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- SIR विवाद के बीच 7 दिन...

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नई दिल्ली। देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है। विपक्षी दल जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भारत निर्वाचन आयोग ने पात्र मतदाताओं को दोबारा सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं की पहचान करेंगे, जिनके नाम मतदाता सूची से छूट गए हैं। इसके अलावा पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के नाम भी सूची में जोड़ने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। हालांकि सात दिनों में आठ लाख नए मतदाता जुड़ने के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है।
20 राज्यों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश
चुनाव आयोग ने एसआईआर पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इस संबंध में 29 सितंबर 2026 को लिखित निर्देश जारी किए गए थे।इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी अभियान को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया।
आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रह जाए। विशेष रूप से उन मतदाताओं पर ध्यान दिया जाएगा, जिनके नाम पहले की मतदाता सूची में मौजूद थे, लेकिन एसआईआर के बाद प्रकाशित सूची में शामिल नहीं हो सके।
घर-घर जाकर मतदाताओं की पहचान करेंगे BLO
विशेष अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारी पुरानी और नई मतदाता सूचियों का मिलान करेंगे।इसके बाद जिन लोगों के नाम वर्तमान सूची में नहीं मिलेंगे, उनके बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर अधिकारी संबंधित मतदाताओं के घर पहुंचकर उनकी पात्रता और वर्तमान निवास की स्थिति की जांच करेंगे।
यदि कोई व्यक्ति मतदान के लिए पात्र पाया जाता है, तो उसे फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में सहायता दी जाएगी।इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में संभावित गलतियों को सुधारना और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा करना है।
उत्तराखंड में आठ लाख से अधिक नाम हुए कम
एसआईआर के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़े बदलाव का उदाहरण उत्तराखंड में देखने को मिला है। राज्य में 3 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई।आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर शुरू होने से पहले उत्तराखंड में 79,60,762 मतदाता थे। पुनरीक्षण के बाद अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर 71,58,949 रह गई।
इस तरह राज्य की मतदाता संख्या में लगभग 8.02 लाख की कमी दर्ज की गई।दावा और आपत्ति प्रक्रिया के दौरान 1,29,872 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए, जबकि नियमों के अनुसार 1,04,708 नाम हटाए गए।इसलिए आठ लाख की संख्या को नए जुड़े मतदाताओं की संख्या बताना सही नहीं होगा।
उत्तराखंड के सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर
मतदाता सूची से छूटे लोगों की पहचान के लिए उत्तराखंड में विशेष अभियान की तैयारी की गई है।राज्य में एसआईआर के दौरान 8,26,977 मतदाताओं को एएसडीडी श्रेणी में चिह्नित किया गया था। इनमें ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिनके सत्यापन या गणना फॉर्म एकत्र करने में विभिन्न कारणों से समस्या आई।निर्वाचन विभाग के अनुसार, 8 से 10 अक्टूबर तक राज्य के 12,543 मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे।
इसके बाद 12 से 20 अक्टूबर तक घर-घर जाकर मतदाताओं की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। पात्र पाए जाने वाले लोगों को नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में सहायता दी जाएगी।
नए मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था
चुनाव आयोग ने केवल पहले से पंजीकृत मतदाताओं पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया है। अभियान के दौरान ऐसे युवाओं का नाम भी जोड़ा जाएगा, जो पहली बार मतदान करने के पात्र हुए हैं।18 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र भारतीय नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इसके अलावा ऐसे नागरिक भी आवेदन कर सकते हैं, जिनका नाम किसी कारण से मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है।चुनाव आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल voters.eci.gov.in पर फॉर्म-6 भरने की सुविधा उपलब्ध है।
दिल्ली में भी विशेष मतदाता पंजीकरण शिविर
दिल्ली में भी निर्वाचन विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। राजधानी के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 7 और 8 अक्टूबर को युवा मतदाताओं के लिए पंजीकरण शिविर आयोजित किए गए।
इन शिविरों में बूथ लेवल अधिकारी विद्यार्थियों को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और आवश्यक आवेदन भरने में सहायता प्रदान कर रहे हैं।
इसके अलावा 9 और 11 अक्टूबर को दिल्ली के मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित करने की घोषणा की गई है।
हाल में विभिन्न स्थानों पर हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई के कारण विस्थापित हुए पात्र नागरिकों के नाम भी मतदाता सूची में दर्ज कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।
SIR को लेकर विपक्ष लगातार कर रहा विरोध
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर देश में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है।
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया से गरीबों, प्रवासी मजदूरों और दस्तावेज संबंधी परेशानियों का सामना करने वाले नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किए हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए पुनरीक्षण आवश्यक है। आयोग ने पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
फॉर्म-6 के जरिए जुड़वा सकेंगे नाम
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है। जिन पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में नहीं हैं या जिनके नाम हट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दोबारा आवेदन कर सकते हैं।
इसके लिए फॉर्म-6 का उपयोग किया जाएगा। आयोग ने एसआईआर पूरा हो चुके क्षेत्रों में छूटे हुए मतदाताओं तक पहुंचने और उन्हें आवेदन में सहायता देने के निर्देश दिए हैं।
इस अभियान में राजनीतिक दलों और उनके बूथ स्तरीय प्रतिनिधियों की सहायता लेने पर भी जोर दिया गया है।
मतदाता सूची की पारदर्शिता पर जोर
चुनाव आयोग के सामने इस समय मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने और सभी पात्र नागरिकों का नाम शामिल करने की दोहरी चुनौती है।
विशेष अभियान के माध्यम से उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है, जो एसआईआर के दौरान किसी कारण से सूची में शामिल नहीं हो सके।
मतदाताओं को भी सलाह दी जा रही है कि वे आधिकारिक पोर्टल या संबंधित निर्वाचन कार्यालय के माध्यम से अपना नाम जांच लें।
फिलहाल आयोग के विशेष अभियान के बाद विभिन्न राज्यों में नाम जोड़ने और सत्यापन की प्रक्रिया तेज की जा रही है। अभियान पूरा होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने नए और पहले छूटे हुए मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए गए।
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