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CJP के बाद MJP की एंट्री, 72 घंटे में 3 लाख फॉलोअर्स

Rajeshwari Nishad
13 Oct 2026 11:25 PM IST
CJP के बाद MJP की एंट्री, 72 घंटे में 3 लाख फॉलोअर्स
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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बाद अब 'मक्खी जनता पार्टी' (MJP) तेजी से चर्चा में आ गई है। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी से प्रेरित होकर सामने आए इस व्यंग्यात्मक संगठन ने बहुत कम समय में लोगों का ध्यान खींचा है। संगठन ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि महज 72 घंटे के भीतर उसके इंस्टाग्राम पेज पर 40 लाख से अधिक व्यूज और 3.3 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए हैं। सोशल मीडिया अकाउंट पर आर्यन नाम के एक छात्र को संगठन का संस्थापक बताया गया है।
मक्खी जनता पार्टी की चर्चा उस समय शुरू हुई, जब सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अधिकारियों को समझाते हुए कहा था कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसी टिप्पणी को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर एमजेपी नाम सामने आया। अब यह समूह खुद को केवल एक मजाकिया पहल तक सीमित रखने के बजाय शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, नागरिक अधिकारों और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय दिखा रहा है।
72 घंटे में 40 लाख व्यूज और 3.3 लाख फॉलोअर्स का दावा
मक्खी जनता पार्टी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर अपनी लोकप्रियता से जुड़े आंकड़े साझा किए।संगठन के अनुसार, उसके इंस्टाग्राम पेज को सिर्फ 72 घंटों में 40 लाख से अधिक व्यूज मिले हैं। इसी अवधि में 3.3 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुड़ने का भी दावा किया गया है।हालांकि, ये आंकड़े संगठन की ओर से बताए गए हैं। स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि नहीं हुई है।
एमजेपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर आर्यन नाम के छात्र को संस्थापक अध्यक्ष बताया गया है। संगठन ने यह भी जानकारी दी है कि उसे प्रवक्ताओं की तलाश है।इससे संकेत मिलता है कि समूह सोशल मीडिया पर अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।CJI सूर्यकांत की टिप्पणी से कैसे बनी MJP?मक्खी जनता पार्टी के नाम की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई से जुड़ी है।नौ अक्टूबर को अदालत में दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन पर लगाई गई व्यापक पाबंदियों का मुद्दा उठा था।
सुनवाई के दौरान पीठ ने सुरक्षा कारणों से परिवहन सेवाओं को नियंत्रित करने और उन्हें पूरी तरह बंद कर देने के बीच अंतर बताया।इसी संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करने वाला उदाहरण दिया।इस टिप्पणी का आशय यह था कि किसी समस्या से निपटने के लिए उठाया गया कदम आवश्यकता से अधिक कठोर नहीं होना चाहिए।इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने टिप्पणी को व्यंग्यात्मक अंदाज में इस्तेमाल करना शुरू किया और मक्खी जनता पार्टी नाम चर्चा में आ गया।
कॉकरोच जनता पार्टी से क्या है संबंध?
एमजेपी से पहले कॉकरोच जनता पार्टी भी सोशल मीडिया पर चर्चित हो चुकी है।सीजेपी का नाम युवाओं को लेकर की गई एक विवादित टिप्पणी के बाद सामने आया था।शुरुआत में यह व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में दिखाई दिया, लेकिन बाद में इससे जुड़े लोगों ने विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए।हाल के दिनों में सीजेपी ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी आवाज उठाई है।मक्खी जनता पार्टी अब इसी संगठन के साथ संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है।हालांकि, दोनों समूहों के बीच किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है।
CJP के साथ मिलकर काम करने की कोशिश
मक्खी जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रति समर्थन जताया है।संगठन ने बताया कि वह सीजेपी के प्रतिनिधियों से संपर्क करने और साझा मुद्दों पर संभावित सहयोग के विकल्प तलाशने का प्रयास कर रहा है।एमजेपी का कहना है कि यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो कुछ मुद्दों पर संयुक्त रुख अपनाया जा सकता है।हालांकि, इस संबंध में अभी किसी निश्चित कार्यक्रम या संयुक्त आंदोलन की पुष्टि नहीं हुई है।
