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दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर भड़के अभिषेक मनु सिंघवी

Ratna Netam
11 Oct 2026 9:26 PM IST
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर भड़के अभिषेक मनु सिंघवी
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने रविवार को कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई को पूरी तरह गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताते हुए इसे शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करार दिया। सिंघवी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने किसी घटना के शुरू होने से पहले ही एहतियात के नाम पर लोगों को हिरासत में ले लिया, जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से कोई गलत काम किए जाने का सवाल ही नहीं उठता।कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि विशेष सुरक्षा उपायों के नाम पर इस अधिकार को सीमित नहीं किया जा सकता। सिंघवी ने दावा किया कि कुछ लोगों को गुरुग्राम से हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ को हवाई यात्रा के दौरान रोका गया।हालांकि, पुलिस कार्रवाई को गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताना सिंघवी का आरोप और कानूनी आकलन है। उपलब्ध जानकारी में इन हिरासतों की वैधता पर किसी अदालत के फैसले का उल्लेख नहीं है।
पुलिस कार्रवाई पर सिंघवी ने उठाए गंभीर सवाल
अभिषेक मनु सिंघवी ने रविवार को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि पुलिस ने एहतियाती हिरासत का सहारा लिया।उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदर्शनकारियों ने कोई गलत काम नहीं किया था, तो उन्हें पहले ही हिरासत में लेने की क्या आवश्यकता थी।सिंघवी ने कहा, "यह हिरासत पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। प्रदर्शनकारियों के कुछ गलत करने का तो सवाल ही नहीं उठता। ये हिरासतें तो किसी घटना के शुरू होने से पहले ही, एहतियात के तौर पर की गई हैं।"उन्होंने इस कार्रवाई को नागरिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हो रहे लोगों को पहले ही रोकना उचित नहीं है।कांग्रेस सांसद ने पुलिस की कार्रवाई के आधार और उसकी आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे कदमों का असर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर पड़ता है।
गुरुग्राम और हवाई यात्रा के दौरान हिरासत का दावा
सिंघवी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को केवल दिल्ली में ही नहीं, बल्कि अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया।उन्होंने कहा, "किसी को गुरुग्राम से उठाया गया, तो किसी को हवाई जहाज से। यह गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण विरोध करने के मौलिक अधिकार का पूरी तरह से उल्लंघन है।"कांग्रेस सांसद के अनुसार, इन कार्रवाइयों से यह सवाल उठता है कि प्रदर्शन शुरू होने से पहले लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने किन परिस्थितियों का आधार लिया।उन्होंने कहा कि यदि लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए एकत्र हो रहे हैं, तो उन्हें ऐसा करने का अवसर मिलना चाहिए।हालांकि, सिंघवी के बयान में हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या, उनके नाम या संबंधित पुलिस थानों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
शांतिपूर्ण विरोध के मौलिक अधिकार का मुद्दा
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पुलिस कार्रवाई को संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों से जोड़ते हुए सवाल उठाए।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(बी) नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 19(3) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था और भारत की संप्रभुता तथा अखंडता के हित में इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।ऐसे मामलों में किसी विशेष पुलिस कार्रवाई की वैधता उसके कानूनी आधार, परिस्थितियों और लागू नियमों पर निर्भर करती है।सिंघवी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई इन संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।उनका कहना था कि गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लोगों को एहतियात के नाम पर हिरासत में लेना स्वीकार्य नहीं है।
विशेष सुरक्षा उपायों के नाम पर कार्रवाई पर आपत्ति
कांग्रेस सांसद ने पुलिस की ओर से अपनाए गए कथित विशेष सुरक्षा उपायों पर भी सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।सिंघवी ने अपने बयान में कहा, "आप तथाकथित विशेष सुरक्षा उपायों के नाम पर ऐसा नहीं कर सकते।"उनका तर्क था कि प्रदर्शनकारियों को किसी घटना से पहले हिरासत में लेने का निर्णय गंभीर कानूनी सवाल पैदा करता है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों को किन कानूनी प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया था।पुलिस की ओर से कार्रवाई के लिए बताए गए आधिकारिक कारणों का विस्तृत विवरण भी उपलब्ध नहीं है।
एहतियाती हिरासत को लेकर उठे कानूनी सवाल
अभिषेक मनु सिंघवी ने अपने बयान में एहतियाती हिरासत की प्रक्रिया को लेकर विशेष आपत्ति जताई।उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों को किसी घटना के घटित होने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया।भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ परिस्थितियों में पुलिस को निवारक कार्रवाई करने के अधिकार दिए गए हैं। हालांकि, ऐसी कार्रवाई के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों और प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है।सिंघवी का आरोप है कि दिल्ली में की गई हिरासत की कार्रवाई इन सीमाओं से परे थी।उन्होंने प्रदर्शनकारियों के किसी गलत गतिविधि में शामिल होने की बात से इनकार करते हुए कहा कि पुलिस का कदम शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के खिलाफ था।इस मामले में हिरासत के आदेशों और संबंधित कानूनी प्रावधानों का विवरण सामने आने के बाद ही कार्रवाई की वैधता का स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा।
लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर कांग्रेस नेता की चिंता
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ने अपने बयान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण अधिकार बताया।उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपनी असहमति व्यक्त करने और गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार है।सिंघवी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शनकारियों को किसी संभावित घटना की आशंका के आधार पर पहले ही हिरासत में लेना गंभीर सवाल पैदा करता है।उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया।उनके बयान का प्रमुख मुद्दा यह रहा कि सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
पुलिस के आधिकारिक पक्ष का इंतजार
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले में अभिषेक मनु सिंघवी के आरोपों के बाद पुलिस कार्रवाई के कानूनी आधार को लेकर सवाल सामने आए हैं।कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कुछ लोगों को गुरुग्राम से और कुछ को हवाई यात्रा के दौरान हिरासत में लिया गया।हालांकि, उपलब्ध विवरण में इन घटनाओं से संबंधित पुलिस के आधिकारिक दस्तावेज या विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा कर दिया गया है या उनके संबंध में कोई अतिरिक्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई है।
हिरासत की कार्रवाई पर विवाद जारी
अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।उन्होंने एहतियाती हिरासत को गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के मौलिक अधिकार का मुद्दा उठाया।सिंघवी ने आरोप लगाया कि विशेष सुरक्षा उपायों के नाम पर लोगों को विरोध प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही हिरासत में लिया गया।फिलहाल इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष और संबंधित कानूनी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में हिरासत की परिस्थितियों तथा उसकी वैधता से जुड़े सवालों का अंतिम जवाब आधिकारिक रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा।
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