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New Delhi , नई दिल्ली : भारत और जापान ने गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में अपने सहयोग को काफी बढ़ाया है। वे पूरे टेक्नोलॉजी स्टैक में एक "सुरक्षित, भरोसेमंद, समावेशी, मानव-केंद्रित, टिकाऊ, जवाबदेह और इनोवेशन-ओरिएंटेड AI इकोसिस्टम" को संयुक्त रूप से विकसित करने पर सहमत हुए हैं।
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर एक विशेष ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि AI द्विपक्षीय सहयोग में एक "प्रमुख उभरते हुए सेक्टर" (सनराइज़ सेक्टर) के रूप में उभरा है। दोनों देश गवर्नेंस, इनोवेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और AI के इस्तेमाल पर अपने विज़न को एक-दूसरे के साथ मिला रहे हैं।
मिसरी ने कहा, "आज की चर्चा का तीसरा मुख्य फोकस एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और इनोवेशन था। भारत-जापान AI सहयोग पहल को आगे बढ़ाते हुए, नेताओं ने आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग पर एक संयुक्त बयान जारी किया।" उन्होंने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दोनों देशों के बीच सहयोग में एक प्रमुख उभरते हुए सेक्टर के रूप में सामने आ रहा है।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी जापानी समकक्ष के बीच बैठक के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में सहयोग पर भारत-जापान संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने माना कि AI एक "युग-परिवर्तनकारी सामान्य-उद्देश्य वाली टेक्नोलॉजी" है जो अर्थव्यवस्थाओं, समाजों, विज्ञान, गवर्नेंस, उद्योग और सुरक्षा को बदल रही है।
उन्होंने कहा कि "AI के डिज़ाइन, विकास, तैनाती और गवर्नेंस में आज लिए गए फैसलों का इनोवेशन, सामाजिक कल्याण, आर्थिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।" दोनों पक्ष लचीलेपन और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने तथा इनोवेशन और विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ एक "सुरक्षित, भरोसेमंद, समावेशी, मानव-केंद्रित, टिकाऊ, जवाबदेह और इनोवेशन-ओरिएंटेड AI इकोसिस्टम" बनाने के लिए सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए।
बयान में भारत के 'महासागर' (MAHASAGAR) विज़न और जापान के अपडेटेड 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' (FOIP) फ्रेमवर्क के अनुरूप सहयोग पर भी ज़ोर दिया गया, जिसमें इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ में समान विचारधारा वाले देशों के साथ AI सहयोग को मजबूत करना शामिल है।गवर्नेंस पर, दोनों पक्षों ने "सुरक्षित, भरोसेमंद, मज़बूत और समावेशी AI" पर केंद्रित एक वैश्विक फ्रेमवर्क के महत्व को दोहराया और इस बात पर ज़ोर दिया कि AI गवर्नेंस "जोखिम-संतुलित, भागीदारीपूर्ण, जानकारीपूर्ण, आनुपातिक, इंटरऑपरेबल और अनुकूलनीय" होनी चाहिए। उन्होंने हिरोशिमा AI प्रोसेस (HAIP) और G20, OECD, GPAI और संयुक्त राष्ट्र जैसे मल्टीलेटरल प्लेटफॉर्म पर तालमेल बनाए रखने के लिए अपना समर्थन फिर से दोहराया।
दोनों नेताओं ने AI के पूरे लाइफ़साइकिल (मॉडल का मूल्यांकन, क्षमता का आकलन, बेंचमार्क और सुरक्षा टूल) में सहयोग को मज़बूत करने पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने माना कि फ़्रंटियर AI सिस्टम में सुरक्षा और गलत इस्तेमाल, दोनों तरह के जोखिम होते हैं। उन्होंने कहा कि "साइबरस्पेस एक ग्लोबल पब्लिक गुड (वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति) है" और एडवांस्ड सिस्टम के लिए जोखिम-आधारित मूल्यांकन और भरोसेमंद एक्सेस मैकेनिज़्म की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में, भारत और जापान सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम (डेटा सेंटर, GPU क्षमता, सेमीकंडक्टर और AI कंप्यूट रिसोर्स) में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए। साथ ही, उन्होंने "आर्थिक-सुरक्षा के नज़रिए" से AI टेक्नोलॉजी स्टैक में कमज़ोरियों का आकलन करने पर भी सहमति जताई।दोनों नेताओं ने FOIP डिजिटल कॉरिडोर पहल के तहत की जा रही कोशिशों का भी स्वागत किया।मॉडल डेवलपमेंट और रिसर्च के क्षेत्र में, दोनों पक्ष मल्टीलिंगुअल, ओपन-सोर्स और डोमेन-स्पेसिफिक AI मॉडल में सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमत हुए। बयान में अहम MoU का ज़िक्र किया गया, जिनमें IIT बॉम्बे के BharatGen और जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंफॉर्मेटिक्स (NII) के बीच मल्टीलिंगुअल साइंटिफिक लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर सहयोग, और Sarvam AI व Preferred Networks के बीच फ़ुल-स्टैक AI डेवलपमेंट पर सहयोग शामिल है।
दोनों नेताओं ने AI-आधारित वैज्ञानिक खोज और एडवांस्ड रिसर्च पर भी ज़ोर दिया और 'नेटवर्क ऑफ़ AI फ़ॉर साइंस (AI4S) इंस्टीट्यूशंस' के तहत सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही।ह्यूमन रिसोर्स के मामले में, दोनों पक्ष सेमीकंडक्टर और AI एप्लीकेशन सहित AI इकोसिस्टम में इंडस्ट्री-एकेडेमिया सहयोग और टैलेंट एक्सचेंज को गहरा करने पर सहमत हुए। बयान में जापान द्वारा भारत के "मज़बूत AI ह्यूमन कैपिटल" को मान्यता देने और भारतीय संस्थानों के साथ जापानी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने का स्वागत किया गया।
उन्होंने 2030 तक भारत से 500 अत्यधिक कुशल AI पेशेवरों को जापान बुलाने के लक्ष्य को फिर से दोहराया, साथ ही संयुक्त रिसर्च, इंटर्नशिप और रोज़गार के अवसरों को बढ़ावा देने के उपायों पर भी सहमति जताई।नेताओं ने जनहित के लिए AI समाधानों के सह-निर्माण (co-creation) पर ज़ोर दिया और सरकारों, स्टार्टअप, एकेडेमिया और इंडस्ट्री से स्केलेबल समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने सफल AI यूज़ केस को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए 'ग्लोबल AI इम्पैक्ट कॉमन्स' के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया।
"AI फ़ॉर ऑल" विज़न के तहत, दोनों पक्षों ने यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि AI से "पूरी मानवता" को फ़ायदा हो और यह समावेशी व टिकाऊ विकास का समर्थन करे, साथ ही सार्वजनिक सेवा वितरण में भी सुधार लाए। बयान में जापान द्वारा जल्द से जल्द AI समिट आयोजित करने की घोषणा का भी स्वागत किया गया, जो द्विपक्षीय टेक्नोलॉजी सहयोग को मज़बूत करने की दिशा में एक और कदम है।





