दिल्ली-एनसीआर

बैरिकेडिंग के बीच जंतर-मंतर पहुंचे AISA कार्यकर्ता

Kiran
5 Oct 2026 9:13 AM IST
बैरिकेडिंग के बीच जंतर-मंतर पहुंचे AISA कार्यकर्ता
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Delhi AISA कार्यकर्ताओं ने लगातार तीसरे दिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और जंतर-मंतर की ओर बढ़े, जबकि उस इलाके में भारी पुलिस बैरिकेडिंग और सुरक्षा बल तैनात थे। यह प्रदर्शन अशोक रोड स्थित आंध्र भवन सर्कल से शुरू हुआ, जहाँ प्रदर्शनकारी नारे लगाते हुए और भारी पुलिस मौजूदगी के बीच तय विरोध स्थल तक पहुँचने की कोशिश करते हुए जंतर-मंतर की ओर बढ़े।
जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड पार करने से रोकने की कोशिश की, तो उनकी सुरक्षाकर्मियों के साथ थोड़ी झड़प हुई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को बैरिकेड पर चढ़ने की कोशिश करते और पुलिस अधिकारियों को उन्हें रोकने की कोशिश करते देखा गया। यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग के कामकाज, SIR प्रक्रिया के संचालन और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने में कथित अनियमितताओं को लेकर देश भर में चल रहे बड़े आंदोलन का हिस्सा है।
दिल्ली में यह नया प्रदर्शन शनिवार को 150 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के एक दिन बाद हुआ। शुक्रवार को भी मध्य दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं सहित 500 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। शुक्रवार को हिरासत में लिए गए लोगों में बोरा, AAP नेता और कार्यकर्ता योगेंद्र यादव शामिल थे। पुलिस ने शुक्रवार के जमावड़े की अनुमति नहीं दी थी और मध्य दिल्ली में अतिरिक्त बल तैनात किया था। पिछले प्रदर्शनों के दौरान जंतर-मंतर की ओर जाने वाली कई सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए थे और आस-पास के कुछ मेट्रो स्टेशनों तक पहुँचने पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी गई थी।
यह ताज़ा प्रदर्शन इलाके में कड़ी सुरक्षा के बीच हो रहा है, जहाँ कई जगहों पर पुलिसकर्मी तैनात हैं और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड लगाए गए हैं। यह प्रदर्शन 'द इंडियन एक्सप्रेस' की उस जांच के बाद हो रहा है जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े उन फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनके संज्ञान या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे। SIR प्रक्रिया को लेकर अपने दो आयुक्तों द्वारा उठाए गए सवालों के घेरे में आए चुनाव आयोग ने कहा है कि किसी भी संस्थान में अलग-अलग राय और टिप्पणियाँ विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा होती हैं और उसके सभी आदेशों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त है तथा वे स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
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