकार के आमंत्रण में अंतर बताते हुए रहमान के सम्मेलन में शामिल नहीं होने की जानकारी दी थी।

भारत की ओर से इससे पहले कहा गया था कि तारिक रहमान को द्विपक्षीय भारत दौरे और ब्रिक्स आउटरीच सत्र—दोनों के लिए निमंत्रण दिया गया है। बांग्लादेश ने इस पर कहा कि ब्रिक्स के लिए मिला निमंत्रण उनके प्रधानमंत्री पद के बजाय बिम्सटेक अध्यक्ष की भूमिका से जुड़ा था। इसी वजह से उनके भारत आने की संभावना समाप्त हो गई। ब्रिक्स सम्मेलन में बांग्लादेश की उच्चस्तरीय भागीदारी नहीं हुई।

तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा अगस्त में भी चर्चा में रही थी। उन्हें 22 अगस्त को भारत आना था, लेकिन बाद में दौरा स्थगित कर दिया गया। उस समय बांग्लादेश ने संकेत दिया था कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय यात्रा के लिए उपयुक्त माहौल तैयार होना जरूरी है और जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद ब्रिक्स सम्मेलन को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात के संभावित अवसर के रूप में देखा गया, लेकिन ढाका ने बहुपक्षीय मंच के बजाय द्विपक्षीय बैठक को प्राथमिकता देने का फैसला किया।

भारत और बांग्लादेश के संबंधों में पिछले कुछ समय से कई मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। अगस्त 2024 में युवा आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी और वह भारत आ गई थीं। बांग्लादेश की नई सरकार ने भारत में उनकी मौजूदगी तथा वहां से राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कई बार आपत्ति जताई। अगस्त 2026 में दिल्ली से आयोजित शेख हसीना की एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी ढाका ने नाराजगी जाहिर की थी।

बांग्लादेश का कहना था कि भारत में रहते हुए शेख हसीना की राजनीतिक बयानबाजी दोनों देशों के रिश्ते सामान्य करने की कोशिशों को प्रभावित कर सकती है। दूसरी ओर भारत ने कहा था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन एक निजी मीडिया संस्थान ने किया था और केंद्र सरकार का उससे कोई संबंध नहीं था। यह मामला दोनों देशों के बीच कूटनीतिक असहजता का प्रमुख कारण बना हुआ है।

इसके अलावा सीमा पर होने वाली घटनाएं, नदियों के पानी का बंटवारा, व्यापार, ऊर्जा सहयोग और सुरक्षा संबंधी मुद्दे भी भारत-बांग्लादेश रिश्तों के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। हुमायूं कबीर ने कहा कि सीमा से संबंधित चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय कानून, सीमा प्रोटोकॉल और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के आधार पर कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से उठाया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि बातचीत से विवादों का समाधान निकाला जा सकता है।

बांग्लादेश सरकार भारत के साथ हुए 101 समझौतों और समझौता ज्ञापनों की समीक्षा भी कर रही है। कबीर ने बताया कि इन समझौतों की जांच संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से की जा रही है। हालांकि उन्होंने इस समीक्षा के संभावित परिणामों पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। समझौतों की समीक्षा को ऊर्जा, परिवहन, संपर्क, व्यापार और सुरक्षा सहयोग के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हुमायूं कबीर ने भारत को एक महत्वपूर्ण पड़ोसी बताते हुए यह भी कहा कि बांग्लादेश की विदेश नीति केवल एक देश पर केंद्रित नहीं रह सकती। ढाका अन्य देशों के साथ भी अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर संबंध विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि बेहतर संबंधों के लिए दोनों पक्षों को संतुलित सोच और व्यावहारिक कूटनीति अपनानी होगी।

प्रधानमंत्री तारिक रहमान 21 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क रवाना होने वाले हैं। वह वहां बांग्लादेश की लोकतांत्रिक यात्रा और भविष्य की प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखेंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात की अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल ढाका के ताजा बयान ने संकेत दिया है कि मतभेदों के बावजूद भारत और बांग्लादेश संवाद के रास्ते बंद नहीं करना चाहते। मंत्री के बयान और द्विपक्षीय यात्रा संबंधी रुख की जानकारी दी है।

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