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AI के बढ़ते इस्तेमाल पर अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान

Ratna Netam
8 Oct 2026 6:14 PM IST
AI के बढ़ते इस्तेमाल पर अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान
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नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते महत्व को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि खेती, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एआई का जितना अधिक इस्तेमाल होगा, समाज को उतना ही ज्यादा लाभ मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक को समाज के सभी वर्गों के लिए सुलभ बनाने का निर्देश दिया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आधुनिक तकनीक का लाभ केवल बड़े शहरों, कंपनियों और सीमित वर्गों तक न रहे, बल्कि उन लोगों तक भी पहुंचे जो अब तक तकनीकी सुविधाओं से वंचित रहे हैं।
नई दिल्ली में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को विश्व बैंक की 'विश्व विकास रिपोर्ट 2026 : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वादा' जारी करने के अवसर पर अश्विनी वैष्णव ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि विश्व बैंक के सहयोग से एक विस्तृत अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि समाज के उन वर्गों तक एआई तकनीक का लाभ कैसे पहुंचाया जाए, जिनकी आधुनिक तकनीक तक पहुंच सीमित रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आम लोगों के जीवन में उपयोगी बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब एआई का इस्तेमाल खेती, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में बढ़ेगा, तब इसका वास्तविक लाभ समाज के बड़े हिस्से तक पहुंचेगा। उनके मुताबिक, तकनीक का उद्देश्य केवल नए उपकरण या सॉफ्टवेयर विकसित करना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी किया जाना चाहिए।
अश्विनी वैष्णव ने कहा, "समाज में एआई का जितना ज्यादा इस्तेमाल होगा, चाहे खेती हो, हेल्थकेयर हो या शिक्षा, उतना ही ज्यादा फायदा होगा। विश्व बैंक के साथ मिलकर एक विस्तृत अध्ययन किया गया है कि समाज के उन वर्गों को एआई से कैसे फायदा पहुंचाया जाए जो आम तौर पर तकनीक से दूर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने तकनीक को सबके लिए सुलभ बनाने का निर्देश दिया है।"
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है, जिन्होंने एआई तकनीक को अपनाकर उससे व्यावहारिक लाभ प्राप्त करना शुरू किया है। उनके अनुसार, तकनीक का वास्तविक लाभ उत्पादकता बढ़ाने, लागत कम करने, आय में वृद्धि करने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने से मिलता है।
कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संभावनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एआई आधारित तकनीक किसानों को मौसम से जुड़ी जानकारी, फसलों की निगरानी और कृषि संबंधी निर्णय लेने में मदद कर सकती है। तकनीकी उपकरणों की सहायता से फसलों में संभावित बीमारियों की पहचान और खेती से संबंधित विभिन्न परिस्थितियों का विश्लेषण किया जा सकता है। इससे किसानों को बेहतर जानकारी के आधार पर निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट में भी कृषि क्षेत्र में एआई की उपयोगिता का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एआई तकनीक किसानों को मौसम का अधिक सटीक अनुमान उपलब्ध कराने और कृषि संबंधी निर्णयों में सहायता करने में उपयोगी साबित हो रही है। हालांकि, इन तकनीकों का व्यापक लाभ पहुंचाने के लिए इंटरनेट, बिजली, प्रशिक्षण और स्थानीय जरूरतों के अनुसार तकनीकी समाधान उपलब्ध कराना आवश्यक है।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का महत्व लगातार बढ़ रहा है। एआई आधारित प्रणालियां चिकित्सा जांच से संबंधित जानकारी के विश्लेषण और कुछ बीमारियों की शुरुआती पहचान में डॉक्टरों की सहायता कर सकती हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सीमित है, उपयुक्त तकनीकी समाधान स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं।
हालांकि, चिकित्सा क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल के दौरान मरीजों की निजी जानकारी की सुरक्षा और चिकित्सकीय निर्णयों में मानवीय निगरानी बनाए रखना भी आवश्यक है। एआई को डॉक्टरों की विशेषज्ञता का विकल्प मानने के बजाय उनकी सहायता करने वाले उपकरण के रूप में उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी एआई आधारित तकनीक विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए उपयोगी हो सकती है। इसके माध्यम से पढ़ाई की सामग्री तैयार करने, विद्यार्थियों की अलग-अलग शैक्षणिक जरूरतों को समझने और सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिल सकती है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में भी एआई की सहायता से शिक्षकों द्वारा बेहतर शिक्षण सामग्री तैयार करने का उल्लेख किया गया है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एआई तकनीक के इस्तेमाल के साथ उसके नियमन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक महीने के भीतर एआई के नियमन से संबंधित एक परामर्श पत्र जारी करेगी। इसके माध्यम से तकनीक के सुरक्षित उपयोग, संभावित खतरों और सामाजिक प्रभावों से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न पक्षों के सुझाव लिए जाएंगे।
प्रस्तावित परामर्श पत्र में एआई सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, डीपफेक और तकनीक के संभावित दुरुपयोग जैसे विषयों पर ध्यान दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों का भी ध्यान रखा जा सके।
एआई के बढ़ते उपयोग के साथ गलत सूचना, नकली वीडियो, डिजिटल धोखाधड़ी और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण बन गए हैं। इसी कारण तकनीक के विकास और उसके जिम्मेदार उपयोग के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एआई विकासशील देशों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। हालांकि, तकनीक का लाभ सभी लोगों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और भरोसेमंद संस्थागत व्यवस्थाओं की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि उचित नीतियों के अभाव में एआई मौजूदा असमानताओं को बढ़ा सकता है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए भी एआई नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। तकनीक की मदद से व्यवसाय अपनी कार्यप्रणाली बेहतर बना सकते हैं, लागत घटा सकते हैं और उत्पादकता बढ़ाने के अवसर तलाश सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि एआई का वास्तविक महत्व तभी सामने आएगा, जब इसका लाभ समाज के उन वर्गों तक भी पहुंचेगा, जो अब तक डिजिटल सुविधाओं से दूर रहे हैं।
कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और छोटे व्यवसायों में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ सरकार इसके सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी ध्यान दे रही है। अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत की प्राथमिकता ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें नवाचार के अवसर बढ़ें और आधुनिक तकनीक का लाभ अधिक से अधिक नागरिकों तक पहुंच सके।
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