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युद्ध की बदलती चुनौती के लिए भारत तैयार सेना को मिलेंगे हाईटेक सिस्टम
Ratna Netam
7 Sept 2026 6:40 PM IST

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नई दिल्ली। बदलते युद्ध के तौर-तरीकों और भविष्य के खतरों को देखते हुए भारतीय सेना अपनी सुरक्षा और युद्धक क्षमताओं को तेजी से मजबूत करने की तैयारी कर रही है। पारंपरिक हथियारों के साथ अब केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर यानी CBRN खतरों से सैनिकों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में सेना बड़े पैमाने पर आधुनिक हथियार, सुरक्षा उपकरण और तकनीक खरीदने की योजना पर काम कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित खरीद का कुल मूल्य करीब **1 लाख करोड़ रुपये** तक हो सकता है।
नई खरीद में सैनिकों के लिए अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लेकर एंटी-टैंक सिस्टम, मिसाइल, ड्रोन, आधुनिक संचार प्रणाली और निगरानी उपकरण तक शामिल किए जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य युद्ध के मैदान में सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ सेना की मारक क्षमता को और मजबूत करना है।
CBRN खतरों से निपटने पर खास फोकस
भविष्य के युद्ध में सिर्फ बंदूक, तोप और मिसाइल ही चुनौती नहीं होंगी। केमिकल और बायोलॉजिकल एजेंट के इस्तेमाल का खतरा भी सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर परिस्थितियों में सैनिकों को सुरक्षित रखते हुए ऑपरेशन जारी रखने की क्षमता भी जरूरी मानी जाती है।
इसी को देखते हुए सेना CBRN सुरक्षा से जुड़े आधुनिक उपकरण हासिल करना चाहती है। इनमें ऐसे विशेष सूट, मास्क, डिटेक्शन सिस्टम और दूसरे सुरक्षा उपकरण शामिल हो सकते हैं, जो जहरीले रासायनिक पदार्थों या जैविक खतरों वाले वातावरण में सैनिकों की सुरक्षा में मदद करें।
ऐसे उपकरण सैनिकों को दूषित इलाके में सीमित समय तक सैन्य अभियान जारी रखने और खतरे की पहचान करने में सहायता करते हैं।
एंटी-टैंक हथियारों की ताकत भी बढ़ेगी
सेना की प्रस्तावित खरीद में एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल और उससे जुड़े सिस्टम भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आधुनिक युद्धों ने एक बार फिर दिखाया है कि टैंक और बख्तरबंद वाहनों को दूर से निशाना बनाने की क्षमता युद्ध के मैदान में बेहद अहम है।
इसी कारण भारतीय सेना पैदल सैनिकों के लिए ऐसे आधुनिक हथियारों की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है, जिन्हें जरूरत के मुताबिक तेजी से तैनात किया जा सके।
इसके अलावा गोला-बारूद के भंडार को मजबूत करने पर भी फोकस है, ताकि किसी लंबे सैन्य संघर्ष की स्थिति में सप्लाई चेन पर दबाव कम किया जा सके।
ड्रोन युद्ध के लिए भी बड़ी तैयारी
रूस-यूक्रेन युद्ध समेत हाल के संघर्षों में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ी है। छोटे निगरानी ड्रोन से लेकर हथियार लेकर उड़ने वाले मानव रहित सिस्टम तक आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
भारतीय सेना भी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। नए उपकरणों के जरिए दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, लक्ष्य की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर ड्रोन खतरे को निष्क्रिय करने की क्षमता बेहतर करने का लक्ष्य है।
इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सुरक्षित संचार प्रणालियों को भी मजबूत किया जा रहा है।
सैनिकों के व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण होंगे आधुनिक
खरीद योजना का एक अहम हिस्सा सैनिकों की व्यक्तिगत सुरक्षा से भी जुड़ा है। आधुनिक बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट, नाइट विजन डिवाइस और दूसरे सुरक्षात्मक उपकरण सैनिकों को उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों, रेगिस्तान, जंगल और बेहद ठंडे इलाकों में तैनात सैनिकों की जरूरत अलग-अलग होती है। इसलिए सेना ऐसे उपकरण चाहती है जो कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिल सकता है फायदा
करीब एक लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित खरीद में स्वदेशी रक्षा कंपनियों की बड़ी भूमिका रहने की उम्मीद है। सरकार पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा दे रही है।
इस नीति के तहत सेना की जरूरतों को ज्यादा से ज्यादा घरेलू कंपनियों और भारतीय रक्षा उद्योग के जरिए पूरा करने पर जोर है। इससे विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने के साथ देश में रक्षा उत्पादन और नई तकनीक विकसित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि करीब एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा विभिन्न प्रस्तावित खरीद और आवश्यकताओं को मिलाकर बताया जा रहा है। सभी खरीद एक साथ या एक ही अनुबंध के तहत नहीं होंगी। अलग-अलग उपकरणों के लिए मंजूरी, परीक्षण, टेंडर और अनुबंध की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम लागत और संख्या स्पष्ट होगी।
कुल मिलाकर सेना की तैयारी का फोकस अब केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं है। ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और CBRN जैसे नए खतरों को देखते हुए सैनिकों की सुरक्षा और आधुनिक युद्ध क्षमता दोनों को मजबूत करने की दिशा में बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है।
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