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जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने का मामला हाई कोर्ट पहुंचा

Ratna Netam
8 Oct 2026 6:05 PM IST
जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने का मामला हाई कोर्ट पहुंचा
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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर दिल्ली में राजनीतिक और कानूनी विवाद बढ़ गया है। भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के विधि प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता रूपेश सिंह भदौरिया ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस पर मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने और इसके बाद विपक्षी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। इस बीच युवा कांग्रेस की याचिका पर शुक्रवार, 9 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है।
अधिवक्ता रूपेश सिंह भदौरिया बातचीत में कहा कि युवा कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए दिल्ली पुलिस से अनुमति मांगी थी। इसके बावजूद संगठन को प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं थी और प्रदर्शन की अनुमति से इनकार करने के बाद कानूनी कार्रवाई की गई।भदौरिया के मुताबिक, युवा कांग्रेस ने 25 सितंबर को दिल्ली पुलिस से संपर्क कर 1 अक्टूबर से 10 अक्टूबर के बीच जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। संगठन ने लगभग 100 से 150 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की योजना बनाई थी। आवेदन में पुलिस के सभी वैध निर्देशों का पालन करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग देने की बात कही गई थी।
हालांकि, युवा कांग्रेस के अनुसार, बार-बार संपर्क करने के बावजूद पुलिस ने समय रहते आवेदन पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया। अंततः 1 अक्टूबर को अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। यह वही तारीख थी, जब संगठन अपने प्रस्तावित कार्यक्रम की शुरुआत करना चाहता था। अनुमति नहीं मिलने के बाद युवा कांग्रेस ने अदालत का रुख किया।युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका संगठन के विधि विभाग के माध्यम से प्रस्तुत की गई। इसमें दिल्ली पुलिस के 1 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया है कि शांतिपूर्ण सभा को नियंत्रित करने की प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल उसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने के लिए नहीं किया जा सकता।
याचिका में तर्क दिया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने या अस्वीकार करने से पहले परिस्थितियों का उचित और अनुपातिक मूल्यांकन नहीं किया। संगठन का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या, शांतिपूर्ण आयोजन की प्रतिबद्धता और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया।युवा कांग्रेस ने अपनी याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 19(1)(ए) और अनुच्छेद 19(1)(बी) का भी उल्लेख किया है। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 19(1)(ए) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(बी) शांतिपूर्ण तथा बिना हथियार सभा करने के अधिकार से जुड़ा है।संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में किसी भी प्रतिबंध के लिए वैध और उचित आधार होना आवश्यक है। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के उन न्यायिक सिद्धांतों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें शांतिपूर्ण सभा और उस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों की अनुपातिकता पर विचार किया गया है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन से पहले संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेना आवश्यक है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को लेकर जारी दिशा-निर्देशों में कम से कम दस दिन पहले आवेदन देने और प्रतिभागियों की संख्या से संबंधित शर्तों का उल्लेख किया गया है।पुलिस का पक्ष है कि सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन की अनुमति से संबंधित निर्णय लिए जाते हैं। हालांकि, युवा कांग्रेस ने अपने मामले में अनुमति अस्वीकार करने के आधार और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
इसी बीच दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। इसके बाद बुधवार, 7 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में लिया था। गुरुवार को भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों के प्रदर्शन जारी रहे।
प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की है। रिपोर्ट के अनुसार, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में प्रतिबंधात्मक आदेशों के कथित उल्लंघन को लेकर तीन एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें से दो मामले संसद मार्ग थाने और एक मामला कनॉट प्लेस थाने में दर्ज हुआ था।इन्हीं घटनाओं को लेकर रूपेश सिंह भदौरिया ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पहले विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया गया और इसके बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। उन्होंने दोनों घटनाओं के बीच संबंध होने का दावा किया।
हालांकि, पुलिस और किसी अन्य पक्ष के बीच सांठगांठ होने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह युवा कांग्रेस नेता का आरोप है, जिस पर अदालत का कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।युवा कांग्रेस का कहना है कि संगठन शांतिपूर्ण तरीके से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना चाहता था। इस संबंध में उसने पुलिस को प्रस्तावित कार्यक्रम और प्रतिभागियों की संख्या की जानकारी पहले ही उपलब्ध करा दी थी।उधर, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर जारी राजनीतिक विवाद में चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के चुनावी अनियमितताओं तथा राजनीतिक पक्षपात से जुड़े आरोपों का खंडन किया है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण होगी। अदालत के सामने मुख्य प्रश्न यह है कि युवा कांग्रेस के प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन के आवेदन पर दिल्ली पुलिस का निर्णय कानून और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप था या नहीं।सुनवाई के दौरान अदालत पुलिस के आदेश, युवा कांग्रेस की याचिका और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार कर सकती है। हालांकि, अदालत क्या आदेश देगी, इस बारे में फिलहाल कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इस मामले ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पुलिस की जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर बहस बढ़ा दी है। एक ओर युवा कांग्रेस प्रदर्शन की अनुमति न मिलने को अपने संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय बता रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस सार्वजनिक सुरक्षा और निर्धारित नियमों के पालन पर जोर दे रही है।फिलहाल सभी की निगाहें शुक्रवार, 9 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई पर हैं। इस दौरान अदालत के समक्ष युवा कांग्रेस की आपत्तियां और दिल्ली पुलिस के निर्णय से जुड़े कानूनी पहलू रखे जाएंगे। रूपेश सिंह भदौरिया ने स्पष्ट किया है कि संगठन पुलिस की कार्रवाई को अदालत में चुनौती दे रहा है और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अपने अधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।
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