हरियाणा

800 करोड़ से बना भव्य शहीद स्मारक, पीएम मोदी करेंगे लोकार्पण

Rajeshwari Nishad
13 Oct 2026 11:01 PM IST
800 करोड़ से बना भव्य शहीद स्मारक, पीएम मोदी करेंगे लोकार्पण
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अंबाला। हरियाणा के अंबाला छावनी में देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के वीर शहीदों की याद में बनाया गया भव्य स्मारक पूरी तरह तैयार हो गया है। करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 'आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक' का उद्घाटन जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसके बाद इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित इस ऐतिहासिक स्मारक में स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं, क्रांतिकारियों के संघर्ष और देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों की गाथाओं को विशेष तरीके से प्रदर्शित किया गया है।
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्मारक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब प्रधानमंत्री के उद्घाटन का इंतजार है। हालांकि, उद्घाटन की निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। मंत्री के अनुसार, यह स्मारक केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
22 एकड़ में तैयार हुआ ऐतिहासिक स्मारक
अंबाला छावनी में अंबाला-दिल्ली जीटी रोड के पास करीब 22 एकड़ भूमि पर इस विशाल स्मारक को विकसित किया गया है।हरियाणा सरकार ने इसे एशिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा शहीद स्मारक बताया है। परिसर में ऐतिहासिक घटनाओं को प्रदर्शित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।
यहां आने वाले पर्यटक वर्ष 1857 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ हुए संघर्ष और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।स्मारक को इस प्रकार विकसित किया गया है कि इतिहास से जुड़ी घटनाओं को केवल पढ़ा ही नहीं, बल्कि दृश्य और श्रव्य माध्यमों से भी समझा जा सके।23 गैलरियों में दिखाई जाएगी क्रांति की कहानी
इस विशाल परिसर में 23 ऐतिहासिक गैलरियां तैयार की गई हैं। इनमें देश के विभिन्न हिस्सों में हुए स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित घटनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा।अंबाला, मेरठ, दिल्ली, झांसी और आगरा सहित अन्य क्षेत्रों में अंग्रेजी शासन के खिलाफ हुए संघर्षों की जानकारी यहां उपलब्ध कराई जाएगी।गैलरियों में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान, संघर्ष की परिस्थितियों और ऐतिहासिक घटनाक्रम को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
मंत्री अनिल विज के अनुसार, स्मारक का उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के उन पहलुओं से परिचित कराना है, जिन्हें आमतौर पर इतिहास की चर्चाओं में कम स्थान मिलता है।
700 से अधिक सेनानियों के नाम स्वर्ण अक्षरों में
स्मारक की एक प्रमुख विशेषता स्वतंत्रता संग्राम के 700 से अधिक वीरों को दिया गया सम्मान है।उनके नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए गए हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान को याद रख सकें।
इसके अलावा परिसर में श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष गैलरी भी विकसित की गई है।यहां देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले क्रांतिकारियों को सम्मान दिया जा सकेगा।सरकार का उद्देश्य उन वीरों की स्मृति को संरक्षित करना है, जिनके योगदान की जानकारी व्यापक स्तर पर नहीं पहुंच सकी।
आधुनिक तकनीक से जीवंत होगा इतिहास
शहीद स्मारक में दर्शकों को इतिहास का अलग अनुभव देने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।परिसर में 360 डिग्री प्रोजेक्शन, साउंड और लेजर शो जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।इन माध्यमों से दर्शक स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण घटनाओं को दृश्यात्मक रूप में समझ सकेंगे।
इसके अतिरिक्त लगभग 2,500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर भी बनाया गया है।स्मारक परिसर में कमल के आकार की करीब 63 मीटर ऊंची संरचना भी आकर्षण का केंद्र होगी।इन सुविधाओं का उद्देश्य ऐतिहासिक जानकारी को अधिक प्रभावशाली और रोचक तरीके से प्रस्तुत करना है।पांच इतिहासकारों की समिति ने किया शोध
अनिल विज ने बताया कि स्मारक में प्रदर्शित ऐतिहासिक तथ्यों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए पांच प्रतिष्ठित इतिहासकारों की समिति गठित की गई थी।इस समिति ने वर्ष 1857 की क्रांति से संबंधित दस्तावेजों और शोध सामग्री का अध्ययन किया।इतिहास से जुड़े प्रमाण जुटाने के लिए राष्ट्रीय पुरातत्व संबंधी संस्थानों के साथ लंदन की लाइब्रेरी और लाहौर से भी ऐतिहासिक दस्तावेज मंगवाए गए।इन अभिलेखों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में हुए संघर्षों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को स्मारक में स्थान दिया गया है।
अंबाला से शुरू हुए विद्रोह का भी उल्लेख
अनिल विज ने दावा किया कि ऐतिहासिक दस्तावेजों में 10 मई 1857 को अंबाला छावनी में मेरठ से लगभग नौ घंटे पहले विद्रोह शुरू होने का उल्लेख मिलता है।उन्होंने 60वीं और 5वीं नेटिव इन्फैंट्री के जवानों की गतिविधियों तथा अंग्रेज अधिकारियों के तत्कालीन अभिलेखों का हवाला दिया।मंत्री के मुताबिक, स्मारक में अंबाला के योगदान को विशेष रूप से दर्शाया गया है, ताकि लोग स्वतंत्रता संग्राम के इस ऐतिहासिक पहलू को समझ सकें।पर्यटकों के लिए विकसित की गई सुविधाएं
परिसर में 300 लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम भी बनाया गया है। स्मारक का पूरा भ्रमण करने में लगभग छह घंटे लग सकते हैं।आगंतुकों के लिए 40-40 लोगों के समूह बनाने की व्यवस्था की गई है। टिकट बुकिंग के लिए मोबाइल ऐप और वेबसाइट भी विकसित की गई है।इसके अलावा स्मृति-चिह्नों की बिक्री के लिए आठ दुकानें बनाई गई हैं। परिसर में बिजली आपूर्ति की अलग व्यवस्था तथा वैकल्पिक जनरेटर की सुविधा भी रखी गई है।
उद्घाटन की तारीख का इंतजार
अनिल विज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द इस राष्ट्रीय स्मारक का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद आम लोगों को प्रवेश दिया जाएगा।स्मारक को विद्यार्थियों, शोधार्थियों और इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।सरकार को उम्मीद है कि इससे स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। हालांकि, प्रधानमंत्री के उद्घाटन कार्यक्रम की निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है।
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