दिल्ली-एनसीआर

दादी के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सके अभिजीत दिपके

Ratna Netam
11 Oct 2026 9:36 PM IST
दादी के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सके अभिजीत दिपके
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हिंगोली। दिल्ली में हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके के परिवार ने रविवार को दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर निराशा जताई। महाराष्ट्र के हिंगोली में रहने वाले उनके माता-पिता ने कहा कि अभिजीत अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए, जिससे परिवार को गहरा दुख पहुंचा है। परिवार का कहना है कि दिल्ली पुलिस इस संवेदनशील परिस्थिति में थोड़ी नरमी बरत सकती थी और अभिजीत को अंतिम विदाई देने के लिए समय पर रिहा कर सकती थी।अभिजीत के पिता भगवान दिपके ने कहा कि यदि पुलिस चाहती तो उनके बेटे को इस शर्त पर भी जाने की अनुमति दे सकती थी कि वह अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद वापस दिल्ली लौट आएगा। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए यह बेहद भावुक समय था और अभिजीत का अपनी दादी को अंतिम बार नहीं देख पाना दुखद है।हालांकि, इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से अभिजीत को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने या नहीं देने से संबंधित आधिकारिक आदेश का विवरण उपलब्ध नहीं है। परिवार ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए हैं।
दादी को अंतिम विदाई नहीं दे पाए अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके के माता-पिता ने रविवार को बताया कि उनका बेटा अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। परिवार के अनुसार, दिल्ली में हिरासत से जुड़ी परिस्थितियों के कारण वह समय पर घर नहीं पहुंच पाया।महाराष्ट्र के हिंगोली में अभिजीत के पिता भगवान दिपके ने इस घटनाक्रम पर निराशा जताई।उन्होंने कहा कि परिवार को उम्मीद थी कि ऐसी परिस्थिति में पुलिस मानवीय दृष्टिकोण अपनाएगी और अभिजीत को अंतिम संस्कार में शामिल होने का अवसर मिलेगा।भगवान दिपके के अनुसार, यदि पुलिस समय रहते रिहाई की व्यवस्था कर देती, तो उनका बेटा अपनी दादी के अंतिम दर्शन कर सकता था।परिवार ने कहा कि अंतिम संस्कार जैसे अवसर पर किसी सदस्य का उपस्थित नहीं हो पाना दुखद होता है। विशेष रूप से तब, जब संबंधित व्यक्ति हिरासत में हो और उसकी रिहाई या यात्रा की अनुमति अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करती हो।
पिता भगवान दिपके ने पुलिस से जताई नाराजगी
अभिजीत के पिता भगवान दिपके ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके बेटे को अंतिम संस्कार में शामिल होने का अवसर दिया जा सकता था।उन्होंने कहा, "अगर वे (दिल्ली पुलिस) उसे समय पर रिहा कर देते—या इस शर्त पर भी रिहा करते कि अंतिम संस्कार के बाद उसे दिल्ली लौटना होगा—तो वह निश्चित रूप से अपनी दादी को देखने आ सकता था।"
भगवान दिपके के इस बयान से परिवार की निराशा सामने आई है।
उन्होंने कहा कि पुलिस के पास यह विकल्प था कि अभिजीत को सीमित समय के लिए घर जाने की अनुमति दी जाती और उसके बाद उसे वापस दिल्ली आने के लिए कहा जाता।उनका मानना है कि ऐसी व्यवस्था से अभिजीत अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी निभा सकता था और अपनी दादी को अंतिम विदाई दे सकता था।हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि परिवार की ओर से पुलिस को किसी औपचारिक आवेदन के माध्यम से ऐसी अनुमति देने का अनुरोध किया गया था या नहीं।
अंतिम संस्कार के बाद दिल्ली लौटने की शर्त भी थी स्वीकार