दोनों संगठनों के बीच तालमेल की संभावनाएं फिलहाल शुरुआती स्तर पर हैं।छात्रा नेहा बोरा के समर्थन में भी आया संगठनमक्खी जनता पार्टी ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की सदस्य नेहा बोरा के समर्थन में भी बयान जारी किया है।नेहा बोरा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से जुड़ी रही हैं।
एमजेपी ने अपने बयान में उनकी गतिविधियों का समर्थन करते हुए कहा कि सवाल उठाना और सार्वजनिक संस्थाओं से जवाबदेही की मांग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।इसके साथ संगठन ने शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध प्रदर्शन करने पर भी जोर दिया।एमजेपी ने स्वीकार किया कि हाल में एक विरोध प्रदर्शन आवश्यक प्रशासनिक अनुमति के बिना आयोजित हुआ था।संगठन ने लोगों से अपने अधिकारों का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करने की अपील की है।
जंतर-मंतर पर नेताओं की हिरासत को लेकर सवाल
मक्खी जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।मंगलवार को जारी एक बयान में संगठन ने सीजेपी से जुड़े आशुतोष रांका और सौरव दास का उल्लेख किया।रिपोर्ट के अनुसार, दोनों को जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने और भारतीय ध्वज फहराने से संबंधित घटनाक्रम के बाद हिरासत में लिया गया था।
एमजेपी का कहना है कि जंतर-मंतर एक निर्धारित प्रदर्शन स्थल है, इसलिए वहां शांतिपूर्ण विरोध की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए।संगठन ने लोकतांत्रिक संवाद और सार्वजनिक भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।हालांकि, कानून-व्यवस्था और प्रदर्शन की अनुमति से संबंधित निर्णयों में प्रशासनिक नियम भी लागू होते हैं।
पुराने इंस्टाग्राम अकाउंट को मिला नया नामएमजेपी के सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ी एक दिलचस्प जानकारी भी सामने आई है।रिपोर्ट के अनुसार, जिस इंस्टाग्राम अकाउंट से मक्खी जनता पार्टी की गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वह जून 2021 में बनाया गया था।
मौजूदा नाम अपनाने से पहले अकाउंट का यूजरनेम आठ बार बदला जा चुका है।इसका मतलब है कि अकाउंट नया नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद पेज को अब मक्खी जनता पार्टी की पहचान दी गई है।हालांकि, इससे पहले यह अकाउंट किन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता था, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
क्या MJP कोई पंजीकृत राजनीतिक दल है?
मक्खी जनता पार्टी के नाम में पार्टी शब्द शामिल है, लेकिन अभी इसे चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त या विधिवत पंजीकृत राजनीतिक दल मानने का कोई पुष्ट आधार सामने नहीं आया है।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह फिलहाल सोशल मीडिया पर सक्रिय एक व्यंग्यात्मक संगठन के रूप में सामने आया है।किसी संगठन का नाम राजनीतिक दल जैसा होना और उसका चुनाव आयोग में पंजीकृत होना अलग-अलग बातें हैं।
इसलिए एमजेपी को फिलहाल औपचारिक राजनीतिक दल बताना उचित नहीं होगा।सोशल मीडिया से सार्वजनिक मुद्दों तक पहुंचमक्खी जनता पार्टी का सामने आना यह दिखाता है कि सोशल मीडिया पर किसी टिप्पणी से शुरू हुई व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बन सकती है।एमजेपी ने अपने पोस्ट के जरिए केवल मजाकिया नाम तक सीमित रहने के बजाय विरोध प्रदर्शन और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर भी राय व्यक्त की है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ने का अर्थ अपने आप किसी व्यापक जनसंगठन की स्थापना नहीं होता।किसी समूह की वास्तविक गतिविधियों और सार्वजनिक प्रभाव का मूल्यांकन उसके आगे के काम के आधार पर ही किया जा सकता है।
आगे क्या करेगी मक्खी जनता पार्टी?
फिलहाल एमजेपी ने कॉकरोच जनता पार्टी के साथ संभावित सहयोग और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता जारी रखने का संकेत दिया है।संगठन प्रवक्ताओं की तलाश भी कर रहा है।
लेकिन उसके औपचारिक संगठनात्मक ढांचे, सदस्यता प्रक्रिया और भविष्य के किसी बड़े कार्यक्रम की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।कॉकरोच जनता पार्टी के बाद मक्खी जनता पार्टी की चर्चा ने सोशल मीडिया पर एक नया विषय जरूर पैदा कर दिया है।
अब देखना होगा कि 72 घंटे में लाखों फॉलोअर्स जुटाने का दावा करने वाला यह समूह आगे केवल ऑनलाइन गतिविधियों तक सीमित रहता है या सार्वजनिक मुद्दों पर कोई संगठित पहल करता है।
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