भगवान दिपके ने अपने बयान में कहा कि यदि दिल्ली पुलिस अभिजीत को अंतिम संस्कार के बाद वापस लौटने की शर्त पर रिहा करती, तो भी परिवार को कोई आपत्ति नहीं होती।उनके अनुसार, परिवार की प्राथमिकता केवल इतनी थी कि अभिजीत अपनी दादी को अंतिम बार देख सके और अंतिम संस्कार में शामिल हो सके।उन्होंने कहा कि पुलिस चाहती तो इस संवेदनशील स्थिति में ऐसी व्यवस्था पर विचार कर सकती थीपरिवार का कहना है कि अभिजीत को स्थायी रूप से हिरासत से मुक्त करने की मांग करने के बजाय अंतिम संस्कार में शामिल होने का अवसर दिया जा सकता था।हालांकि, ऐसी किसी व्यवस्था की कानूनी संभावना संबंधित हिरासत की प्रकृति, लागू प्रावधानों और सक्षम अधिकारी के निर्णय पर निर्भर करती है।इस मामले में उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि पुलिस के सामने कौन-कौन से कानूनी विकल्प मौजूद थे।
परिवार ने मानवीय आधार पर राहत की बात कही
अभिजीत दिपके के माता-पिता ने पुलिस से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपेक्षा जताई।परिवार के अनुसार, किसी करीबी सदस्य के निधन के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होना भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण होता है।भगवान दिपके ने कहा कि उनके बेटे को समय पर रिहा किया जाता, तो वह अपनी दादी के अंतिम दर्शन कर सकता था।परिवार की नाराजगी मुख्य रूप से इसी बात को लेकर है कि अभिजीत को अंतिम विदाई देने का अवसर नहीं मिल पायाउन्होंने यह भी कहा कि पुलिस अंतिम संस्कार के बाद दिल्ली लौटने की शर्त रख सकती थी।परिवार का मानना है कि ऐसी व्यवस्था से कानूनी प्रक्रिया और पारिवारिक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाया जा सकता था।
दिल्ली में हिरासत को लेकर पहले भी उठे सवाल
अभिजीत दिपके की हिरासत का मामला दिल्ली में CJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है।इससे पहले अभिजीत ने हिरासत के दौरान अपने साथ कथित अमानवीय व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया था।दिपके ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने किसी बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और वह गिरफ्तारी से नहीं डरते।वहीं, CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह के अनुसार, अभिजीत दिपके और पार्टी के दो अन्य कार्यकर्ताओं आशुतोष रंका तथा सौरव दास को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद रिहा किया गया था।रत्ना सिंह ने रिहाई से संबंधित जानकारी साझा करते हुए एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त का उल्लेख किया था।हालांकि, अभिजीत की रिहाई के सटीक समय और उनकी दादी के अंतिम संस्कार के समय के बीच कितना अंतर था, इसका विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
पुलिस के पक्ष से स्पष्ट होगी पूरी स्थिति
अभिजीत दिपके के परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए समय पर रिहा नहीं किया।हालांकि, इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से परिवार के आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि अभिजीत को उनकी दादी के निधन की सूचना कब दी गई थी और पुलिस ने अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए किसी व्यवस्था की पेशकश की थी या नहीं।इन तथ्यों की पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष और घटनाक्रम की समयरेखा महत्वपूर्ण होगी।परिवार की ओर से व्यक्त की गई निराशा और पुलिस की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया के बीच वास्तविक स्थिति इन्हीं विवरणों से स्पष्ट हो सकेगी।
बेटे के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचने से परिवार दुखी
महाराष्ट्र के हिंगोली में अभिजीत दिपके के माता-पिता ने रविवार को अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बेटा अपनी दादी को अंतिम विदाई नहीं दे पाया।पिता भगवान दिपके ने कहा कि दिल्ली पुलिस थोड़ी नरमी बरतती, तो अभिजीत अंतिम संस्कार में शामिल हो सकता था।उन्होंने दोहराया कि यदि पुलिस अंतिम संस्कार के बाद दिल्ली लौटने की शर्त भी रखती, तो अभिजीत उसका पालन करते हुए घर आ सकता था।फिलहाल परिवार ने इस पूरे घटनाक्रम पर दुख और नाराजगी जताई है। वहीं, पुलिस की ओर से संबंधित परिस्थितियों का विस्तृत आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।
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